साहिबाबाद। मोहन नगर स्थित गुलमोहर ग्रीन्स के विकासकर्ता ने स्थगन आदेश के बावजूद जिम्मेदारों के साथ मिलकर निर्माण कराया था। इसके विरोध में निवासियों ने जीडीए और पुलिस से शिकायत की, लेकिन वह नहीं आमना तो उनको पुन: अदालत की शरण में जाना पड़ा और दोबारा मिले आदेश के बाद ही काम रोका जा सका। यह बात सोसायटीर निवासी अधिवक्ता सुधीश कुमार ने कही।
उन्होंने बताया कि वर्ष-2005/2006 की इस सोसायटी में वर्ष 2010 से लोगों को कब्जा देना शुरू किया और प्रोजेक्ट पूरा हुए बिना ही विकासकर्ता यहां लगातार कंपाउंडिंग कराकर मनमुताबिक निर्माण कराते रहे। इतना ही नहीं फ्लैट खरीदारों को किए गए वादों को तोड़ते रहे। यही वजह है कि पहली याचिका खारिज होने के बाद तीसरी याचिका डाली। अधिवक्ता ने बताया कि याचिकाकर्ता में शामिल न होने के कारण वह अवमानना नहीं डाल सकते थे। इसलिए उन्होंने दिनेश सिंह और शोभित के साथ मिलकर तीसरी याचिका डाली। स्थगन के दौरान हो रहे निर्माण की फोटो और वीडियो के साथ साक्ष्य उपलब्ध कराए। इस पर कोर्ट ने सख्ती दिखाई, इसके बाद करीब छह से सात माह पहले काम रुका। मगर तब तक ढांचे पूरा किया जा चुका था। वहीं, दूसरी याचिका में शामिल डॉ. राजीव अधाना ने बताया कि कोर्ट का आदेश जनपद ही नहीं प्रदेश व देश में चर्चा का विषय बना हुआ है, लेकिन दो दिन बीत जाने के बाद भी जीडीए की टीम न तो सोसायटी पहुंची है और न ही याचिकाकर्ताओं से संपर्क किया। बता दें कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गुलमोहर ग्रीन्स में चार टावरों पर बने दो-दो तल और नए बने दो टावर को अवैध बताते हुए दो माह में गिराने का आदेश दिया है।