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Ghaziabad News: किसान दिवस में ऊर्जा निगम पर फूटा गुस्सा, अधिशासी अभियंता पर 21 हजार का जुर्माना
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मोदीनगर। किसानों की शिकायतें सुनने पहुंचे जिलाधिकारी के सामने ऊर्जा निगम की कार्यशैली की पोल खुल गई। ग्रामीणों ने बिजली कनेक्शन के लिए परेशान करने, समस्याओं की सुनवाई नहीं होने और शिकायतों का फर्जी निस्तारण करने के आरोप लगाए। जिलाधिकारी रविंद्र मांदड़ ने ऊर्जा निगम के अधिशासी अभियंता धर्मेंद्र कुमार से इन शिकायतों पर जवाब मांगा तो वह संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए।
इस पर जिलाधिकारी ने उन्हें फटकार लगाई और 21 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। साथ ही ऊर्जा निगम के एमडी और शासन स्तर पर पत्राचार करने के निर्देश दिए। बुधवार को पहली बार जिला मुख्यालय के बजाय तलहैटा गांव में किसान दिवस आयोजित किया गया। इसमें ऊर्जा निगम, लोक निर्माण विभाग और गन्ना विभाग से जुड़ी शिकायतें प्रमुखता से उठीं।
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अधिकारी से मिलने के लिए भी बनवानी पड़ती है पर्ची
किसान दिवस में ग्रामीणों ने ऊर्जा निगम के खिलाफ सबसे ज्यादा नाराजगी जताई। उन्होंने जिलाधिकारी को बताया कि बिजली कनेक्शन लेने में परेशानी होती है। समस्याओं के समाधान के लिए अधिशासी अभियंता धर्मेंद्र कुमार से मिलने तक के लिए पर्ची बनवानी पड़ती है। इसके बावजूद कई बार वह बिना मिले ही चले जाते हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि ऊर्जा निगम शिकायतों का वास्तविक समाधान करने के बजाय उनका फर्जी तरीके से निस्तारण कर देता है। शिकायतों पर अधिशासी अभियंता से जवाब मांगा गया तो वह ग्रामीणों के आरोपों पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे सके। जिलाधिकारी ने बताया कि अभियंता को अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया था, लेकिन वह शिकायतों के संबंध में कुछ नहीं बता पाए। इसे लापरवाही मानते हुए जुर्माना लगाया गया है।
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जिला गन्ना अधिकारी ने ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक को भेज दिया
जिलाधिकारी के निर्देश के बावजूद जिला गन्ना अधिकारी किसान दिवस में नहीं पहुंचे। उन्होंने अपनी जगह ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक को भेज दिया। इस पर जिलाधिकारी ने नाराजगी जताते हुए अधिकारी के अनुपस्थित रहने के संबंध में रिपोर्ट मांगी। किसानों के साथ भारतीय किसान यूनियन और रालोद के नेताओं ने भी जिला गन्ना अधिकारी के नहीं पहुंचने पर नाराजगी जाहिर की। इस दौरान किसानों ने मोदी शुगर मिल पर बकाया ब्याज का मुद्दा उठाया और दिवाली से पहले भुगतान कराने की मांग की। जिलाधिकारी ने चीनी मिल पर किसानों की बकाया ब्याज राशि 21.65 करोड़ रुपये का भुगतान दिवाली से पहले सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए, ताकि किसानों को उनका बकाया समय से मिल सके।
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गन्ना पेराई सत्र से पहले सड़कें दुरुस्त करने की मांग
किसान दिवस में करीब 27 शिकायतों पर अधिकारियों से प्रगति की जानकारी ली गई। इनमें अधिकांश शिकायतें जर्जर सड़कों से संबंधित थीं। सौंदा, सारा, अमराला, फरीदनगर और भोजपुर समेत कई गांवों की सड़कों की खराब हालत का मुद्दा उठाया गया। किसानों ने गन्ना पेराई सत्र शुरू होने से पहले सड़कों की मरम्मत कराने की मांग की। जिलाधिकारी ने लोक निर्माण विभाग, ग्राम पंचायत और जिला पंचायत के अधिकारियों को दिवाली से पहले संबंधित सड़कों को गड्ढामुक्त करने के निर्देश दिए।
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10 महीने से चल रहा धरना खत्म, सर्विस लेन बनाने का आश्वासन
