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तेंदुआ पकड़ने को लगाया पिंजरा, आसपास अलर्ट
ब्यूरो,अमर उजाला गाजियाबाद
Updated Sun, 21 Aug 2016 11:40 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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सिकरोड़ गांव में शनिवार रात तेंदुआ देखे जाने की खबर के बाद इलाके में वन विभाग का सर्च ऑपरेशन रविवार को भी जारी रहा। तेंदुए को पकड़ने के लिए वन विभाग ने खेतों में पिंजरा लगाया है। इसमें बकरी को बांधा गया है।
वन विभाग को आशंका है कि तेंदुआ हिंडन के रास्ते मेरठ-बागपत की तरफ जा सकता है इसलिए आसपास के जनपदों को भी अलर्ट कर दिया गया है। वन विभाग ने सर्च ऑपरेशन के लिए दो टीमें बनाई हैं।
एक सप्ताह पूर्व ही पिंजरा हिंडन एयरबेस से लाकर दुहाई में लगाया गया था, जहां पांच बकरियों के मारे जाने की सूचना थी। शनिवार रात जो पंजों के निशान खेतों में थे, उन्हें मिटा दिया गया ताकि तेंदुआ आए तो उसके स्पष्ट निशान खेतों में मिले।
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वन विभाग के इंस्पेक्टर अशोक गुप्ता ने बताया कि स्कूल की सीसीटीवी फुटेज में भी कुछ स्पष्ट नहीं आया है। अंधेरा होने की वजह से धुंधलापन है। उन्होंने बताया कि एक तेंदुआ अगर अपनी चाल में चलता रहे तो एक रात में वह पचास किलोमीटर की दूरी तय कर सकता है।
अगर तेंदुआ यहां से निकल गया होगा तो वह जनपद की सीमा को पार कर गया होगा। उन्होंने बताया कि तेंदुआ मेरठ-बागपत की तरफ भी जा सकता है। वह हिंडन नदी के किनारे जंगलों में भी रह सकता है क्योंकि इन जंगलों में जंगली सुअर रहते हैं जिनका शिकार उसे पसंद है।
स्कूल खुलेगा
प्रीसिडियम स्कूल प्रबंधन के हेड मनीष ने बताया कि स्कूल में तेंदुआ घुसने की खबर अखबारों में पढ़कर पैरेंट्स चिंतित हो गए। दिन भर फोन करके हालात की जानकारी लेते रहे। मनीष ने बताया कि तेंदुआ होने की पुष्टि अभी तक नहीं हुई है ऐसे में सोमवार को स्कूल अपने तय समय पर खुलेगा।
पंजे के निशान की जांच रिपोर्ट से होगी तेंदुए की पुष्टि
डीएफओ बीपी सिंह ने बताया कि जो पंजे के निशान मिले हैं, वह डॉग प्रजाति के लग रहे हैं। उन्होंने बताया कि कैट प्रजाति के जो जानवर होते हैं उनके पंजों के निशान में कभी भी नाखून के चिन्ह नहीं दिखते क्योंकि उनका पूरा पंजा जमीन पर लगता है। अभी पंजों के निशान की जांच की जा रही है। जांच की फाइनल रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ निश्चित तौर कहा जा सकता है।
एक साल में चार बार दिखे तेंदुए, दो बार मिले मृत
करीब तीन महीने पहले हिंडन एयरबेस के जंगलों में तेंदुआ देखा गया था। तब एयरबेस के मुख्य सुरक्षा अधिकारी ने वन विभाग से पिंजरा मंगाया था। करीब छह महीने पहले गढ़ में एक साथ तीन-चार तेंदुए देखे गए थे।
वन विभाग पिंजरा लेकर वहां पहुंचा था और सात दिनों तक सर्च ऑपरेशन चलाने के बाद भी एक भी तेंदुआ पकड़ में नहीं आया। सूत्रों ने बताया कि पिछले साल जनवरी में मुरादनगर के अबुपुर गांव में तेंदुआ देखा गया था, जब वन विभाग की टीम वहां पहुंची तो तेंदुआ मृत मिला था। इस घटना के कुछ ही दिन बाद जनवरी में ही ट्रॉनिका सिटी लोनी में एक तेंदुआ मृत पाया गया था। तेंदुए का एक पैर कटा हुआ था।
पिंजरे का साइज है छोटा
