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Ghaziabad News: अस्पताल में रिश्वतखोरी का आरोप, किसानों ने किया प्रदर्शन
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गाजियाबाद। महिला अस्पताल में चिकित्सकों पर मरीजों को निजी अस्पताल में रेफर कर मोटा कमीशन लेने का आरोप लगाते हुए भारतीय किसान यूनियन कृषक शक्ति ने मंगलवार को प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में भ्रष्टाचार चरम पर है और गरीबों के साथ खुला खिलवाड़ हो रहा है। संगठन ने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
भारतीय किसान यूनियन कृषक शक्ति के जिलाध्यक्ष गजय ठाकुर अपने समर्थकों के साथ महिला अस्पताल पहुंचे और गेट पर प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि 22 सितंबर को प्रताप विहार निवासी प्रिंस कुमार की पत्नी शालू रानी को महिला अस्पताल में भर्ती कराया था। लेकिन ड्यूटी पर मौजूद डॉ. सुषमा शर्मा ने बिना किसी स्पष्ट कारण के शाम 4:30 बजे मरीज को निजी अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। जहां शालू का प्रसव हुआ और परिवार पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ गया।
गजय ठाकुर ने आरोप लगाया कि महिला अस्पताल में डॉक्टर और आशा कार्यकर्ताओं की मिलीभगत से यह खेल लंबे समय से चल रहा है। गरीब मरीजों को जानबूझकर बिना इलाज के निजी अस्पतालों में भेजा जा रहा है जहां से कमीशन लिया जाता है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक मामला नहीं है बल्कि ऐसी कई शिकायतें संगठन को मिली हैं। प्रदर्शनकारियों ने अस्पताल प्रशासन पर मिलीभगत का भी आरोप लगाया और मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
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महिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. अभिषेक त्रिपाठी ने बताया कि मामले को गंभीरता से लिया गया है और मुख्य चिकित्सा अधिकारी की अध्यक्षता में किसी तीसरे पक्ष से जांच कराने की सिफारिश की गई है। इस संबंध में सीएमओ को पत्र भेजा गया है और जल्द ही जांच प्रक्रिया शुरू होगी।
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भारतीय किसान यूनियन कृषक शक्ति के जिलाध्यक्ष गजय ठाकुर अपने समर्थकों के साथ महिला अस्पताल पहुंचे और गेट पर प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि 22 सितंबर को प्रताप विहार निवासी प्रिंस कुमार की पत्नी शालू रानी को महिला अस्पताल में भर्ती कराया था। लेकिन ड्यूटी पर मौजूद डॉ. सुषमा शर्मा ने बिना किसी स्पष्ट कारण के शाम 4:30 बजे मरीज को निजी अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। जहां शालू का प्रसव हुआ और परिवार पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ गया।
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गजय ठाकुर ने आरोप लगाया कि महिला अस्पताल में डॉक्टर और आशा कार्यकर्ताओं की मिलीभगत से यह खेल लंबे समय से चल रहा है। गरीब मरीजों को जानबूझकर बिना इलाज के निजी अस्पतालों में भेजा जा रहा है जहां से कमीशन लिया जाता है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक मामला नहीं है बल्कि ऐसी कई शिकायतें संगठन को मिली हैं। प्रदर्शनकारियों ने अस्पताल प्रशासन पर मिलीभगत का भी आरोप लगाया और मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
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महिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. अभिषेक त्रिपाठी ने बताया कि मामले को गंभीरता से लिया गया है और मुख्य चिकित्सा अधिकारी की अध्यक्षता में किसी तीसरे पक्ष से जांच कराने की सिफारिश की गई है। इस संबंध में सीएमओ को पत्र भेजा गया है और जल्द ही जांच प्रक्रिया शुरू होगी।