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योगी जी! ‘जहन्नुम’ से कम नहीं निगम का नंदी पार्क
अमर उजाला ब्यूरो/ गाजियाबाद
Updated Thu, 06 Apr 2017 11:45 PM IST
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नंदी पार्क
- फोटो : अमर उजाला
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प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भले ही गोवंशों के लिए गोशालाएं खोलकर उनकी सेवा करने की मंशा रखते हों, लेकिन गाजियाबाद में नगर निगम का नंदी पार्क गोवंशों के लिए ‘जहन्नुम’ से कम नहीं है।
जिन नंदियों को हिंदू धर्म में पूजा जाता है, उन्हीं नंदियों को सड़कों से हटाकर नंदी पार्क में कैद कर दिया गया है। यही नहीं इन नंदियों को यहां न तो पेट भर चारा मिलता और न ही कोई चिकित्सीय सुविधा।
नगर निगम में भी बीते 20 साल से भाजपा काबिज है। ऐसे में भाजपा का गौ-सेवा और गौ प्रेम की हकीकत को जानने के लिए बृहस्पतिवार को अमर उजाला ने नंदी पार्क का हाल देखा।
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इलाज न मिलने से दम तोड़ रहे नंदी
नंदी पार्क में करीब 400 गोवंश हैं। बावजूद इसके यहां पशु डॉक्टर की तैनाती नहीं है। बीमार सांड़ और बछड़े तड़प-तड़प कर दम तोड़ देते हैं। यहां तैनात कर्मचारियों की मानें तो हर सप्ताह यहां एक-दो सांड़ की मौत हो जाती है।
इनकी मौत की संख्या सर्दियों में ज्यादा रहती है। शिकायतों पर बीमार सांड़ को नंदी पार्क में पहुंचा तो दिया जाता है लेकिन यहां इलाज नहीं मिलता। बृहस्पतिवार को भी इलाज न मिलने पर एक साड़ की मौत हो गई, जिसे बुधवार को ही यहां लाया गया था। नाले में गिरकर घायल हुए एक सांड को भी यहां लाकर मरने के लिए छोड़ दिया गया है।
बछड़ों पर हमला कर देते हैं जंगली कुत्ते
नंदी पार्क की बाउंड्रीवाल जगह-जगह से टूटी हुई है। वहां तैनात कर्मचारियों की मानें तो अक्सर रात के वक्त हिंडन नदी की ओर से जंगली कुत्ते दीवार फांदकर नंदी पार्क में घुस आते हैं और घायल सांड़ या छोटे बछड़ों पर हमला बोल देते हैं। उनके हमले की वजह से भी कई सांड़ दम तोड़ चुके हैं।
नहीं मिलता हरा चारा
नंदियों के लिए नगर निगम पहले हरे चारे का इंतजाम भी करता था। इसके लिए चारा काटने की मशीन भी लगाई गई थी, लेकिन अब निगम ने चारे के बजट में कटौती कर दी है। अब दान देने वाले लोग कभी-कभी इन नंदियों के लिए हरा चारा भेज देते हैं, वरना इनका जीवन भूसे पर टिका है।
बदहाली की कहानी कह रहा नंदी पार्क
निगम के नंदी पार्क में पहले रहट बनाया गया था। नंदियों के रहट चलाने से पानी आता था। सांड़ों को ब्रीडिंग के लिए इस्तेमाल किया जाता था। इनके गोबर से कंपोस्ट खाद तैयार कर बाजार में बेची जाती थी।
इससे नंदी पार्क का खर्च निकल आता था और इनके लिए चारे की दिक्कत नहीं होती थी। अब नंदी पार्क में बदहाली ही बदहाली है। बरसात में घुटनों तक कीचड़ हो जाता है। धूप से बचने के लिए पर्याप्त टीन शेड नहीं है।
यह भी हैं कमियां
बाउंड्रीवाल टूटी होने से कूदकर भाग जाते हैं सांड़
छोटे बछड़ों के लिए अलग बाड़ा नहीं बनाया
खड़ंजा टूट जाने से सफाई गाड़ियां नहीं पहुंच पाती अंदर
खूंखार सांड़ों के हमले से घायल बछड़ों को नहीं मिलता इलाज
धूप से बचने के लिए नहीं पर्याप्त इंतजाम
नंदी पार्क में दौरा कर करीब एक महीने पहले महापौर और नगरायुक्त को रिपोर्ट दी थी। कमियों को दूर कराने की मांग की थी, लेकिन अभी तक समस्याओं पर कार्रवाई नहीं हुई। शुक्रवार को फिर मेयर व नगरायुक्त से मिलकर नंदी पार्क की कमियों पर वार्ता करूंगा। - मुकेश त्यागी, अध्यक्ष, नंदी पार्क समिति
