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वारदात होते ही अब 20 मिनट में पहुंचेगी पुलिस

Tue, 20 Dec 2016 12:37 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला /गाजियाबाद
ब्यूरो, अमर उजाला /गाजियाबाद Updated Tue, 20 Dec 2016 12:37 AM IST
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As soon as the police arrive at the scene 20 minutes now
यूपी 100 - फोटो : अमर उजाला
अमेरिकी पुलिस की तर्ज पर काम करने वाली यूपी-100 सेवा का सोमवार दोपहर शुभारंभ कर दिया गया। पुलिस लाइंस में एमएलसी राकेश यादव और एसएसपी दीपक कुमार ने हरी झंडी दिखाकर 16 पुलिस रेस्पांस व्हीकल (पीआरवी) फील्ड में उतारीं। इन गाड़ियों का रेस्पांस टाइम 15-20 मिनट रहेगा।
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कुल 64 पीआरवी गाजियाबाद में आनी हैं, बाकी गाड़ियां भी जल्द ही मिल जाएंगी। सोमवार को एक और पीआरवी को फील्ड में उतारा जाना था, मगर किसी कारण से वह समय पर गाजियाबाद नहीं पहुंच सकी। यह सेवा पूरी तरह से सात जनवरी से वर्किंग में आएगी। इस योजना की ट्रेनिंग के लिए विभाग के 240 पुलिसकर्मियों को ट्रेनिंग दी जा चुकी है। 
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एसएसपी ने बताया कि यह राज्य स्तरीय पुलिस इमरजेंसी प्रणाली है। इस सेवा के शुरू होने के बाद अगर 100 नंबर पर सूचना दी जाएगी तो वह गाजियाबाद पुलिस कंट्रोल रूम में न जाकर सीधे लखनऊ स्थित मॉडर्न कंट्रोल रूम में जाएगी। वहां से पीआरवी को सूचना दी जाएगी।
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पीआरवी 15-20 मिनट के अंदर मौके पर पहुंच जाएगी और इसका फीडबैक भी लखनऊ दिया जाएगा। जरूरत पड़ने पर पीआरवी पर तैनात पुलिसकर्मी स्थानीय पुलिस की मदद लेंगे। उन्होंने बताया कि अमेरिका में भी इसी तर्ज पर कंट्रोल रूम पुलिस काम करती है।

पीआरवी पर फिलहाल तीन पुलिसकर्मी एचसीपी, सिपाही और ड्राइवर रहेंगे। इस पर एक उपनिरीक्षक को भी तैनात किए जाने की योजना है। इस मौके पर एमएलसी राकेश यादव ने कहा कि यूपी-100 योजना मुख्यमंत्री की प्राथमिकताओं में शामिल है। पुलिसिंग को बेहतर बनाने के लिए यूपी सरकार और मुख्यमंत्री का सराहनीय प्रयास है।

जीपीएस से होगी मॉनिटरिंग, एक लाख लैंडमार्क किए चिन्हित
 पुलिस रेस्पांस व्हीकल (पीआरवी) जीपीएस से लैस होंगे। इनके ड्यूटी प्वाइंट और लोकेशन की मॉनिटरिंग लखनऊ से की जाएगी। इसमें वायरलेस सिस्टम के अलावा मिनी स्क्रीन, म्यूजिक सिस्टम, फर्स्ट एड बॉक्स, स्टॉपर आदि हैं।

स्क्रीन पर सूचना देने वाले की फोटो, उसका नंबर और लोकेशन शो होगी। साथ ही घटनास्थल का लैंडमार्क भी गूगल मैप केजरिए दिखेगा, ताकि तुरंत मौके पर पहुंचा जा सके। इसके अलावा कोई फर्जी सूचना देगा तो उसका पता करना भी आसान होगा।

एसएसपी ने बताया कि गाजियाबाद में एक लाख लैंडमार्क चिन्हित किए जा चुके हैं, जिन्हें लखनऊ स्थित मॉर्डन कंट्रोल रूम के सॉफ्टवेयर में फीड किया हुआ है। इसके अलावा एक मोबाइल एप (यूपी-100) भी तैयार किया गया है। यह यूपी-100 इमरजेंसी सर्विस के नाम से गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड किया जा सकता है।

इससे भी सूचना दी जा सकेगी। यह गाड़ी होगी तब लाल लाइट, अगर किसी सूचना पर पीड़ित को लेकर चल रही है तो नीली लाइट हूटर के साथ जलेगी। अगर कहीं झगड़े, मारपीट, बलवे और मुठभेड़ की सूचना है तो हरी लाइट जलाते हुए जाएगी। उन्होंने बताया कि गाजियाबाद के कंट्रोल रूम से अटैच 71 पीसीआर पूर्व की भांति चलती रहेंगी। 

सिटी सर्विलांस सिस्टम: राजनगर एक्सटेंशन का हुआ निरीक्षण
 पुराने कंट्रोल रूम के लिए सिटी सर्विलांस सिस्टम भी अगले साल जनवरी माह से अमली जामा पहनने लगेगा। सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने के लिए राजनगर एक्सटेंशन का पुलिस अधिकारी निरीक्षण कर चुकेहैं।


एसएसपी ने बताया कि सीसीटीवी के सालाना मेंटेनेंस के लिए मेयर से भी बात की गई है। बता दें कि गाजियाबाद में सिविल डिफेंस की मदद से 1000 सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने हैं। हालांकि पहले से भी 133 सीसीटीवी कैमरे गाजियाबाद में लगे हुए हैं, लेकिन मेंटेनेंस न होने के कारण वे दो साल से बंद पड़े हैं।
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