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केमिकल ने पानी की दो सतहों में घोला ‘जहर’
अमर उजाला, ब्यूरो /गाजियाबाद
Updated Sun, 11 Sep 2016 12:27 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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कभी जिन गांवों के लोगों के लिए हिंडन नदी जीवनदायिनी थी, सरकारी स्तर पर हो रही बेरुखी से अब वही नदी लोगों के लिए बीमारी की वजह बन रही है। हिंडन को साफ करने के नाम पर सरकारी अफसर सिर्फ मीटिंग-मीटिंग खेल रहे हैं और हिंडन का पानी आसपास बसे गांवों में ‘कहर’ बरपा रहा है।
पहले जहां सिर्फ ग्राउंड वाटर की पहली सतह में हिंडन के केमिकल का असर पहुंच रहा था, वहीं अब दूसरी सतह के पानी में भी ‘जहर’ घुल गया है। हाल ही में जल निगम ने भोजपुर के नाहली गांव समेत हिंडन नदी के आसपास के 14 गांवों में भूजल की गुणवत्ता परखी तो हकीकत सामने आई।
14 गांवों के 825 हैंडपंप के पानी की जांच में 115 हैंडपंप का पानी फेल पाया गया। इन हैंडपंप के पानी में न सिर्फ टीडीएस मानक से ज्यादा मिला बल्कि आयरन और फ्लोराइड जैसे खतरनाक केमिकल भी पाए गए। जल निगम के मुताबिक इन हैंडपंप का पानी अब पीने लायक नहीं रहा।
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खास बात यह है कि जांच रिपोर्ट आने से पहले ग्रामीण इसी ‘जहरीले’ पानी का इस्तेमाल कर रहे थे। यह जहरीला पानी लोगों के शरीर में बीमारियां पैदा कर सकता है। जल निगम के अधिकारियों की मानें तो पूर्व में भूजल की पहली सतह खराब थी।
करीब 160 फीट गहरी दूसरी सतह सरकारी हैंडपंप लगाकर गांवों में पानी की आपूर्ति की जा रही थी। अब इस दूसरी सतह में भी आयरन, फ्लोराइड, आर्सेनिक, क्रोमियम जैसे हैवी मेटल्स पहुंच गए हैं।
मूकदर्शक बना पीसीबी
ग्राउंड वाटर को सबसे ज्यादा नुकसान उद्योग पहुंचा रहे हैं। 2010 में लोहिया नगर क्षेत्र के ग्राउंड वाटर में आर्सेनिक , क्रोमियम जैसे खतरनाक तत्व मिले थे। उद्योगों की वजह से ही यहां का ग्राउंड वाटर खराब हुआ है। इस पूरे क्षेत्र का पानी खराब हो गया और उसका रंग बदल गया, बावजूद प्रदूषण नियंत्रण विभाग के अधिकारी मौन रहे।
‘अमर उजाला’ ने इस पर अभियान चलाया तो प्रदूषण फैलाने वाले कई उद्योगों को सीलिंग की कार्रवाई हुई और यहां पानी शोधन के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर प्लांट लगाया गया।
हिंडन नदी किनारे के इन गांवों पर संकट
जल निगम ने हिंडन नदी किनारे बसे 14 गांवों नगला-अटौर, मकरेड़ा, भनेड़ा खुर्द, राजपुर सरीफाबाद, सिरोरा, महमूदपुर, विहंग, मटौर, भदौली, नेकपुर-साबित नगर, सुराना, असालतपुर-फर्रुखनगर, सुठारी और भोजपुर के नाहली गांव के 825 हैंडपंप से सैंपल लेकर जांच कराई।
इनमें 115 हैंडपंप का पानी पीने लायक नहीं मिला। अब जल निगम ने खराब पानी वाले हैंडपंप को सील कर दिया है।
वसुंधरा-वैशाली में भी खराब हो सकता है हैंडपंप का पानी
हिंडन से सटे ग्रामीण क्षेत्रों में जल निगम हैंडपंप के पानी की जांच करा चुका है, लेकिन शहरी क्षेत्र में यह जिम्मेदारी नगर निगम की है। बावजूद इसके नगर निगम ने कभी भी हैंडपंप के पानी की जांच नहीं कराई। हिंडन नदी किनारे बसे वसुंधरा-वैशाली, इंदिरापुरम क्षेत्र के हैंडपंप से पानी लेकर जांच कराई जाए तो यहां के पानी में भी हैवी मेटल्स मिल सकते हैं।
हिंडन साफ करने के लिए प्रदेश सरकार ने योजना बनाकर मंडलायुक्त की अध्यक्षता में कमेटी बनाई गई है। चार-पांच महीने में भी जमीनी स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। अफसरों की उदासीनता और खानापूर्ति को देख मीटिंग में जाना बंद कर दिया।- विक्रांत शर्मा, संयोजक, हिंडन जल बिरादरी
उद्योगों के केमिकल युक्त पानी को नदी में आने से रोकने में किसी फंड की आवश्यकता नहीं है। अधिकारियों में अगर इच्छा शक्ति हो तो इस पर तत्काल कार्रवाई हो सकती है। अफसरों की लापरवाही की वजह से भूजल प्रदूषित हो रहा है। - आकाश वशिष्ठ, संयोजक, सोसायटी फॉर प्रोटेक्शन इंवायरमेंट एंड बायोडायवर्सिटी
