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टेलीकॉम कंपनियों के एजेंटों ने खुद को बैंक अधिकारी बता 300 खातों से साफ किए 50 लाख
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टेलीकॉम कंपनियों के एजेंटों ने खुद को बैंक अधिकारी बता 300 खातों से साफ किए 50 लाख
गाजियाबाद। साइबर सेल ने आठवीं और 12 वीं पास दो ऐसे शातिरों को गिरफ्तार किया है जिन्होंने बैंक अधिकारी बनकर दो साल में 300 लोगों के साथों से 50 लाख रुपये की रकम साफ कर दी। मोबाइल कंपनी के एजेंट के रूप में काम करने वाले ये साइबर अपराधी केवाईसी कराने और क्त्रस्ेडिट कार्ड की लिमिट बढ़वाने की बात कहकर एनी हेल्प डेस्क जैसी रिमोट एक्सेस एप डाउनलोड कराते थे। इससे मोबाइल एक्सेस अपने हाथ में ले लेते थे। इसकी मदद से क्रेडिट कार्ड से खरीदारी करते थे।
साइबर सेल के नोडल अधिकारी व सीओ इंदिरापुरम अभय कुमार मिश्र ने बताया कि अलीगढ़ के बड़ागांव अकबरपुर निवासी राहुल कुमार और गांव बहमती निवासी पुष्पेंद्र को गिरफ्तार किया है। 12वीं पास राहुल एयरटेल और 8वीं पास पुष्पेंद्र वोडाफोन कंपनी में एजेंट हैं, जो सिम कार्ड एक्टिवेट करते हैं। सिम कार्ड लेने वाले लोगों के आधार कार्ड पर फोटोशॉप से फोटो बदलकर फर्जी आईडी बनाते और उस पर सिम कार्ड जारी कर लेते थे। इसके बाद बैंकों में कार्यरत अपने जानकारों से झूठ बोलकर खाता धारकों व क्त्रस्ेडिट कार्ड धारकों का डाटा लेते थे। वह कहते थे उन्हें अपनी कंपनी के सिम कार्ड का टारगेट पूरा करना है। इसके लिए उन्हें लोगों से बातचीत करनी है। वे लोगों का खाता संख्या, क्त्रस्ेडिट व डेबिट कार्ड संख्या और मोबाइल नंबर लेते थे।
ऐसे की ठगी
- फर्जी आईडी के नंबर से फोन कर केवाईसी अपडेट कराने या क्त्रस्ेडिट कार्ड की लिमिट बढ़वाने के लिए कहते थे।
- मोबाइल में एनी हेल्प डेस्क जैसी रिमोट एक्सेस एप डाउनलोड कराते थे, मोबाइल एक्सेस अपने हाथ में ले लेते थे।
- बैंक में रजिस्टर्ड मोबाइल की जगह अपना नंबर दर्ज करा देते थे। इससे बैंक के मेसेज इसी नंबर पर आते थे।
- खाते, डेबिट व क्त्रस्ेडिट कार्ड की डिटेल के जरिये ऑनलाइन शॉपिंग करते और महंगी चीजें मंगाते थे।
मोदीनगर व मसूरी में दर्ज मामलों में ट्रेस हुए आरोपी
मोदीनगर के गांव बेगमाबाद बुदाना निवासी सरफराज ने केस दर्ज कराया था। उनके मुताबिक उनके पास 18 अगस्त को अनजान नंबर से कॉल आई थी। कॉलर ने खुद को एसबीआई क्त्रस्ेडिट कार्ड डिपार्टमेंट का अधिकारी बताते हुए कहा कि उसने रिवार्ड प्वाइंट कैश कराने के केलिए कॉल की है। इसके बाद झांसे में लेकर उसने खाते न क्त्रस्ेडिट कार्ड की जानकारी ले ली, जिसके बाद क्त्रस्ेडिट कार्ड से 63 सौ रुपये कट गए। इसी तरह मसूरी के भी एक पीड़ित ने केस दर्ज कराया था। मामलों की जांच में आरोपी साइबर सेल की रडार पर आए।
