{"_id":"58e123e74f1c1b533e5b4236","slug":"gda-to-take-281-acres-of-land-in-madhuban-bapudham-scheme","type":"story","status":"publish","title_hn":"मधुबन-बापूधाम योजना में 281 एकड़ जमीन लेगा जीडीए","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मधुबन-बापूधाम योजना में 281 एकड़ जमीन लेगा जीडीए
अमर उजाला, गाजियाबाद
Updated Mon, 03 Apr 2017 12:27 AM IST
विज्ञापन
फ्लैट
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गाजियाबाद। मधुबन-बापूधाम आवासीय योजना में अब जीडीए बची हुई 281 एकड़ जमीन भी जल्द ही अधिग्रहीत करेगा। जीडीए की हाईपावर कमेटी ने सर्वे के बाद रिपोर्ट तैयार कर प्रभारी उपाध्यक्ष रवींद्र गोडबोले को सौंप दी है।
विज्ञापन
कमेटी की रिपोर्ट के बाद अब जीडीए इस 281 एकड़ जमीन भूमि अधिग्रहण की नई पॉलिसी के आधार पर एक्वायर कर किसानों और सहारा ग्रुप को बढ़ा मुआवजा देगा। नई पॉलिसी पर मुआवजा देने के लिए जीडीए को करीब 750 करोड़ रुपया अतिरिक्त खर्च करना पड़ेगा।
विज्ञापन
ऐसे में बोर्ड बैठक में इस प्रस्ताव को रखे जाने पर प्रमुख सचिव आवास सदाकांत मिश्र ने फिर से जमीन का फिजिकल सर्वे कराने के निर्देश दिए थे। दिसंबर 2016 में हुई बोर्ड बैठक में उन्होंने कहा था कि जीडीए सिर्फ उसी जमीन का अधिग्रहण करे, जो इस आवासीय योजना के लिए अतिआवश्यक हो। सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक 281 एकड़ की पूरी जमीन का अधिग्रहण करना जीडीए के लिए आवश्यक हो गया है। अब अधिकारी जमीन छोड़ने के पक्ष में नहीं हैं।
विज्ञापन
इसलिए जरूरी होगा अधिग्रहण
मधुबन-बापूधाम आवासीय योजना में बाकी बची 281 एकड़ जमीन का अधिग्रहण करना जीडीए के लिए इसलिए जरूरी हो गया है कि प्रस्तावित जमीन को जीडीए पहले ही लोगों को आवंटित कर पैसा जमा करा चुका है। ऐसे में अब उन्हें प्लाट देने के लिए जमीन अधिग्रहण करना जरूरी है।
वहीं ग्रुप हाउसिंग के लिए चयनित जमीन भी अभी जीडीए के कब्जे में नहीं आई है। जबकि जीडीए को इसी जमीन से ज्यादा आमदनी होनी है। आवासीय योजना पर आने वाला खर्च ऐसी ही जमीनों से निकलना है। यानी ग्रुप हाउसिंग के लिए चयनित जमीन का अधिग्रहण भी जरूरी हो गया है। सामुदायिक सुविधाओं को विकसित करने के लिए भी जीडीए को जमीन अधिग्रहण करना है।
यह था मामला
एनएच-58 से सटी जीडीए की मधुबन-बापूधाम आवासीय योजना 2004 में शुरू हो गई थी। 1234 एकड़ की इस योजना में जीडीए 800 एकड़ भूमि पहले ही चरण में अधिग्रहीत कर चुका था। 434 एकड़ जमीन को लेकर किसान हाईकोर्ट चले गए थे।
हाईकोर्ट से जीडीए के पक्ष में फैसला आने के बाद कुछ किसानों ने मुआवजा उठाकर जमीन जीडीए को दे दी। अब 281 एकड़ जमीन के मालिक हाईकोर्ट के फैसले के विरोध में सुप्रीम कोर्ट चले गए थे। इनमें सहारा ग्रुप भी शामिल था। सहारा ग्रुप की करीब 91 एकड़ जमीन इस योजना में अधिग्रहीत की जा रही थी।
सुप्रीम कोर्ट में जीडीए के खिलाफ 76 याचिकाएं दाखिल हुई थीं। 30 नवंबर 2016 को सुप्रीम कोर्ट ने किसानों और सहारा ग्रुप के हित में फैसला देते हुए भूमि अधिग्रहण की नई पॉलिसी के तहत किसानों को मुआवजा देने का आदेश दिया था। पूर्व में जीडीए को इस 281 एकड़ जमीन के लिए जहां करीब 250 करोड़ रुपये मुआवजा देना था, अब तकरीबन एक हजार करोड़ देना होगा।
मधुबन-बापूधाम आवासीय योजना में यह भी होगा
बुनकर मार्ट, 30 प्लॉट ग्रुप हाउसिंग के लिए, एलआईजी, एमआईजी आवास, विद्युत सब-स्टेशन, प्राइमरी स्कूल, हाईस्कूल, डिग्री कॉलेज, धार्मिक स्थलों के लिए स्थान, नर्सिंग होम, टेलीफोन एक्सचेंज, फायर स्टेशन, 15 फीसदी जमीन पर पार्क
अधिकारी बोले
सर्वे रिपोर्ट मिल चुकी है। 281 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा। नई भूमि अधिग्रहण पॉलिसी के मुताबिक किसानों को मुआवजा दिया जाएगा। 17 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर इसकी जानकारी दी जाएगी। भू-अर्जन विभाग को मुआवजा राशि उपलब्ध कराई जाएगी। - रवींद्र गोडबोले, प्रभारी उपाध्यक्ष, जीडीए