तेंदुए को पकड़ने के लिए गाजियाबाद जिले में एक ही पिंजरा है। डीएफओ बीपी सिंह भी मानते हैं कि तेंदुए को पकड़ने के लिए इस पिंजरे का आकार अपेक्षाकृत छोटा है। यह पिंजरा 6 फीट लंबा और 5 फीट चौड़ा है। डीएफओ ने कहा कि इससे बडे़ साइज का जो पिंजरा लखनऊ में है, कायदे से तेंदुए को पकड़ने के लिए ऐसा पिंजरा यहां भी होना चाहिए।
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वन विभाग को आशंका है कि तेंदुआ हिंडन के रास्ते मेरठ-बागपत की तरफ जा सकता है इसलिए आसपास के जनपदों को भी अलर्ट कर दिया गया है। वन विभाग ने सर्च ऑपरेशन के लिए दो टीमें बनाई हैं।
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एक सप्ताह पूर्व ही पिंजरा हिंडन एयरबेस से लाकर दुहाई में लगाया गया था, जहां पांच बकरियों के मारे जाने की सूचना थी। शनिवार रात जो पंजों के निशान खेतों में थे, उन्हें मिटा दिया गया ताकि तेंदुआ आए तो उसके स्पष्ट निशान खेतों में मिले।
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वन विभाग के इंस्पेक्टर अशोक गुप्ता ने बताया कि स्कूल की सीसीटीवी फुटेज में भी कुछ स्पष्ट नहीं आया है। अंधेरा होने की वजह से धुंधलापन है। उन्होंने बताया कि एक तेंदुआ अगर अपनी चाल में चलता रहे तो एक रात में वह पचास किलोमीटर की दूरी तय कर सकता है।
अगर तेंदुआ यहां से निकल गया होगा तो वह जनपद की सीमा को पार कर गया होगा। उन्होंने बताया कि तेंदुआ मेरठ-बागपत की तरफ भी जा सकता है। वह हिंडन नदी के किनारे जंगलों में भी रह सकता है क्योंकि इन जंगलों में जंगली सुअर रहते हैं जिनका शिकार उसे पसंद है।
स्कूल खुलेगा
प्रीसिडियम स्कूल प्रबंधन के हेड मनीष ने बताया कि स्कूल में तेंदुआ घुसने की खबर अखबारों में पढ़कर पैरेंट्स चिंतित हो गए। दिन भर फोन करके हालात की जानकारी लेते रहे। मनीष ने बताया कि तेंदुआ होने की पुष्टि अभी तक नहीं हुई है ऐसे में सोमवार को स्कूल अपने तय समय पर खुलेगा।
पंजे के निशान की जांच रिपोर्ट से होगी तेंदुए की पुष्टि
डीएफओ बीपी सिंह ने बताया कि जो पंजे के निशान मिले हैं, वह डॉग प्रजाति के लग रहे हैं। उन्होंने बताया कि कैट प्रजाति के जो जानवर होते हैं उनके पंजों के निशान में कभी भी नाखून के चिन्ह नहीं दिखते क्योंकि उनका पूरा पंजा जमीन पर लगता है। अभी पंजों के निशान की जांच की जा रही है। जांच की फाइनल रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ निश्चित तौर कहा जा सकता है।
एक साल में चार बार दिखे तेंदुए, दो बार मिले मृत
करीब तीन महीने पहले हिंडन एयरबेस के जंगलों में तेंदुआ देखा गया था। तब एयरबेस के मुख्य सुरक्षा अधिकारी ने वन विभाग से पिंजरा मंगाया था। करीब छह महीने पहले गढ़ में एक साथ तीन-चार तेंदुए देखे गए थे।
वन विभाग पिंजरा लेकर वहां पहुंचा था और सात दिनों तक सर्च ऑपरेशन चलाने के बाद भी एक भी तेंदुआ पकड़ में नहीं आया। सूत्रों ने बताया कि पिछले साल जनवरी में मुरादनगर के अबुपुर गांव में तेंदुआ देखा गया था, जब वन विभाग की टीम वहां पहुंची तो तेंदुआ मृत मिला था। इस घटना के कुछ ही दिन बाद जनवरी में ही ट्रॉनिका सिटी लोनी में एक तेंदुआ मृत पाया गया था। तेंदुए का एक पैर कटा हुआ था।
पिंजरे का साइज है छोटा
तेंदुए को पकड़ने के लिए गाजियाबाद जिले में एक ही पिंजरा है। डीएफओ बीपी सिंह भी मानते हैं कि तेंदुए को पकड़ने के लिए इस पिंजरे का आकार अपेक्षाकृत छोटा है। यह पिंजरा 6 फीट लंबा और 5 फीट चौड़ा है। डीएफओ ने कहा कि इससे बडे़ साइज का जो पिंजरा लखनऊ में है, कायदे से तेंदुए को पकड़ने के लिए ऐसा पिंजरा यहां भी होना चाहिए।