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Ghaziabad News: एंबुलेंस चालक ने घायल को दिल्ली ले जाने से किया था इनकार, नौकरी से हटाने की संस्तुति
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उजाला इंपैक्ट
- एमएमजी पहुंचाने के बाद वाहन में खून लगा होने की बात कहकर मरीज को नहीं ले गया, इलाज के दौरान हुई थी मौत
गाजियाबाद। ट्रेन हादसे में गंभीर रूप से घायल युवक को एमएमजी अस्पताल से दिल्ली ले जाने से इनकार करने वाले 108 एंबुलेंस के चालक अवधेश को नौकरी से हटाने की संस्तुति की गई है। जांच में चालक की लापरवाही सामने आने के बाद इसके लिए एंबुलेंस सेवा संचालित करने वाली कंपनी अवर ग्रीन को पत्र भेजा गया है। अमर उजाला ने 27 अगस्त को ‘लहूलुहान व्यवस्था से हार गई जिंदगी’ शीर्षक से खबर प्रकाशित कर मामले को उजागर किया था। इसके बाद सीएमओ ने जांच के आदेश दिए थे।
एंबुलेंस के नोडल अधिकारी ज्ञानेंद्र मिश्रा ने बताया कि जांच में चालक की लापरवाही सामने आई है। बिहार निवासी अक्षय कुमार मथुरा घूमने के बाद नोएडा में अपनी विवाहित बहन के पास पहुंचे थे। 25 अगस्त को बिहार जाने के लिए वह आनंद विहार स्टेशन पहुंचे, लेकिन ट्रेन छूट गई। इसके बाद 26 अगस्त की सुबह दूसरी ट्रेन से बिहार के लिए रवाना हुए। चंद्रनगर हॉल्ट के पास ट्रेन से गिरने से अक्षय गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे में उनका एक पैर घुटने के नीचे से कट गया था, जबकि दूसरे पैर में भी गंभीर चोट आई थी।
स्थानीय लोगों की सूचना पर 108 एंबुलेंस मौके पर पहुंची और चालक अवधेश उन्हें सुबह 9:40 बजे एमएमजी अस्पताल की इमरजेंसी में लेकर पहुंचा। उस समय उनके साथ कोई पुलिसकर्मी नहीं था। अस्पताल में डॉक्टरों ने तत्काल उपचार शुरू किया, लेकिन अत्यधिक रक्तस्राव और गंभीर चोटों के कारण अक्षय की हालत बिगड़ती गई।
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स्थिति गंभीर होने पर इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर ने उन्हें दिल्ली के अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। ईएमओ ने 108 एंबुलेंस सेवा से संपर्क कर उन्हें दिल्ली पहुंचाने की व्यवस्था करने को कहा। आरोप है कि इसके लिए उसी चालक से संपर्क किया गया, जिसने अक्षय को एमएमजी पहुंचाया था। चालक ने एंबुलेंस के अंदर खून लगा होने की बात कहते हुए घायल को दिल्ली ले जाने से इनकार कर दिया। इसके बाद इमरजेंसी में इलाज के दौरान अक्षय की मौत हो गई।
सीएमओ डॉ. सचिन चंद्र वैश्य ने बताया कि मामले की जांच में चालक दोषी पाया गया है। उसे एंबुलेंस सेवा से हटाने के लिए संचालित करने वाली कंपनी अवर ग्रीन को पत्र भेजा गया है।
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- एमएमजी पहुंचाने के बाद वाहन में खून लगा होने की बात कहकर मरीज को नहीं ले गया, इलाज के दौरान हुई थी मौत
गाजियाबाद। ट्रेन हादसे में गंभीर रूप से घायल युवक को एमएमजी अस्पताल से दिल्ली ले जाने से इनकार करने वाले 108 एंबुलेंस के चालक अवधेश को नौकरी से हटाने की संस्तुति की गई है। जांच में चालक की लापरवाही सामने आने के बाद इसके लिए एंबुलेंस सेवा संचालित करने वाली कंपनी अवर ग्रीन को पत्र भेजा गया है। अमर उजाला ने 27 अगस्त को ‘लहूलुहान व्यवस्था से हार गई जिंदगी’ शीर्षक से खबर प्रकाशित कर मामले को उजागर किया था। इसके बाद सीएमओ ने जांच के आदेश दिए थे।
एंबुलेंस के नोडल अधिकारी ज्ञानेंद्र मिश्रा ने बताया कि जांच में चालक की लापरवाही सामने आई है। बिहार निवासी अक्षय कुमार मथुरा घूमने के बाद नोएडा में अपनी विवाहित बहन के पास पहुंचे थे। 25 अगस्त को बिहार जाने के लिए वह आनंद विहार स्टेशन पहुंचे, लेकिन ट्रेन छूट गई। इसके बाद 26 अगस्त की सुबह दूसरी ट्रेन से बिहार के लिए रवाना हुए। चंद्रनगर हॉल्ट के पास ट्रेन से गिरने से अक्षय गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे में उनका एक पैर घुटने के नीचे से कट गया था, जबकि दूसरे पैर में भी गंभीर चोट आई थी।
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स्थानीय लोगों की सूचना पर 108 एंबुलेंस मौके पर पहुंची और चालक अवधेश उन्हें सुबह 9:40 बजे एमएमजी अस्पताल की इमरजेंसी में लेकर पहुंचा। उस समय उनके साथ कोई पुलिसकर्मी नहीं था। अस्पताल में डॉक्टरों ने तत्काल उपचार शुरू किया, लेकिन अत्यधिक रक्तस्राव और गंभीर चोटों के कारण अक्षय की हालत बिगड़ती गई।
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स्थिति गंभीर होने पर इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर ने उन्हें दिल्ली के अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। ईएमओ ने 108 एंबुलेंस सेवा से संपर्क कर उन्हें दिल्ली पहुंचाने की व्यवस्था करने को कहा। आरोप है कि इसके लिए उसी चालक से संपर्क किया गया, जिसने अक्षय को एमएमजी पहुंचाया था। चालक ने एंबुलेंस के अंदर खून लगा होने की बात कहते हुए घायल को दिल्ली ले जाने से इनकार कर दिया। इसके बाद इमरजेंसी में इलाज के दौरान अक्षय की मौत हो गई।
सीएमओ डॉ. सचिन चंद्र वैश्य ने बताया कि मामले की जांच में चालक दोषी पाया गया है। उसे एंबुलेंस सेवा से हटाने के लिए संचालित करने वाली कंपनी अवर ग्रीन को पत्र भेजा गया है।