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ऑनलाइन सामान खरीदकर कम कीमत में बेच देते थे
साइबर सेल प्रभारी सुमित कुमार ने बताया कि आरोपी ऑनलाइन सामान खरीदकर उसे फर्जी पते पर मंगवा लेते थे। इसके बाद उस प्रोडक्ट को सस्ते दाम में बेच देते थे। आरोपियों ने हाल ही में पांच मोबाइल मंगाकर उन्हें कम कीमत में बेच दिया। आरोपियों का एक खाता ट्रेस हुआ है, जिसमें करीब 8 लाख की ट्रांजेक्शन मिली है। एयरटेल व वोडाफोन कंपनी को ईमेल भेजकर कुछ जानकारी मांगी गई है। दो साल में आरोपियों ने कितने सिम एक्टीवेट कराए, उसका डाटा मांगा गया है। साथ ही कितने सिम एक ही नाम पर जारी किए गए, इसकी जानकारी भी मांगी गई है।
ऑनलाइन केवाईसी होती है और न लिमिट बढ़ती है
मेरठ जोन पुलिस के साइबर एक्सपर्ट कर्मवीर सिंह ने बताया कि बैंक द्वारा ऑनलाइन केवाईसी या क्त्रस्ेडिट कार्ड लिमिट नहीं बढ़ाई जाती है। लिहाजा लोग इसके झांसे में न आएं। इसके लिए संबंधित बैंक शाखा में संपर्क करें। अगर कोई कॉल आती भी है तो उसे खाते की जानकारी न दें। कोई ओटीपी शेयर न करें।
साइबर ठगी होने पर यहां करें शिकायत
- एनसीसीआरपी (नेशनल साइबर क्त्रसइम रिपोर्टिंग पोर्टल) पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
- यूपी कॉप एप में साइबर अपराध की शिकायत दर्ज करने का अलग विकल्प है।
- केंद्र सरकार द्वारा जारी 155260 नंबर मिलाकर शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
- cybercrime.gàæv.in पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
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गाजियाबाद। साइबर सेल ने आठवीं और 12 वीं पास दो ऐसे शातिरों को गिरफ्तार किया है जिन्होंने बैंक अधिकारी बनकर दो साल में 300 लोगों के साथों से 50 लाख रुपये की रकम साफ कर दी। मोबाइल कंपनी के एजेंट के रूप में काम करने वाले ये साइबर अपराधी केवाईसी कराने और क्त्रस्ेडिट कार्ड की लिमिट बढ़वाने की बात कहकर एनी हेल्प डेस्क जैसी रिमोट एक्सेस एप डाउनलोड कराते थे। इससे मोबाइल एक्सेस अपने हाथ में ले लेते थे। इसकी मदद से क्रेडिट कार्ड से खरीदारी करते थे।
साइबर सेल के नोडल अधिकारी व सीओ इंदिरापुरम अभय कुमार मिश्र ने बताया कि अलीगढ़ के बड़ागांव अकबरपुर निवासी राहुल कुमार और गांव बहमती निवासी पुष्पेंद्र को गिरफ्तार किया है। 12वीं पास राहुल एयरटेल और 8वीं पास पुष्पेंद्र वोडाफोन कंपनी में एजेंट हैं, जो सिम कार्ड एक्टिवेट करते हैं। सिम कार्ड लेने वाले लोगों के आधार कार्ड पर फोटोशॉप से फोटो बदलकर फर्जी आईडी बनाते और उस पर सिम कार्ड जारी कर लेते थे। इसके बाद बैंकों में कार्यरत अपने जानकारों से झूठ बोलकर खाता धारकों व क्त्रस्ेडिट कार्ड धारकों का डाटा लेते थे। वह कहते थे उन्हें अपनी कंपनी के सिम कार्ड का टारगेट पूरा करना है। इसके लिए उन्हें लोगों से बातचीत करनी है। वे लोगों का खाता संख्या, क्त्रस्ेडिट व डेबिट कार्ड संख्या और मोबाइल नंबर लेते थे।