किसान दिवस के बाद जिलाधिकारी तलहैटा में मेरठ एक्सप्रेसवे के पांचवें चरण के तहत सर्विस लेन की मांग को लेकर चल रहे धरने पर पहुंचे। यहां दिसंबर 2025 से किसान धरना दे रहे थे। शुरुआत में किसानों ने एक्सप्रेसवे के पांचवें चरण के कार्य में उतरने का स्थान देने की मांग उठाई थी। बाद में उन्होंने खरखौदा तक सर्विस लेन बनाने की मांग शुरू कर दी। धरनास्थल पर जिलाधिकारी ने किसानों से बातचीत की। उन्होंने कहा कि लोगों की परेशानी को देखते हुए यहां सर्विस लेन का निर्माण कराया जाएगा। इसके लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) से बात की जाएगी। जिलाधिकारी के आश्वासन के बाद 10 महीने से चल रहा धरना समाप्त हो गया।
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इस पर जिलाधिकारी ने उन्हें फटकार लगाई और 21 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। साथ ही ऊर्जा निगम के एमडी और शासन स्तर पर पत्राचार करने के निर्देश दिए। बुधवार को पहली बार जिला मुख्यालय के बजाय तलहैटा गांव में किसान दिवस आयोजित किया गया। इसमें ऊर्जा निगम, लोक निर्माण विभाग और गन्ना विभाग से जुड़ी शिकायतें प्रमुखता से उठीं।
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अधिकारी से मिलने के लिए भी बनवानी पड़ती है पर्ची
किसान दिवस में ग्रामीणों ने ऊर्जा निगम के खिलाफ सबसे ज्यादा नाराजगी जताई। उन्होंने जिलाधिकारी को बताया कि बिजली कनेक्शन लेने में परेशानी होती है। समस्याओं के समाधान के लिए अधिशासी अभियंता धर्मेंद्र कुमार से मिलने तक के लिए पर्ची बनवानी पड़ती है। इसके बावजूद कई बार वह बिना मिले ही चले जाते हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि ऊर्जा निगम शिकायतों का वास्तविक समाधान करने के बजाय उनका फर्जी तरीके से निस्तारण कर देता है। शिकायतों पर अधिशासी अभियंता से जवाब मांगा गया तो वह ग्रामीणों के आरोपों पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे सके। जिलाधिकारी ने बताया कि अभियंता को अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया था, लेकिन वह शिकायतों के संबंध में कुछ नहीं बता पाए। इसे लापरवाही मानते हुए जुर्माना लगाया गया है।
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जिला गन्ना अधिकारी ने ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक को भेज दिया
जिलाधिकारी के निर्देश के बावजूद जिला गन्ना अधिकारी किसान दिवस में नहीं पहुंचे। उन्होंने अपनी जगह ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक को भेज दिया। इस पर जिलाधिकारी ने नाराजगी जताते हुए अधिकारी के अनुपस्थित रहने के संबंध में रिपोर्ट मांगी। किसानों के साथ भारतीय किसान यूनियन और रालोद के नेताओं ने भी जिला गन्ना अधिकारी के नहीं पहुंचने पर नाराजगी जाहिर की। इस दौरान किसानों ने मोदी शुगर मिल पर बकाया ब्याज का मुद्दा उठाया और दिवाली से पहले भुगतान कराने की मांग की। जिलाधिकारी ने चीनी मिल पर किसानों की बकाया ब्याज राशि 21.65 करोड़ रुपये का भुगतान दिवाली से पहले सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए, ताकि किसानों को उनका बकाया समय से मिल सके।
गन्ना पेराई सत्र से पहले सड़कें दुरुस्त करने की मांग
किसान दिवस में करीब 27 शिकायतों पर अधिकारियों से प्रगति की जानकारी ली गई। इनमें अधिकांश शिकायतें जर्जर सड़कों से संबंधित थीं। सौंदा, सारा, अमराला, फरीदनगर और भोजपुर समेत कई गांवों की सड़कों की खराब हालत का मुद्दा उठाया गया। किसानों ने गन्ना पेराई सत्र शुरू होने से पहले सड़कों की मरम्मत कराने की मांग की। जिलाधिकारी ने लोक निर्माण विभाग, ग्राम पंचायत और जिला पंचायत के अधिकारियों को दिवाली से पहले संबंधित सड़कों को गड्ढामुक्त करने के निर्देश दिए।
10 महीने से चल रहा धरना खत्म, सर्विस लेन बनाने का आश्वासन
किसान दिवस के बाद जिलाधिकारी तलहैटा में मेरठ एक्सप्रेसवे के पांचवें चरण के तहत सर्विस लेन की मांग को लेकर चल रहे धरने पर पहुंचे। यहां दिसंबर 2025 से किसान धरना दे रहे थे। शुरुआत में किसानों ने एक्सप्रेसवे के पांचवें चरण के कार्य में उतरने का स्थान देने की मांग उठाई थी। बाद में उन्होंने खरखौदा तक सर्विस लेन बनाने की मांग शुरू कर दी। धरनास्थल पर जिलाधिकारी ने किसानों से बातचीत की। उन्होंने कहा कि लोगों की परेशानी को देखते हुए यहां सर्विस लेन का निर्माण कराया जाएगा। इसके लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) से बात की जाएगी। जिलाधिकारी के आश्वासन के बाद 10 महीने से चल रहा धरना समाप्त हो गया।