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चिंताजनक: लगातार ठंड और धूप की कमी से युवाओं में बढ़ रहा अवसाद का खतरा, जानें वजह और लक्षण

Thu, 01 Jan 2026 10:38 PM IST
आकाश दुबे माई सिटी रिपोर्टर, गाजियाबाद
माई सिटी रिपोर्टर, गाजियाबाद Published by: आकाश दुबे Updated Thu, 01 Jan 2026 10:38 PM IST
सार

अवसाद के पुराने मरीजों की 20 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है। डॉक्टरों ने सक्रिय दिनचर्या पर जोर दिया है। पढ़ें चिकित्सकों की राय और इसके पीछे की वजह।

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combination of persistent cold weather and lack of sunlight is increasing risk of depression among young peopl
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : freepik

विस्तार

लगातार बढ़ती सर्दी और कई दिनों तक धूप न निकलने की स्थिति का असर अब केवल शारीरिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसका गहरा प्रभाव मानसिक स्वास्थ्य पर भी देखने को मिल रहा है। खासतौर पर युवा वर्ग और वे लोग जो पहले अवसाद से जूझ चुके हैं। इस मौसम में दोबारा मानसिक परेशानियों का सामना कर रहे हैं। एमएमजी अस्पताल में रोजाना 120 से 125 मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं।

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एमएमजी अस्पताल में हाल के दिनों में ऐसे मरीजों की संख्या में करीब 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो पहले इलाज के बाद सामान्य हो चुके थे लेकिन सर्दी के मौसम में फिर से अवसाद के लक्षण महसूस करने लगे हैं। अस्पताल पहुंच रहे मरीजों में उदासी, बेचैनी, चिड़चिड़ापन, थकान, नकारात्मक सोच और किसी भी काम में मन न लगने जैसी समस्याएं आम हैं।
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चिकित्सकों के अनुसार सर्दी के कारण लोग घरों में ज्यादा समय बिताने लगते हैं, शारीरिक गतिविधि कम हो जाती है और सामाजिक संपर्क भी घट जाता है, जिससे मानसिक स्थिति और कमजोर होने लगती है।
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सर्दी में न्यूरोलॉजिकल बदलाव से परेशानी
एमएमजी अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. साकेतनाथ तिवारी बताते हैं कि सर्दियों में शरीर के भीतर कई तरह के न्यूरोलॉजिकल बदलाव होते हैं। इस दौरान सेरोटोनिन हार्मोन का स्तर कम हो जाता है, जो मूड को संतुलित रखने में अहम भूमिका निभाता है। साथ ही कार्टिसोल हार्मोन का संतुलन भी बिगड़ने लगता है। इन हार्मोनल बदलावों का सीधा असर दिमाग पर पड़ता है और अवसाद के लक्षण दोबारा उभर सकते हैं। उन्होंने बताया कि कई मरीज ठंड की वजह से घर से बाहर निकलना कम कर देते हैं, जिससे दवाइयों और इलाज का असर भी अपेक्षाकृत कम महसूस होता है।

सर्दी में एसएडी का दुष्प्प्रभाव
एमएमजी अस्पताल के मन प्रकोष्ठ में कार्यरत क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. चंदा यादव का कहना है कि इस मौसम में कई मरीज सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर (एसएडी) से प्रभावित हो रहे हैं। दिन छोटे हो जाना, धूप की कमी और बिगड़ी दिनचर्या इसके मुख्य कारण हैं। इसका असर नींद, भूख और सोचने समझने की क्षमता पर पड़ता है। समय पर काउंसलिंग और इलाज न मिलने पर यह समस्या गंभीर रूप ले सकती है। उन्होंने नियमित योग, हल्का व्यायाम, पर्याप्त पानी पीने और रोजाना कुछ समय धूप में बैठने की सलाह दी।

सर्दी में बेचैनी और उदासी बढ़ी
राजनगर एक्सटेंशन निवासी 38 वर्षीय इंजीनियर पिछले तीन वर्षों से अवसाद का इलाज करा रहे हैं। उन्होंने बताया कि गर्मियों में उनकी हालत सामान्य रहती है, लेकिन सर्दी शुरू होते ही बेचैनी और उदासी बढ़ने लगती है। ठंड में न तो नींद पूरी होती है और न ही किसी काम में मन लगता है। हाल ही में हालत बिगड़ने पर वे दोबारा एमएमजी अस्पताल पहुंचे, जहां दवाइयों के साथ काउंसलिंग शुरू की गई।

स्थिति में हो रहा सुधार
लोहिया नगर की 45 वर्षीय गृहिणी, जो ढाई साल के इलाज के बाद सामान्य हो गई थीं, सर्दी बढ़ने के साथ फिर से थकान, निराशा और डर महसूस करने लगीं। परिवार के समझाने पर अस्पताल पहुंचने के बाद समय पर इलाज मिलने से उनकी स्थिति में धीरे धीरे सुधार हो रहा है।


टेली मानस हेल्पलाइन पर करें संपर्क
एमएमजी अस्पताल में संचालित मन प्रकोष्ठ के नोडल अधिकारी डॉ. राकेश गुप्ता ने बताया कि सर्दियों में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर सतर्क रहना बेहद जरूरी है। नियमित दिनचर्या, सामाजिक संपर्क और सक्रिय जीवनशैली अवसाद के खतरे को काफी हद तक कम कर सकती है। किसी भी तरह की मानसिक परेशानी महसूस होने पर टेली मानस हेल्पलाइन 14416 पर संपर्क किया जा सकता है, जहां निशुल्क काउंसिलिंग और जरूरत पड़ने पर आगे के इलाज की सुविधा उपलब्ध है।

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