प्यार की परीक्षा: बच्चे दिल टूटने से परेशान, मां-बाप समझ रहे इग्जाम का प्रेशर, अभिभावक इन बातों का रखें ध्यान
मनोचिकित्सक संजीव त्यागी ने बताया कि एनसीआर में बाहर से आकर पढ़ने वाले इंजीनियरिंग और मेडिकल के छात्रों में यह समस्या अधिक है। ये छात्र-छात्राएं ब्वॉय फ्रेंड और गर्ल फ्रेंड के चक्कर में पढ़ाई पर पूरा ध्यान नहीं दे पाते और जब परीक्षा नजदीक आते हैं तो परिणाम के डर से गहरे तनाव में चले जाते हैं।
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परीक्षा नजदीक आते ही गाजियाबाद का नेहरू नगर निवासी 12वीं का छात्र बीमार रहने लगा तो मां-बाप को स्वभाविक रूप से चिंता हुई। उसे भूख लगना कम हो गई। हर वक्त तनाव में रहता। नौबत यहां तक आई कि वह तनाव से बेहोश तक हो गया। इसे परीक्षा का तनाव मानकर मां-बाप जब मनोचिकित्सक के पास पहुंचे तो मामला कुछ और ही निकला। छात्र ने काउंसलर को बताया कि उसकी गर्लफ्रेंड ने उससे बात करना बंद कर दिया है, उससे यह बर्दाश्त नहीं हो रहा है।
जिला एमएमजी अस्पताल स्थित नॉन कम्यूनिकेबल डिजीज सेंटर (एनसीडीसी) की मनोचिकित्सक डॉ. चंदा यादव ने बताया कि यह इस तरह का अकेला मामला नहीं है। एनसीडीसी में अक्तूबर माह में आए कुल 420 केस में 10 फीसदी यानी 42 ऐसे ही हैं। इसे चिकित्सकीय भाषा में डिसोसिएटिव डिसऑर्डर कहते हैं। ये कई तरह के होते हैं। इनमें एक स्थिति ऐसी है जब इंसान अपनी दुनिया में खो जाता है। ये विघटनकारी विकार मनोवैज्ञानिक आघात से उत्पन्न होते हैं। इसके शिकार लोगों में किशोर-किशोरियों और युवक-युवतियों की संख्या बराबर है। पिछले तीन-चार सालों में यह परेशानी बढ़ी है। सोशल मीडिया पर रिश्ते आसानी से बन रहे हैं लेकिन जब इनमें धोखा मिलता है तो युवक-युवतियां न तो किसी से मन की बात साझा कर पाते हैं और न ही इस स्थिति को सहन कर पाते हैं। ऐसे में तनाव से बीमार पड़ जाते हैं।
दोस्ती में दगा मिलने से बिगड़ी युवती की तबीयत
इंदिरापुरम निवासी बीटेक छात्रा की तबीयत अचानक बिगड़ती चली गई। वह बेहोश हो गई। डॉक्टर को दिखाया लेकिन तबीयत ठीक नहीं हुई। उसे चक्कर आते, सिर में दर्द रहता और बुखार आ जाता। मां-बाप को लगा कि तनाव पढ़ाई का है, क्योंकि परीक्षा नजदीक थी लेकिन मनोचिकित्सक को दिखाया तो पता चला कि उसे दोस्ती में दगा मिली है। उसने मनोचिकित्सक को बताया कि उसकी जिस युवक से दोस्ती थी, वह उसे ब्लैकमेल करने की कोशिश कर रहा है। उसके साथ जो फोटो खिंचवाए, उन्हें इंटरनेट पर डालने की धमकी दे रहा है। वह इस बात को किसी को बता नहीं पा रही है। मनोचिकित्सक ने बताया कि अंदर ही अंदर घुटने से तनाव का स्तर बहुत बढ़ गया और यह समस्या आई।
इंजीनियरिंग और मेडिकल के छात्र ज्यादा शिकार
मनोचिकित्सक संजीव त्यागी ने बताया कि एनसीआर में बाहर से आकर पढ़ने वाले इंजीनियरिंग और मेडिकल के छात्रों में यह समस्या अधिक है। ये छात्र-छात्राएं ब्वॉय फ्रेंड और गर्ल फ्रेंड के चक्कर में पढ़ाई पर पूरा ध्यान नहीं दे पाते और जब परीक्षा नजदीक आते हैं तो परिणाम के डर से गहरे तनाव में चले जाते हैं। ऐसे में तबीयत तेजी से बिगड़ जाती है। जिन्हें दोस्ती में दगा मिलती है, उनके तनाव का स्तर और ज्यादा होता है।
बच्चों के साथ दोस्ताना व्यवहार करें ताकि वह अपने मन की बात साझा करने में हिचक महसूस न करें।
बच्चों पर अपने फैसले न थोपें, इससे वे तनाव में आते हैं और फिर दूरी बनाने लगते हैं।
बच्चों से 24 घंटे में कम से कम एक बार बात जरूर करें, उनके व्यवहार में बदलाव आए तो इसे समझें।
बच्चों को भावनात्मक जुड़ाव महसूस कराएं, वे कोई गलती करें तो प्यार से समझाएं।
(जैसा मनोचिकित्सकों ने बताया)