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ऐसे की ठगी
- फर्जी आईडी के नंबर से फोन कर केवाईसी अपडेट कराने या क्त्रस्ेडिट कार्ड की लिमिट बढ़वाने के लिए कहते थे।
- मोबाइल में एनी हेल्प डेस्क जैसी रिमोट एक्सेस एप डाउनलोड कराते थे, मोबाइल एक्सेस अपने हाथ में ले लेते थे।
- बैंक में रजिस्टर्ड मोबाइल की जगह अपना नंबर दर्ज करा देते थे। इससे बैंक के मेसेज इसी नंबर पर आते थे।
- खाते, डेबिट व क्त्रस्ेडिट कार्ड की डिटेल के जरिये ऑनलाइन शॉपिंग करते और महंगी चीजें मंगाते थे।
मोदीनगर व मसूरी में दर्ज मामलों में ट्रेस हुए आरोपी
मोदीनगर के गांव बेगमाबाद बुदाना निवासी सरफराज ने केस दर्ज कराया था। उनके मुताबिक उनके पास 18 अगस्त को अनजान नंबर से कॉल आई थी। कॉलर ने खुद को एसबीआई क्त्रस्ेडिट कार्ड डिपार्टमेंट का अधिकारी बताते हुए कहा कि उसने रिवार्ड प्वाइंट कैश कराने के केलिए कॉल की है। इसके बाद झांसे में लेकर उसने खाते न क्त्रस्ेडिट कार्ड की जानकारी ले ली, जिसके बाद क्त्रस्ेडिट कार्ड से 63 सौ रुपये कट गए। इसी तरह मसूरी के भी एक पीड़ित ने केस दर्ज कराया था। मामलों की जांच में आरोपी साइबर सेल की रडार पर आए।
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ऑनलाइन सामान खरीदकर कम कीमत में बेच देते थे
साइबर सेल प्रभारी सुमित कुमार ने बताया कि आरोपी ऑनलाइन सामान खरीदकर उसे फर्जी पते पर मंगवा लेते थे। इसके बाद उस प्रोडक्ट को सस्ते दाम में बेच देते थे। आरोपियों ने हाल ही में पांच मोबाइल मंगाकर उन्हें कम कीमत में बेच दिया। आरोपियों का एक खाता ट्रेस हुआ है, जिसमें करीब 8 लाख की ट्रांजेक्शन मिली है। एयरटेल व वोडाफोन कंपनी को ईमेल भेजकर कुछ जानकारी मांगी गई है। दो साल में आरोपियों ने कितने सिम एक्टीवेट कराए, उसका डाटा मांगा गया है। साथ ही कितने सिम एक ही नाम पर जारी किए गए, इसकी जानकारी भी मांगी गई है।
ऑनलाइन केवाईसी होती है और न लिमिट बढ़ती है
मेरठ जोन पुलिस के साइबर एक्सपर्ट कर्मवीर सिंह ने बताया कि बैंक द्वारा ऑनलाइन केवाईसी या क्त्रस्ेडिट कार्ड लिमिट नहीं बढ़ाई जाती है। लिहाजा लोग इसके झांसे में न आएं। इसके लिए संबंधित बैंक शाखा में संपर्क करें। अगर कोई कॉल आती भी है तो उसे खाते की जानकारी न दें। कोई ओटीपी शेयर न करें।
साइबर ठगी होने पर यहां करें शिकायत
- एनसीसीआरपी (नेशनल साइबर क्त्रसइम रिपोर्टिंग पोर्टल) पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
- यूपी कॉप एप में साइबर अपराध की शिकायत दर्ज करने का अलग विकल्प है।
- केंद्र सरकार द्वारा जारी 155260 नंबर मिलाकर शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
- cybercrime.gàæv.in पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।