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Shekhar Joshi: साहित्यकार शेखर जोशी का गाजियाबाद में निधन, कहानियों का कई भाषाओं में हो चुका है अनुवाद
Tue, 04 Oct 2022 04:52 PM IST
अनुराग सक्सेना
अमर उजाला ब्यूरो, गाजियाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, गाजियाबाद
Published by: अनुराग सक्सेना
Updated Tue, 04 Oct 2022 04:52 PM IST
सार
शेखर जोशी के छोटे बेटे संजय जोशी ने बताया कि शेखर जोशी पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे। वह आंतों में संक्रमण से ग्रसित थे। पिछले नौ दिन से आईसीयू में भर्ती थे। उन्होंने अस्पताल में दोपहर 3.20 बजे अंतिम सांस ली।
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साहित्यकार शेखर जोशी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सहित्यकार शेखर जोशी(90 वर्ष) का मंगलवार दोपहर को निधन हो गया। उन्होंने वैशाली सेक्टर-4 स्थित पारस अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनकी पार्थिव देह को अस्पताल से घर लाए जाने तैयारी की जा रही थी।
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उनके छोटे बेटे संजय जोशी ने बताया कि शेखर जोशी पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे। वह आंतों में संक्रमण से ग्रसित थे। पिछले नौ दिन से आईसीयू में भर्ती थे। उन्होंने अस्पताल में दोपहर 3.20 बजे अंतिम सांस ली। उनके परिवार में बड़े बेटे प्रतुल जोशी, संजय जोशी व बेटी कृष्णा जोशी हैं।
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आखिरी सांस तक रचनाधर्म में लगे रहे जोशी, उनकी कहानियों में झलका मजदूरों का संघर्ष
प्रख्यात कथाकार शेखर जोशी ने फैक्टरियों, कामगार और मध्यम निम्न वर्ग का संघर्ष तथा उनके अंतर्विरोध को अपने लेखन में खास स्थान दिया। उनकी कथा यात्रा में शुरुआत से लेकर अंत तक श्रमिक जीवन के प्रसंग बार-बार दिखाई देते हैं। वसुंधरा सेक्टर सात स्थित जनसत्ता अपार्टमेंट में अपने छोटे बेटे व संस्कृतिकर्मी/ फिल्मकार संजय जोशी, पुत्रवधू और पोती के साथ रहते थे। संजय जोशी ने बताया कि उनका पार्थिव शरीर बुधवार को शारदा यूनिवर्सिटी को दे दिया जाएगा।
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अस्पताल में रहने के दौरान उन्होंने अपनी आखिरी संग्रह की डमी भी देखी और बेटे संजय को इसमें सुधार के कुछ सुझाव भी दिए। बेटे प्रतुल ने बताया कि उनकी कथा समग्र संग्रह शीघ्र प्रकाशित होगी। इसके बाद फकीरों का शहर किताब आएगी। आखिरी समय तक वह रचनाधर्म में लगे रहे।
लेखन सामाजिक जिम्मेदारी से बंधा कर्म
नौ जुलाई, 2022 को शब्द सम्मान के एलान की घोषणा के मौके पर उन्होंने कहा था, एक लेखक को यह पता होना चाहिए कि वह क्या लिख रहा है, क्योंकि लेखन सामाजिक जिम्मेदारी से बंधा हुआ कर्म है।
कई भाषाओं में हुआ उनकी कहानियों का अनुवाद
शेखर जोशी कथा लेखन को दायित्वपूर्ण कर्म मानने वाले सुपरिचित कथाकार थे। शेखर जोशी की कहानियों का अंगरेजी, चेक, पोलिश, रुसी और जापानी भाषाओं में अनुवाद हुआ है। उनकी कहानी दाज्यू पर बाल-फिल्म सोसायटी द्वारा फिल्म का निर्माण किया गया है।
नौकरी छोड़ बन गए "कोशी के घटवार"
शेखर जोशी का जन्म 10 सितम्बर 1932 को अल्मोड़ा जनपद के सोमेश्वर ओलिया गांव के एक निर्धन परिवार में हुआ था। शेखर जोशी ने अपनी प्राथमिक शिक्षा अजमेर और देहरादून से प्राप्त की थी। 12वीं कक्षा की पढ़ाई के दौरान ही उनका चयन ईएमई सुरक्षा विभाग में हो गया। वह 1986 तक विभाग में कार्यरत रहे। उन्होंने नौकरी से स्वैछिक रूप से त्याग पत्र दे दिया।
फिर वह लेखन से जुड़ गए और काफी लेखन किया लेकिन उनको प्रसिद्धि कोशी के घटवार से मिली। उनकी एक और कहानी दाज्यू पर एक बाल फिल्म भी बनी है। आलोचक लेखक रविंद्र त्रिपाठी ने बताया कि शेखर जोशी बताते थे कि उनके जीवन का एक भाग कारखानों में ही बीता था। वहां पर तेल, मिट्टी, कालिख से सने कपड़ों में शानदार किरदार छिपे थे। उन किरदारों ने जिंदगी को एक नया अर्थ दे दिया।