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बदला लेआउट, लिंक रोड से सटकर बनेेंगी बहुमंजिला इमारतें
अमर उजाला, गाजियाबाद
Updated Mon, 05 Dec 2016 10:16 PM IST
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फ्लैट
- फोटो : amar ujala
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साहिबाबाद। वसुंधरा सेक्टर-7 और 8 की जमीन को रेजिडेंशियल से मिक्सड लैंडयूज में बदले जाने के बाद आवास विकास परिषद ने योजना का ले-आउट भी बदल दिया है। बिल्डरों को फायदा पहुंचाने के लिए ग्रुप हाउसिंग के ज्यादातर प्लॉटों को लिंक रोड से सटे सेक्टर-8 में शिफ्ट कर दिया गया है।
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दो दिसंबर को बदले ले-आउट में कम्युनिटी फैसिलिटी की जगह सेक्टर-8 से बदल कर सेक्टर-7 कर दी गई है। आवास विकास परिषद के आला अधिकारियों ने नवंबर की शुरुआत में वसुंधरा सेक्टर-7 और 8 की 102 एकड़ जमीन का लैंडयूज रेजिडेंशियल से बदल कर मिक्सड कर दिया था।
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इस जमीन पर बनने वाली बहुमंजिला इमारतों में नीचे कामर्शियल और ऊपर रेजिडेंशियल फ्लैट बनाए जा सकेंगे। लैंडयूज बदले जाने के साथ ही परिषद ने उस पुराने ले-आउट से छेड़छाड़ नहीं करने का दावा किया था|
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जिसमें लोगों के लिए कम्युनिटी फैसिलिटी बनाई जानी थी मगर परिषद ने बीते दो दिसंबर को पुराने ले-आउट को धता बताते हुए नया ले-आउट प्लान जारी कर दिया है, जिसमें कम्युनिटी फैसिलिटी की जमीन को सेक्टर-7 के पिछले हिस्से में जगह दी गई है और वहां की ज्यादातर ग्रुप हाउसिंग को लिंक रोड के किनारे सेक्टर-8 में जगह दी गई है।
सूत्रों को मानें तो योजना में जमीन खरीदने के इच्छुक बिल्डरों को लाभ पहुंचाने के लिए यह परिवर्तन किया गया है। अधिशासी अभियंता अतुल कुमार ने बताया कि नए ले-आउट में कम्युनिटी फैसिलिटी की जमीन को सेक्टर-7 में शिफ्ट कर दिया गया है जबकि ग्रुप हाउसिंग को सेक्टर-8 में लाया गया है। मुख्यालय से ही ये परिवर्तन किए गए हैं। उन्होंने कहा कि ले-आउट में बदलाव से कम्युनिटी फैसिलिटी की जमीन के क्षेत्रफल में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है।
आचार संहिता लगने से पहले ही प्लॉट बेचने की तैयारी
सूत्रों की मानें तो परिषद ने ले-आउट में बदलाव बिल्डरों को लाभ पहुंचाने के लिए किया है। इतना ही नहीं मुख्यालय से सोमवार को वसुंधरा कार्यालय पहुंचे आदेश में स्थानीय अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि प्लॉटों की नीलामी जल्द से जल्द शुरू की जाए।
आदेश में यह भी साफ किया गया है कि प्लाटों की नीलामी अभी कर दी जाए जबकि एलिवेटेड रोड का कास्टिंग यार्ड होने के चलते दोनों सेक्टरों का कब्जा एक साल बाद मिल सकेगा। सूत्रों का कहना है कि कुछ अधिकारी और बिल्डरों की मिलीभगत से विधानसभा चुनाव की आचार संहिता से पहले ही जमीन बेचने की योजना बनाई जा रही है, जिससे बिल्डरों को लाभ दिया जा सके।