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बोरवेल, सबमर्सिबल पर प्रतिबंध से प्यासा रह जाएगा शहर
ब्यूरो , अमर उजाला गाजियाबाद
Updated Sun, 16 Apr 2017 12:39 AM IST
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पेयजल को सूखे कंठ
- फोटो : अमर उजाला
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भूजल दोहन पर रोक लगाने के लिए एक सप्ताह में बोरवेल और सबमर्सिबल बंद कराने के एनजीटी के आदेश से एक ओर जहां फैक्ट्री संचालकों और बिल्डर्स में हड़कंप मच गया है, वहीं पर्यावरण प्रेमियों ने फैसले का स्वागत किया है। आदेश से हाउसिंग सोसायटीज में रहने वाले लाखों लोगों के दिलों की धड़कने भी बढ़ने लगी हैं।
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बिना अनुमति सोसायटीज में लगाए गए सबमर्सिबल बंद हुए तो गाजियाबाद और टीएचए में पानी का संकट गहरा जाएगा। नगर निगम, जीडीए, आवास विकास समेत सरकारी एजेंसियों को अपने संसाधनों से पानी की आपूर्ति को सुधारना होगा, नहीं तो स्थिति बेहद खराब हो सकती है।
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हालांकि सरकारी विभाग अभी एनजीटी के आदेश की कापी मिलने का इंतजार कर रहे हैं।शहर की अधिकांश कालोनियों की हकीकत यह है कि घर-घर में लोगों ने सबमर्सिबल लगा रखा है। सबमर्सिबल न हो तो नगर निगम और जीडीए के भरोसे प्यास नहीं बुझाई जा सकती।
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टीएचए के कई ऐसे इलाके हैं, जिनमें लोग बोतलबंद पानी से प्यास बुझाते हैं और बिल्डर की ओर से लगाए गए बोरवेल से दैनिक क्रियाओं के लिए पानी का इंतजाम करते हैं। यही नहीं घरों में बोतलबंद पानी पहुंचाने के लिए शहर में करीब 250 पानी के प्लांट लगे हुए हैं। इनमें से एक के पास भी जिला प्रशासन की अनुमति नहीं है।
अब नगर निगम के समानांतर चल रही इस व्यवस्था को एक सप्ताह में यानी अगले बृहस्पतिवार तक बंद करने के आदेश जारी हुए हैं तो पानी के लिए हाहाकार मचना तय माना जा रहा है।
वैशाली, वसुंधरा, इंदिरापुरम, कौशांबी, शालीमार गार्डन, राजेंद्र नगर, लाजपतनगर, डीएलएफ, राजनगर एक्सटेंशन, प्रताप विहार, विजयनगर, बागू, क्रिश्चियन नगर, राहुल विहार, भीमनगर, शांति नगर, सैन विहार, दुहाई, गढ़ी, सिकरोड़, संजय नगर, रईसपुर।
यह है मामला
भूजल दोहन के लिए गाजियाबाद नगर निगम सीमा का एरिया प्रतिबंधित क्षेत्र है। यहां कामर्शियल और इंडस्ट्रियल प्रयोग के लिए भूजल का प्रयोग नहीं किया जा सकता। सिर्फ घरों के लिए एक एचपी का सबमर्सिबल लगाया जा सकता है।
इसके लिए भी पहले कई विभागों से एनओसी लेना आवश्यक है, साथ ही सबमर्सिबल लगाने वाले व्यक्ति को रेन वाटर हार्वेस्टिंग लगाना भी अनिवार्य है। गाजियाबाद में बिना अनुमति के धड़ल्ले से डीप बोरवेल लगाए जा रहे हैं।
सोसायटी फॉर प्रोटेक्शन एनवायरमेंट एनजीओ और एक्टिविस्ट सुशील राघव ने अवैध जल दोहन के खिलाफ एनजीटी में याचिका दाखिल की थी। जिस पर एनजीटी ने अवैध बोरवेल को बंद करने का आदेश दिया है। सुशील राघव ने बताया कि मात्र 21 कंपनियों ने ही सेंट्रल ग्राउंड वाटर अथॉरिटी से एनओसी ले रखी है।
इन कालोनियों में होगी सबसे ज्यादा दिक्कत
टीएचए की गरिमा गार्डन, महाराजपुर, साहिबाबाद गांव, राधा कुंज, डीएलएफ, बृज विहार सी ब्लाक, राधेश्याम कालोनी आदि में नगर निगम द्वारा पानी की सप्लाई नहीं होती है। लोगों के लिए बोतल बंद पानी ही एक मात्र सहारा है। प्लांट बंद होने से लोगों के सामने पीने के पानी का संकट खड़ा हो जाएगा।
पेयजल के लिए लोगों के पास कोई भी संसाधन नहीं होगा।
पानी की कालोनियों में कितनी डिमांड
टीएचए के वसुंधरा जोन में 50 क्यूसेक और मोहन नगर जोन में 27 क्यूसेक पानी की डिमांड है। नगर निगम दोनों ही जोन में पानी की सप्लाई मांग के अनुसार नहीं कर पा रहा है। नगर निगम वसुंधरा जोन में 30 क्यूसेक और मोहन नगर जोन में लगभग 11 क्यूसेक ही पानी की सप्लाई कर पाता है।
वहीं इंदिरापुरम की डिमांड करीब 22 क्यूसेक है। जीडीए को इतना ही पानी मिलता है। लेकिन स्टोरेज की व्यवस्था नहीं होने से जीडीए मात्र 14 क्यूसेक पानी ही ले पा रहा है। शहर भर में प्रतिदिन करीब 504 एमएलडी पानी की डिमांड होती है, लेकिन नगर निगम अपने संसाधनों से सिर्फ 400 एमएलडी पानी की सप्लाई दे पाता है।
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सेंट्रल ग्राउंड वाटर अथॉरिटी के आंकड़ों के मुताबिक रजापुर ब्लाक में वर्ष 2006 में भूजल स्तर 16.95 मीटर नीचे था। वर्ष 2008 में 17.69 मीटर, 2010 में 20.21 मीटर पहुंच गया था। सबसे ज्यादा गिरावट इसके बाद दर्ज की गई। 2014 में भूजल का स्तर 34.79 मीटर पहुंच गया।
साहिबाबाद में वर्ष 1998 में भूजल स्तर 6.93 मीटर था, अब 35 मीटर से भी ज्यादा नीचे पहुंच गया है। गाजियाबाद में बहुमंजिला इमारतों के निर्माण में भूजल इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके अलावा यहां कई बेवरेज कंपनियां हैं। इनकी वजह से यहां स्थिति विस्फोटक हो रही है।
नगर निगम के अधिकारी भी मान रहे हैं कि ग्राउंड वाटर रिचार्ज पर ध्यान न दिया गया तो आने वाले दिनों में पानी का संकट और बढ़ेगा। अब नगर निगम ने हैंडपंप 160 फीट की बजाय 200 फीट पर लगाना शुरू कर दिए हैं।
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अधिकारी बोले
एनजीटी के आदेश की प्रति अभी नहीं मिली है। आदेश की प्रति मिलने पर ही पता चल पाएगा कि पानी की सप्लाई के लिए स्पष्ट आदेश क्या हैं। एनजीटी के आदेशों का पालन किया जाएगा। वैसे भी नगर निगम पानी के संसाधनों को लगातार बढ़ा रहा है। कई योजनाएं पूरी हो चुकी है। - मंजू रानी गुप्ता, महाप्रबंधक, जलकल, नगर निगम