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बैंक नहीं खोल रहे श्रमिकों के एकाउंट
ब्यूरो, अमर उजाला /गाजियाबाद
Updated Thu, 08 Dec 2016 12:25 AM IST
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बैंक के बाहर लगी भीड़
- फोटो : अमर उजाला
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नोट बंदी के बाद से फैक्ट्रियों में काम करने वाले श्रमिकों के एकाउंट नहीं खुल पा रहे हैं। केंद्र सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि श्रमिकों का बैंक में एकाउंट खोल कर उनकी सैलरी दी जाए। बैंकों के पास जो कर्मचारी हैं, वह कैश देने और जमा करने में लगे हैं, जिस वजह से बैंक श्रमिकों का एकाउंट खोलने के लिए कैंप नहीं लगा रहा है।
केंद्र सरकार द्वारा 500 और 1000 के नोट बंद किए जाने के बाद से बाजार में उथल-पुथल मची हुई है। फैक्ट्रियों में काम करने वाले श्रमिकों के सामने परेशानी है कि वह अपनी सैलरी कैसे लेंगे जबकि उद्यमियों के सामने दिक्कत है कि जब बैंक के पास कैश नहीं है तो वह कैसे सैलरी दें।
इन दोनों परिस्थितियों के बीच में उद्यमी और श्रमिक पिस रहे हैं। श्रमिकों का एकाउंट खोलने के लिए सरकार ने निर्देश दे दिया है। एकाउंट तब खुलेंगे, जब बैंक अपने स्तर से औद्योगिक क्षेत्रों में जाकर कैंप लगाएगा।
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ज्यादा एकाउंट खोलने पर बैंकों को ही फायदा होगा, लेकिन वर्तमान में अधिकतर कर्मचारी कैश जमा करने और बांटने के कार्य में लगे हैं। नोट बंदी के बाद से बैंकों का कारोबार भी कम हुआ है।
- क्या कहते हैं उद्यमी
श्रमिकों का एकाउंट खुलवाने के लिए बैंकों के पास प्रार्थना पत्र दिया हुआ है पर कोई रिस्पांस नहीं मिला। जब पूछो तो जवाब मिलता है कि वर्क लोड कम होने पर एकाउंट खुल पाएंगे। -एनएन मिश्रा
जिन श्रमिकों का एकाउंट है, उनके एकाउंट में सैलरी ट्रांसफर कर दी जाती है, जिनका एकाउंट नहीं है, उन्हीें को दिक्कत हो रही है। अधिकांश श्रमिकों का एकाउंट बाहरी जनपदों का है, इससे भी परेशानी हो रही है।- निरंकार सिंह
- बैंक खुले, लगी लाइन, नहीं मिला कैश
मंगलवार को सरकारी छुट्टी के बाद बुधवार को जब बैंक खुले तो लोगों की भीड़ बढ़ गई। कई बैंकों के बाहर नो कैश का बोर्ड लगा था जबकि कुछ बैंकों में एक से दो घंटे के अंदर ही कैश खत्म हो गया। यूनियन बैंक की किसी भी शाखा में कैश नहीं मिल रहा है।
एसबीआई के चीफ मैनेजर पीके झा के मुताबिक बैंक के पास जितना कैश था, उसे अन्य ब्रांचों में बांट दिया गया। अगर बुधवार रात तक आरबीआई से कैश नहीं आया तो दिक्कत शुरू हो जाएगी।
फिलहाल कैश की किल्लत को देखते हुए ग्राहकों को 10 हजार रुपये ही दिए जा रहे हैं। इलाहाबाद बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, देना बैंक, एक्सिस बैंक, एचडीएफसी बैंक, आईडीबीआई बैंक, सिंडिकेट बैंक, पीएनबी समेत सभी बैंकों के पास पर्याप्त मात्रा में कैश नहीं है।
- अव्यवस्था से बचने के लिए बैंक अपना रहे टोकन सिस्टम
लोगों की भीड़ को देखते हुए अधिकांश बैंक टोकन सिस्टम अपना रहे हैं। बैंक ऑफ बड़ौदा, केनरा बैंक, एसबीआई, पीएनबी, इंडियन ओवरसीज बैंक , यूनियन बैंक टोकन सिस्टम के जरिए ही ग्राहकों को कैश दे रहे हैं।
केनरा बैंक के चीफ मैनेजर वीपी सिंह के मुताबिक जितना कैश मिलता है, उसके अनुसार टोकन दिया जाता है। तकरीबन 100 से 125 लोगों कोटोकन दिए जा रहे हैं।
- दर्द-ए-कतार
कैश न मिलने पर लोगों का सब्र का बांध अब टूट रहा है। हालत यह है कि अब तक बैंकों ने जितना कैश बांटा है, वो मार्केट में पूरा नहीं आया है। ज्यादातर लोग खर्चों में कटौती कर रहे हैं। माह के शुरुआत में कैश की कमी से घरों में भी परेशानी खड़ी हो गई है। कई छोटे खर्चे कैश से ही पूरे किए जाते हैं।
- बोले लोग
रोजाना बैंक और एटीएम के बाहर लाइन लगाना अब मुश्किल हो गया है। सब काम छोड़ कर सिर्फ रुपये निकालने के लिए लाइन लगानी पड़ रही है। - नंद किशोर, प्रताप विहार
रुपये न होने से सब काम रुक जाता है। आना-जाना हो या कोई सामान खरीदना हो। सभी काम के लिए कैश चाहिए और बैंक पर लाइन लगाने के बाद भी कैश नहीं मिलता। - प्रवीन, विजय नगर
घर के छोटे कामों के लिए पैसे की जरूरत पड़ती है। नौकरानी चेक नहीं ले रही है, उसे कैश ही चाहिए, इससे दिक्कत है। - इंदू अरोड़ा, लोहिया नगर
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केंद्र सरकार द्वारा 500 और 1000 के नोट बंद किए जाने के बाद से बाजार में उथल-पुथल मची हुई है। फैक्ट्रियों में काम करने वाले श्रमिकों के सामने परेशानी है कि वह अपनी सैलरी कैसे लेंगे जबकि उद्यमियों के सामने दिक्कत है कि जब बैंक के पास कैश नहीं है तो वह कैसे सैलरी दें।
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इन दोनों परिस्थितियों के बीच में उद्यमी और श्रमिक पिस रहे हैं। श्रमिकों का एकाउंट खोलने के लिए सरकार ने निर्देश दे दिया है। एकाउंट तब खुलेंगे, जब बैंक अपने स्तर से औद्योगिक क्षेत्रों में जाकर कैंप लगाएगा।
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ज्यादा एकाउंट खोलने पर बैंकों को ही फायदा होगा, लेकिन वर्तमान में अधिकतर कर्मचारी कैश जमा करने और बांटने के कार्य में लगे हैं। नोट बंदी के बाद से बैंकों का कारोबार भी कम हुआ है।
- क्या कहते हैं उद्यमी
श्रमिकों का एकाउंट खुलवाने के लिए बैंकों के पास प्रार्थना पत्र दिया हुआ है पर कोई रिस्पांस नहीं मिला। जब पूछो तो जवाब मिलता है कि वर्क लोड कम होने पर एकाउंट खुल पाएंगे। -एनएन मिश्रा
जिन श्रमिकों का एकाउंट है, उनके एकाउंट में सैलरी ट्रांसफर कर दी जाती है, जिनका एकाउंट नहीं है, उन्हीें को दिक्कत हो रही है। अधिकांश श्रमिकों का एकाउंट बाहरी जनपदों का है, इससे भी परेशानी हो रही है।- निरंकार सिंह
- बैंक खुले, लगी लाइन, नहीं मिला कैश
मंगलवार को सरकारी छुट्टी के बाद बुधवार को जब बैंक खुले तो लोगों की भीड़ बढ़ गई। कई बैंकों के बाहर नो कैश का बोर्ड लगा था जबकि कुछ बैंकों में एक से दो घंटे के अंदर ही कैश खत्म हो गया। यूनियन बैंक की किसी भी शाखा में कैश नहीं मिल रहा है।
एसबीआई के चीफ मैनेजर पीके झा के मुताबिक बैंक के पास जितना कैश था, उसे अन्य ब्रांचों में बांट दिया गया। अगर बुधवार रात तक आरबीआई से कैश नहीं आया तो दिक्कत शुरू हो जाएगी।
फिलहाल कैश की किल्लत को देखते हुए ग्राहकों को 10 हजार रुपये ही दिए जा रहे हैं। इलाहाबाद बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, देना बैंक, एक्सिस बैंक, एचडीएफसी बैंक, आईडीबीआई बैंक, सिंडिकेट बैंक, पीएनबी समेत सभी बैंकों के पास पर्याप्त मात्रा में कैश नहीं है।
- अव्यवस्था से बचने के लिए बैंक अपना रहे टोकन सिस्टम
लोगों की भीड़ को देखते हुए अधिकांश बैंक टोकन सिस्टम अपना रहे हैं। बैंक ऑफ बड़ौदा, केनरा बैंक, एसबीआई, पीएनबी, इंडियन ओवरसीज बैंक , यूनियन बैंक टोकन सिस्टम के जरिए ही ग्राहकों को कैश दे रहे हैं।
केनरा बैंक के चीफ मैनेजर वीपी सिंह के मुताबिक जितना कैश मिलता है, उसके अनुसार टोकन दिया जाता है। तकरीबन 100 से 125 लोगों कोटोकन दिए जा रहे हैं।
- दर्द-ए-कतार
कैश न मिलने पर लोगों का सब्र का बांध अब टूट रहा है। हालत यह है कि अब तक बैंकों ने जितना कैश बांटा है, वो मार्केट में पूरा नहीं आया है। ज्यादातर लोग खर्चों में कटौती कर रहे हैं। माह के शुरुआत में कैश की कमी से घरों में भी परेशानी खड़ी हो गई है। कई छोटे खर्चे कैश से ही पूरे किए जाते हैं।
- बोले लोग
रोजाना बैंक और एटीएम के बाहर लाइन लगाना अब मुश्किल हो गया है। सब काम छोड़ कर सिर्फ रुपये निकालने के लिए लाइन लगानी पड़ रही है। - नंद किशोर, प्रताप विहार
रुपये न होने से सब काम रुक जाता है। आना-जाना हो या कोई सामान खरीदना हो। सभी काम के लिए कैश चाहिए और बैंक पर लाइन लगाने के बाद भी कैश नहीं मिलता। - प्रवीन, विजय नगर
घर के छोटे कामों के लिए पैसे की जरूरत पड़ती है। नौकरानी चेक नहीं ले रही है, उसे कैश ही चाहिए, इससे दिक्कत है। - इंदू अरोड़ा, लोहिया नगर