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दादा-पापा के आंदोलन के गवाह बन रहे बच्चे, बुजुर्गों की कर रहे हैं सेवा 

Sun, 03 Jan 2021 08:34 PM IST
Mohit Mudgal प्रभात पांडेय, अमर उजाला, गाजियाबाद 
प्रभात पांडेय, अमर उजाला, गाजियाबाद  Published by: Mohit Mudgal Updated Sun, 03 Jan 2021 08:34 PM IST
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ghaziabad: Children becoming witnesses of father, grandfather movement, serving elders
किसान आंदोलन में शामिल हुए बच्चे - फोटो : अमर उजाला

यूपी गेट पर किसान आंदोलन में शामिल दादा- पिता के आंदोलन का गवाह बनने के लिए परिवार के बच्चे भी यूपी गेट पर पहुंच रहे हैं। परिजनों का कहना है कि सरकार ने मांगें मानी तो उनके बच्चों का ही भविष्य संवरेगा। यह आंदोलन इतिहास के पन्नों में दर्ज किया जाएगा। इसके लिए बच्चे यहां आकर फोटो और वीडियो में आंदोलन को कैद कर रहे हैं। यहां पर लंगर में अपनी सेवाएं भी दे रहे हैं।

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विभिन्न राज्यों और जिलों से आए किसान कड़ाके की ठंड में भी यूपी गेट पर कृषि कानूनों के विरोध में डटे हुए हैं। अब गांव से आए किसानों के परिवार के बच्चे आंदोलन में शामिल होने के लिए यूपी गेट पर पहुंचने लगे हैं। किसानों के परिवारों ने बातचीत में बताया कि उनके बच्चे भी अच्छा पढ़ लिख सके। उनका भविष्य सवर जाए। इसके लिए वह अपना हक मांग रहे हैं।
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परिवार के लोग बच्चों को लेकर आंदोलन में आए हैं। उनका कहना है कि बच्चे यह जान सके कि उनके ही उज्जवल भविष्य के लिए उनके दादा और पिता किस तरह से इतनी ठंड में लड़ाई लड़ रहे हैं। यह आंदोलन इंतिहास में लिखा जाना है। बच्चे यहां आकर आंदोलन करने वाले किसानों की सेवा कर रहे हैं। फोटो और वीडियो बनाकर आंदोलन को कैद कर रहे हैं। जिसे वह संजो कर रख सके।
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बच्चों की जुबानी

  • पीलीभीत के पूरनपुर के रहने वाले अभिजोत सिंह चौथी कक्षा में पढ़ते हैं। उनके पापा और दादा आंदोलन में शामिल हैं। वह पिछले पांच दिनों से चाचा के साथ यहां पर आए हैं। लंगर में सेवा दे रहे हैं। बच्चे का कहना है कि दादा और पापा एक महीने से आंदोलन कर रहे हैं। उन्हें देखना था कि वह किस तरह से यहां पर रह रहे हैं। इसके लिए वह यहां पर आए।
  • रूद्रपुर से हर्षदीप सिंह अपने परिवार के 14 लोगों के साथ यूपी गेट पर पहुंचे। वह छठी कक्षा के छात्र हैं। उनके पिता यहां पर आंदोलन कर रहे हैं। वह कुछ दिन यहां रखकर पूरे आंदोलन को देखेंगे। यहां रहकर सभी की सेवा करेंगे। उनका कहना था कि वह जमीन बचाने के लिए यह लड़ाई लड़ रहे हैं।
  • रूद्रपुर से परिवार के साथ सुखमन कौर यहां किसान आंदोलन में पहुंची हैं। वह तीसरी कक्षा की छात्रा हैं। उन्होंने बातचीत में बताया कि वह उनके परिवार से दादा-पापा दादी सभी लोग आंदोलन कर रहे हैं। वह आंदोलन को देखने के लिए आई हैं। यहां चल रही रसोई में वह परिवार के साथ हाथ भी बंटा रही हैं।
  • उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर से रवनीत परिवार के साथ आई हैं। वह भी तीसरी कक्षा में पढ़ती हैं। बृहस्पतिवार को ही वह मम्मी और घर के कई महिलाओं के साथ आंदोलन में पहुंची हैं। उनका कहना है कि उनके दादा और पापा उनके लिए यहां पर हक मांग रहे हैं। जिससे वह अच्छे कॉलेज में पढ़ सके।
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