फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi NCR ›   Ghaziabad News ›   School Director Erasing Sukut, police sluggish

प्रियांशी आत्महत्या प्रकरण: स्कूल संचालक मिटा रहा सुबूत, पुलिस सुस्त

Mon, 01 Aug 2016 01:14 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो /गाजियाबाद
अमर उजाला ब्यूरो /गाजियाबाद Updated Mon, 01 Aug 2016 01:14 AM IST
विज्ञापन
School Director Erasing Sukut, police sluggish
अपराध - फोटो : अमर उजाला

घूकना में फीस के तानों और पिता के अपमान से आहत होकर जान देने वाली प्रियांशी की मौत ने शहर को झकझोर दिया है। पुलिस अभी भी दो फरार टीचर्स को गिरफ्तार नहीं कर सकी है। पुलिस की लापरवाही का फायदा उठाकर स्कूल संचालक सुबूत मिटाने में जुटा है।

विज्ञापन


रातों रात स्कूल से 12वीं तक का बोर्ड उतारकर 8वीं तक का बोर्ड लगा दिया गया है। स्कूल की दीवारों पर भी पेंट करके अब स्कूल के 8वीं तक की मान्यता की बात लिख दी गई है। जबकि पहले 12वीं तक के बोर्ड लगे थे।
विज्ञापन


स्थानीय लोगों की मानें तो रात के समय स्कूल संचालक आते हैं और कुछ फाइलें उठा कर ले जाते हैं। यहां तक कि स्कूल का बोर्ड भी वह उतार ले गए। आसपास की दीवारों पर जहां स्कूल के नाम का पेंट किया गया था। इसे भी बदला गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


स्कूल से कुछ दूर हटकर ही मकानों की दीवार पर पूर्व में स्कूल के विज्ञापन में 12वीं कक्षा तक की मान्यता का जिक्र था, अब इसे भी बदल दिया गया है। रविवार सुबह जब लोग उठे तो दीवार पर 12वीं की जगह 8वीं तक मान्यता प्राप्त लिखा हुआ था।

उधर इस घटना के बाद से अब स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के परिजनों ने स्कूल संचालकों की पोल खोलनी शुरू कर दी है। लोगों का कहना है कि पूर्व में भी स्कूल में फीस या फिर होम वर्क न करने पर बच्चों की बेदर्दी से पिटाई की जाती थी।


स्कूल प्रिंसिपल शशि की पिटाई का शिकार हो चुके रविकांत ने बताया कि करीब आठ वर्ष पूर्व होम वर्क न करने पर प्रिंसिपल ने उसे इस कदर पीटा था कि उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

इस घटना के बाद उसके परिजनों ने स्कूल से नाम कटवा दिया था। स्थानीय लोगों ने रविकांत की बात पर हामी भरते हुए कहा कि तब मामले को स्कूल संचालकों ने दबा दिया था, मगर इस बार तो अति ही हो गई है।

किसी ने लगाया मारपीट का आरोप, तो कहीं छात्रवृत्ति न मिलने की बात
एक दिन भी फीस लेट हो जाने पर बच्ची को घर भेज दिया जाता है। ऐसे में वे हमेशा समय से ही फीस जमा करते हैं। -राकेश कुमार, अभिभावक

मेरे दो बच्चे स्कूल में पढ़ते हैं, कई बार ऐसा हुआ जब फीस जमा न करने पर बच्चों को घर भेज दिया गया। कई बार स्कूल जाकर मिन्नतें भी की लेकिन फीस जमा न होने पर हर रोज बच्चों को वापस भेज दिया जाता था। -  कल्पना


स्कूल मान्यता प्राप्त है और बच्चों की छात्रवृत्ति भी आती है। आज तक कभी उसके किसी भी बच्चे को छात्रवृत्ति का पैसा नहीं दिया गया। छात्रवृत्ति का पैसा भी स्कूल वाले खुद ही रख लेते थे। - हुकुमचंद, अभिभावक

फीस के लिए परेशान तो करते ही थे। कोई अभिभावक यदि बच्चे का नाम कटवाने जाता तो नाम भी नहीं काटते थे। - छतरपाल, अभिभावक

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed