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Ghaziabad News: भारत नंबर लेने का क्रेज बढ़ा, अनुमति न मिलने से 30 से 35 आवेदन हर माह निरस्त
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गाजियाबाद। नए वाहन खरीदारों, खासकर निजी कंपनियों और आईटी सेक्टर में काम करने वाले युवाओं में भारत (बीएच) सीरीज नंबर प्लेट लेने का क्रेज तेजी से बढ़ा है। पूरे देश में बिना रोक-टोक वाहन चलाने और 15 साल का भारी रोड टैक्स एकमुश्त न देने की सहूलियत के कारण इसकी मांग बढ़ी है। हालांकि नियमों की अधूरी जानकारी और कंपनी से जरूरी अनुमति न मिलने से युवाओं का यह सपना अधूरा रह रहा है। संभागीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) में हर माह आने वाले 50 से 55 आवेदनों में से करीब 30 से 35 आवेदन जांच में निरस्त हो रहे हैं।
एआरटीओ प्रशासन अशोक कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि निजी क्षेत्र के उन्हीं कर्मचारियों को बीएच सीरीज नंबर आवंटित किया जा सकता है, जिनकी कंपनी का दफ्तर कम से कम चार राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों में हो। अक्सर कर्मचारी ऐसी कंपनियों में कार्यरत होते हैं, जिनकी शाखाएं केवल दो या तीन राज्यों तक सीमित हैं। इसके अलावा कई निजी कंपनियां कर्मचारियों को अंतर-राज्यीय स्थानांतरण (ट्रांसफरेबल जॉब) का आधिकारिक प्रमाणपत्र देने से इन्कार कर देती हैं। आवेदन के साथ फॉर्म-60 और जीएसटी विवरण सही न मिलने पर आरटीओ स्तर पर फाइल निरस्त कर दी जाती है।
युवाओं में इसके प्रति रुझान की बड़ी वजह यह है कि बीएच सीरीज नंबर पूरे देश में वैध होता है। नौकरी बदलने या दूसरे राज्य में ट्रांसफर होने पर वाहन का दोबारा पंजीकरण कराने, स्थानीय आरटीओ से एनओसी लेने और दोबारा रोड टैक्स जमा करने का झंझट पूरी तरह खत्म हो जाता है। साथ ही गाड़ी खरीदते वक्त 15 साल का रोड टैक्स एक साथ देने के बजाय हर दो साल पर किस्तों में टैक्स चुकाने की सुविधा मिलती है, जिससे ऑन-रोड कीमत पर पड़ने वाला वित्तीय बोझ काफी कम हो जाता है।
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बीएच सीरीज के लिए जरूरी दस्तावेजों में नियोक्ता का वर्किंग सर्टिफिकेट (फॉर्म-60) अनिवार्य है। यह कंपनी के लेटरहेड पर अधिकृत अधिकारी द्वारा जारी होना चाहिए, जिसमें कर्मचारी का पद और ट्रांसफरेबल जॉब का स्पष्ट उल्लेख हो। इसके साथ कंपनी के चार राज्यों में उपस्थिति का प्रमाण, उन राज्यों के वैध जीएसटी पंजीकरण दस्तावेज, कंपनी द्वारा जारी वैध पहचान पत्र, हालिया सैलरी स्लिप और वर्तमान में कार्यरत होने का प्रमाण देना होता है।
सरकारी कर्मचारियों, बैंक, पीएसयू या रक्षा क्षेत्र के कर्मियों के लिए संबंधित विभाग द्वारा जारी आधिकारिक पहचान पत्र और सेवा प्रमाणपत्र जरूरी है। इसके अलावा वाहन डीलर द्वारा जारी सेल सर्टिफिकेट (फॉर्म-21), रोडवर्थीनेस सर्टिफिकेट (फॉर्म-22), वैध वाहन बीमा और आधार कार्ड व निवास प्रमाणपत्र भी जरूरी दस्तावेजों में शामिल हैं।
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एआरटीओ प्रशासन अशोक कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि निजी क्षेत्र के उन्हीं कर्मचारियों को बीएच सीरीज नंबर आवंटित किया जा सकता है, जिनकी कंपनी का दफ्तर कम से कम चार राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों में हो। अक्सर कर्मचारी ऐसी कंपनियों में कार्यरत होते हैं, जिनकी शाखाएं केवल दो या तीन राज्यों तक सीमित हैं। इसके अलावा कई निजी कंपनियां कर्मचारियों को अंतर-राज्यीय स्थानांतरण (ट्रांसफरेबल जॉब) का आधिकारिक प्रमाणपत्र देने से इन्कार कर देती हैं। आवेदन के साथ फॉर्म-60 और जीएसटी विवरण सही न मिलने पर आरटीओ स्तर पर फाइल निरस्त कर दी जाती है।
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युवाओं में इसके प्रति रुझान की बड़ी वजह यह है कि बीएच सीरीज नंबर पूरे देश में वैध होता है। नौकरी बदलने या दूसरे राज्य में ट्रांसफर होने पर वाहन का दोबारा पंजीकरण कराने, स्थानीय आरटीओ से एनओसी लेने और दोबारा रोड टैक्स जमा करने का झंझट पूरी तरह खत्म हो जाता है। साथ ही गाड़ी खरीदते वक्त 15 साल का रोड टैक्स एक साथ देने के बजाय हर दो साल पर किस्तों में टैक्स चुकाने की सुविधा मिलती है, जिससे ऑन-रोड कीमत पर पड़ने वाला वित्तीय बोझ काफी कम हो जाता है।
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बीएच सीरीज के लिए जरूरी दस्तावेजों में नियोक्ता का वर्किंग सर्टिफिकेट (फॉर्म-60) अनिवार्य है। यह कंपनी के लेटरहेड पर अधिकृत अधिकारी द्वारा जारी होना चाहिए, जिसमें कर्मचारी का पद और ट्रांसफरेबल जॉब का स्पष्ट उल्लेख हो। इसके साथ कंपनी के चार राज्यों में उपस्थिति का प्रमाण, उन राज्यों के वैध जीएसटी पंजीकरण दस्तावेज, कंपनी द्वारा जारी वैध पहचान पत्र, हालिया सैलरी स्लिप और वर्तमान में कार्यरत होने का प्रमाण देना होता है।
सरकारी कर्मचारियों, बैंक, पीएसयू या रक्षा क्षेत्र के कर्मियों के लिए संबंधित विभाग द्वारा जारी आधिकारिक पहचान पत्र और सेवा प्रमाणपत्र जरूरी है। इसके अलावा वाहन डीलर द्वारा जारी सेल सर्टिफिकेट (फॉर्म-21), रोडवर्थीनेस सर्टिफिकेट (फॉर्म-22), वैध वाहन बीमा और आधार कार्ड व निवास प्रमाणपत्र भी जरूरी दस्तावेजों में शामिल हैं।