नंदी पार्क की व्यवस्था सुधारने के लिए प्लानिंग की जा रही है। एक-दो दिन में अफसरों के साथ निरीक्षण कर वहां कि कमियों की सूची तैयार कराई जाएगी और इन पर काम शुरू किया जाएगा। पूर्व में भी नंदियों के लिए वहां टीनशेड बनवाया गया था।
- अशु वर्मा, महापौर
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जिन नंदियों को हिंदू धर्म में पूजा जाता है, उन्हीं नंदियों को सड़कों से हटाकर नंदी पार्क में कैद कर दिया गया है। यही नहीं इन नंदियों को यहां न तो पेट भर चारा मिलता और न ही कोई चिकित्सीय सुविधा।
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नगर निगम में भी बीते 20 साल से भाजपा काबिज है। ऐसे में भाजपा का गौ-सेवा और गौ प्रेम की हकीकत को जानने के लिए बृहस्पतिवार को अमर उजाला ने नंदी पार्क का हाल देखा।
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इलाज न मिलने से दम तोड़ रहे नंदी
नंदी पार्क में करीब 400 गोवंश हैं। बावजूद इसके यहां पशु डॉक्टर की तैनाती नहीं है। बीमार सांड़ और बछड़े तड़प-तड़प कर दम तोड़ देते हैं। यहां तैनात कर्मचारियों की मानें तो हर सप्ताह यहां एक-दो सांड़ की मौत हो जाती है।
इनकी मौत की संख्या सर्दियों में ज्यादा रहती है। शिकायतों पर बीमार सांड़ को नंदी पार्क में पहुंचा तो दिया जाता है लेकिन यहां इलाज नहीं मिलता। बृहस्पतिवार को भी इलाज न मिलने पर एक साड़ की मौत हो गई, जिसे बुधवार को ही यहां लाया गया था। नाले में गिरकर घायल हुए एक सांड को भी यहां लाकर मरने के लिए छोड़ दिया गया है।
बछड़ों पर हमला कर देते हैं जंगली कुत्ते
नंदी पार्क की बाउंड्रीवाल जगह-जगह से टूटी हुई है। वहां तैनात कर्मचारियों की मानें तो अक्सर रात के वक्त हिंडन नदी की ओर से जंगली कुत्ते दीवार फांदकर नंदी पार्क में घुस आते हैं और घायल सांड़ या छोटे बछड़ों पर हमला बोल देते हैं। उनके हमले की वजह से भी कई सांड़ दम तोड़ चुके हैं।
नहीं मिलता हरा चारा
नंदियों के लिए नगर निगम पहले हरे चारे का इंतजाम भी करता था। इसके लिए चारा काटने की मशीन भी लगाई गई थी, लेकिन अब निगम ने चारे के बजट में कटौती कर दी है। अब दान देने वाले लोग कभी-कभी इन नंदियों के लिए हरा चारा भेज देते हैं, वरना इनका जीवन भूसे पर टिका है।
बदहाली की कहानी कह रहा नंदी पार्क
निगम के नंदी पार्क में पहले रहट बनाया गया था। नंदियों के रहट चलाने से पानी आता था। सांड़ों को ब्रीडिंग के लिए इस्तेमाल किया जाता था। इनके गोबर से कंपोस्ट खाद तैयार कर बाजार में बेची जाती थी।
इससे नंदी पार्क का खर्च निकल आता था और इनके लिए चारे की दिक्कत नहीं होती थी। अब नंदी पार्क में बदहाली ही बदहाली है। बरसात में घुटनों तक कीचड़ हो जाता है। धूप से बचने के लिए पर्याप्त टीन शेड नहीं है।
यह भी हैं कमियां
बाउंड्रीवाल टूटी होने से कूदकर भाग जाते हैं सांड़
छोटे बछड़ों के लिए अलग बाड़ा नहीं बनाया
खड़ंजा टूट जाने से सफाई गाड़ियां नहीं पहुंच पाती अंदर
खूंखार सांड़ों के हमले से घायल बछड़ों को नहीं मिलता इलाज
धूप से बचने के लिए नहीं पर्याप्त इंतजाम
नंदी पार्क में दौरा कर करीब एक महीने पहले महापौर और नगरायुक्त को रिपोर्ट दी थी। कमियों को दूर कराने की मांग की थी, लेकिन अभी तक समस्याओं पर कार्रवाई नहीं हुई। शुक्रवार को फिर मेयर व नगरायुक्त से मिलकर नंदी पार्क की कमियों पर वार्ता करूंगा। - मुकेश त्यागी, अध्यक्ष, नंदी पार्क समिति
नंदी पार्क की व्यवस्था सुधारने के लिए प्लानिंग की जा रही है। एक-दो दिन में अफसरों के साथ निरीक्षण कर वहां कि कमियों की सूची तैयार कराई जाएगी और इन पर काम शुरू किया जाएगा। पूर्व में भी नंदियों के लिए वहां टीनशेड बनवाया गया था।
- अशु वर्मा, महापौर