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को प्रदूषण करने वाले उद्योगों पर कड़ी निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। जल निगम ने हाल ही में कई गांवों से पानी के सैंपल लेकर जांच कराई है। हिंडन में बिना शोधित डाले जा रहे पानी पर रोक लगाई जाएगी। प्रदेश सरकार इसके लिए गंभीर है और एक योजना भी बनाई है। इस पर काम किया जा रहा है। - निधि केसरवानी, डीएम
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पहले जहां सिर्फ ग्राउंड वाटर की पहली सतह में हिंडन के केमिकल का असर पहुंच रहा था, वहीं अब दूसरी सतह के पानी में भी ‘जहर’ घुल गया है। हाल ही में जल निगम ने भोजपुर के नाहली गांव समेत हिंडन नदी के आसपास के 14 गांवों में भूजल की गुणवत्ता परखी तो हकीकत सामने आई।
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14 गांवों के 825 हैंडपंप के पानी की जांच में 115 हैंडपंप का पानी फेल पाया गया। इन हैंडपंप के पानी में न सिर्फ टीडीएस मानक से ज्यादा मिला बल्कि आयरन और फ्लोराइड जैसे खतरनाक केमिकल भी पाए गए। जल निगम के मुताबिक इन हैंडपंप का पानी अब पीने लायक नहीं रहा।
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खास बात यह है कि जांच रिपोर्ट आने से पहले ग्रामीण इसी ‘जहरीले’ पानी का इस्तेमाल कर रहे थे। यह जहरीला पानी लोगों के शरीर में बीमारियां पैदा कर सकता है। जल निगम के अधिकारियों की मानें तो पूर्व में भूजल की पहली सतह खराब थी।
करीब 160 फीट गहरी दूसरी सतह सरकारी हैंडपंप लगाकर गांवों में पानी की आपूर्ति की जा रही थी। अब इस दूसरी सतह में भी आयरन, फ्लोराइड, आर्सेनिक, क्रोमियम जैसे हैवी मेटल्स पहुंच गए हैं।
मूकदर्शक बना पीसीबी
ग्राउंड वाटर को सबसे ज्यादा नुकसान उद्योग पहुंचा रहे हैं। 2010 में लोहिया नगर क्षेत्र के ग्राउंड वाटर में आर्सेनिक , क्रोमियम जैसे खतरनाक तत्व मिले थे। उद्योगों की वजह से ही यहां का ग्राउंड वाटर खराब हुआ है। इस पूरे क्षेत्र का पानी खराब हो गया और उसका रंग बदल गया, बावजूद प्रदूषण नियंत्रण विभाग के अधिकारी मौन रहे।
‘अमर उजाला’ ने इस पर अभियान चलाया तो प्रदूषण फैलाने वाले कई उद्योगों को सीलिंग की कार्रवाई हुई और यहां पानी शोधन के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर प्लांट लगाया गया।
हिंडन नदी किनारे के इन गांवों पर संकट
जल निगम ने हिंडन नदी किनारे बसे 14 गांवों नगला-अटौर, मकरेड़ा, भनेड़ा खुर्द, राजपुर सरीफाबाद, सिरोरा, महमूदपुर, विहंग, मटौर, भदौली, नेकपुर-साबित नगर, सुराना, असालतपुर-फर्रुखनगर, सुठारी और भोजपुर के नाहली गांव के 825 हैंडपंप से सैंपल लेकर जांच कराई।
इनमें 115 हैंडपंप का पानी पीने लायक नहीं मिला। अब जल निगम ने खराब पानी वाले हैंडपंप को सील कर दिया है।
वसुंधरा-वैशाली में भी खराब हो सकता है हैंडपंप का पानी
हिंडन से सटे ग्रामीण क्षेत्रों में जल निगम हैंडपंप के पानी की जांच करा चुका है, लेकिन शहरी क्षेत्र में यह जिम्मेदारी नगर निगम की है। बावजूद इसके नगर निगम ने कभी भी हैंडपंप के पानी की जांच नहीं कराई। हिंडन नदी किनारे बसे वसुंधरा-वैशाली, इंदिरापुरम क्षेत्र के हैंडपंप से पानी लेकर जांच कराई जाए तो यहां के पानी में भी हैवी मेटल्स मिल सकते हैं।
हिंडन साफ करने के लिए प्रदेश सरकार ने योजना बनाकर मंडलायुक्त की अध्यक्षता में कमेटी बनाई गई है। चार-पांच महीने में भी जमीनी स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। अफसरों की उदासीनता और खानापूर्ति को देख मीटिंग में जाना बंद कर दिया।- विक्रांत शर्मा, संयोजक, हिंडन जल बिरादरी
उद्योगों के केमिकल युक्त पानी को नदी में आने से रोकने में किसी फंड की आवश्यकता नहीं है। अधिकारियों में अगर इच्छा शक्ति हो तो इस पर तत्काल कार्रवाई हो सकती है। अफसरों की लापरवाही की वजह से भूजल प्रदूषित हो रहा है। - आकाश वशिष्ठ, संयोजक, सोसायटी फॉर प्रोटेक्शन इंवायरमेंट एंड बायोडायवर्सिटी
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को प्रदूषण करने वाले उद्योगों पर कड़ी निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। जल निगम ने हाल ही में कई गांवों से पानी के सैंपल लेकर जांच कराई है। हिंडन में बिना शोधित डाले जा रहे पानी पर रोक लगाई जाएगी। प्रदेश सरकार इसके लिए गंभीर है और एक योजना भी बनाई है। इस पर काम किया जा रहा है। - निधि केसरवानी, डीएम