{"_id":"581e328d4f1c1b8617435f6b","slug":"failing-to-recognize-the-historical-backward-smart-city-ghaziabad","type":"story","status":"publish","title_hn":"एतिहासिक पहचान न होने से स्मार्ट सिटी में पिछड़ा गाजियाबाद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एतिहासिक पहचान न होने से स्मार्ट सिटी में पिछड़ा गाजियाबाद
ब्यूरो/ अमर उजाला गाजियाबाद
Updated Sun, 06 Nov 2016 01:15 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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एतिहासिक पृष्ठ भूमि न होने की वजह से गाजियाबाद स्मार्ट सिटी की दौड़ से बाहर हुआ। इसके अलावा सिटी डेवलपमेंट प्लान न होना भी स्मार्ट शहरों की सूची से बाहर होने की बड़ी वजह रही। शनिवार को महापौर ने कंसलटेंट फर्म को बुलाकर स्मार्ट सिटी की प्रतिस्पर्धा में पिछड़ने के कारणों की समीक्षा की तो इसके कई कारण सामने आए।
केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने सूची से बाहर हुए शहरों को कारणों की जानकारी नहीं दी है, लेकिन अब अगले चरण में फिर से दावेदारी करने से पहले गाजियाबाद नगर निगम ने इसके कारणों को जानने का प्रयास किया।
केंद्र सरकार ने सिर्फ शहरों को मिले अंकों की सूची जारी की है, लेकिन यह नहीं बताया कि उनके अंक कटे क्यों। गाजियाबाद की कंसलटेंट फर्म के एक्सपर्ट्स ने शनिवार को समीक्षा बैठक में बताया कि हाल ही में 63 शहरों के बीच हुई प्रतिस्पर्धा में चुने गए 27 शहरों में अमूमन हर शहर की एतिहासिक बैक ग्राउंड रही है।
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चाहे वह वाराणसी हो या उज्जैन, आगरा, अमृतसर, तिरुपति, ग्वालियर, अजमेर हो। मार्किंग में गाजियाबाद से ऊपर रहे झांसी और अलीगढ़ की भी एतिहासिक पहचान है। जबकि गाजियाबाद की कोई ऐसी पहचान नहीं है।
कंसलटेंट फर्म के एक्सपर्ट ने महापौर अशु वर्मा को बताया कि चयनित हुए अधिकांश शहरों में सिटी डेवलपमेंट प्लान लागू है, लेकिन गाजियाबाद का कोई ऐसा प्लान ही नहीं है। पब्लिक एंगेजमेंट में भी गाजियाबाद की ओर से देरी हुई।
महापौर का कहना है कि यह गाजियाबाद के प्रतिस्पर्धा में पिछड़ने के संभावित कारण माने जा रहे हैं, लेकिन कंसलटेंट फर्म को कहा गया है कि वह तीसरे चरण के शुरू होने से पहले पिछड़ने के सटीक कारणों की जानकारी दें, ताकि अगले चरण में इन गलतियों को सुधारा जा सके। स्मार्ट सिटी का तीसरा चरण एक जनवरी से 31 मार्च तक चलेगा।
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केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने सूची से बाहर हुए शहरों को कारणों की जानकारी नहीं दी है, लेकिन अब अगले चरण में फिर से दावेदारी करने से पहले गाजियाबाद नगर निगम ने इसके कारणों को जानने का प्रयास किया।
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केंद्र सरकार ने सिर्फ शहरों को मिले अंकों की सूची जारी की है, लेकिन यह नहीं बताया कि उनके अंक कटे क्यों। गाजियाबाद की कंसलटेंट फर्म के एक्सपर्ट्स ने शनिवार को समीक्षा बैठक में बताया कि हाल ही में 63 शहरों के बीच हुई प्रतिस्पर्धा में चुने गए 27 शहरों में अमूमन हर शहर की एतिहासिक बैक ग्राउंड रही है।
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चाहे वह वाराणसी हो या उज्जैन, आगरा, अमृतसर, तिरुपति, ग्वालियर, अजमेर हो। मार्किंग में गाजियाबाद से ऊपर रहे झांसी और अलीगढ़ की भी एतिहासिक पहचान है। जबकि गाजियाबाद की कोई ऐसी पहचान नहीं है।
कंसलटेंट फर्म के एक्सपर्ट ने महापौर अशु वर्मा को बताया कि चयनित हुए अधिकांश शहरों में सिटी डेवलपमेंट प्लान लागू है, लेकिन गाजियाबाद का कोई ऐसा प्लान ही नहीं है। पब्लिक एंगेजमेंट में भी गाजियाबाद की ओर से देरी हुई।
महापौर का कहना है कि यह गाजियाबाद के प्रतिस्पर्धा में पिछड़ने के संभावित कारण माने जा रहे हैं, लेकिन कंसलटेंट फर्म को कहा गया है कि वह तीसरे चरण के शुरू होने से पहले पिछड़ने के सटीक कारणों की जानकारी दें, ताकि अगले चरण में इन गलतियों को सुधारा जा सके। स्मार्ट सिटी का तीसरा चरण एक जनवरी से 31 मार्च तक चलेगा।