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मैनेज नहीं होंगे टेंडर, जीडीए में अब ई-टेंडरिंग
ब्यूरो , अमर उजाला गाजियाबाद
Updated Sun, 16 Apr 2017 12:39 AM IST
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जीडीए
- फोटो : अमर उजाला
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अब जीडीए के टेंडर मैनेज नहीं हो सकेंगे। जीडीए में भी ई-टेंडरिंग प्रणाली लागू हो गई है। नई व्यवस्था के तहत अब 40 लाख से ज्यादा रकम के टेंडर सिर्फ ऑनलाइन ही जारी किए जाएंगे। जीडीए बोर्ड से इस प्रस्ताव को पहले ही मंजूरी मिल चुकी थी, अब इसे अमली जामा पहनाया गया है।
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हाल ही में जीडीए ने दो बड़े कार्यों के लिए इसी प्रणाली से टेंडर जारी किए हैं।बीते साल नोएडा अथॉरिटी के चीफ इंजीनियर यादव सिंह चहेतों को ठेके देने के मामले में जांच के घेरे में आ चुके हैं। जीडीए में भी निर्माण कार्यों समेत समेत अन्य विभागों में टेंडर की प्रक्रिया विवादों में रही हैं।
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गाजियाबाद के टेंडर लखनऊ से मैनेज होने के आरोप पहले से ही लगते रहे हैं। ऐसे में जीडीए ने बीते दिसंबर महीने में ही ई-टेंडरिंग प्रणाली लागू करने की तैयारी कर ली थी। 22 दिसंबर 2016 को हुई जीडीए की बोर्ड बैठक में ई-टेंडरिंग प्रणाली लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी मिल चुकी है।
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हालांकि इसे तत्काल लागू न करके एक अप्रैल से लागू करने का निर्णय लिया गया था। अब जीडीए ने ई-टेंडरिंग प्रणाली लागू कर दी है।
नई प्रणाली पर जारी हुए दो टेंडर
इंदिरापुरम में वाटर सप्लाई स्कीम के लिए ऑनलाइन टेंडर
सीवर मेंटेनेंस के लिए भी ई-टेंडरिंग प्रणाली हुई इस्तेमाल
एक अप्रैल से ई-टेंडरिंग प्रणाली लागू कर दी गई है। अब 40 लाख से ज्यादा के टेंडर मैनुअल नहीं जारी किए जाएंगे। इससे प्राधिकरण में और पारदर्शिता आएगी। - रवींद्र गोडबोले, प्रभारी वीसी, जीडीए
सीएजी की टीम ने उद्यान विभाग से मांगी पत्रावलियां
सीएजी की ऑडिट के दायरे में अब जीडीए के उद्यान और पार्कों में लगे पौधे और घास भी आ गए हैं। ऑडिट टीम ने उद्यान विभाग से पत्रावलियां मांगीं हैं। अब तक करीब एक हजार पत्रावलियां कैग की टीम ऑडिट के लिए मंगा चुकी है। जीडीए ने बीते पांच वर्षों में सिटी फॉरेस्ट से लेकर कई बड़े पार्क डेवलप किए हैं।
इंदिरापुरम में बड़ा पार्क विकसित कर उसमें कृत्रिम झील बनाई हैं। करोड़ों का बजट इन उद्यानों पर खर्च किया गया है। उद्यान विभाग ने 6 स्थानों पर करीब एक करोड़ रुपये खर्च कर ओपन जिम भी तैयार किए हैं। सीएजी ऑडिट में जीडीए के यह उद्यान, पार्क भी निशाने पर है।
ऑडिट टीम ने उद्यान विभाग से भी करीब 50 से ज्यादा फाइलें मंगा ली हैं। जीडीए सूत्रों की मानें तो इंजीनियरिंग, उद्यान, अकाउंट, भू-अर्जन विभाग समेत कई विभागों से अब तक एक हजार से ज्यादा फाइलें अपने अंडर में ले लीं हैं।
पूर्व में कैग की लगी आपत्तियों का जवाब तैयार कर रहे जीडीए अफसर
सीएजी की टीम 2016 में जीडीए में ऑडिट कर चुकी है। करीब 60 फीसदी ऑडिट का काम पूरा हो चुका था। सीएजी टीम ने 100 से ज्यादा पत्रावलियों पर आपत्तियां भी लगाईं थीं। इनके निस्तारण से पहले ही जीडीए में कैग ऑडिट बंद कर दिया गया था। ऐसे में यह आपत्तियां अभी तक अनिस्तारित हैं।
अब नए सिरे से ऑडिट शुरू होने के बाद जीडीए ने पूर्व में लगी उन आपत्तियों का जवाब तैयार कराना शुरू कर दिया है जो कैग टीम ने 2016 में लगाई थी। हालांकि कैग की टीम अब फिर से उन फाइलों का ऑडिट करने की तैयारी में हैं और अभी तक जीडीए से उन आपत्तियों का जवाब मांगा भी नहीं गया है।
बावजूद इसके जीडीए अधिकारी अपने स्तर से पहले ही जवाब तैयार करा रहे हैं। कैग टीम के जवाब मांगते ही अधिकारी उन्हें उपलब्ध करा देंगे।