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रावण दहन के दौरान तीन सौ के करीब पहुंचा एक्यूआई
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रावण दहन होते ही 300 के पार पहुंचा एक्यूआई
साहिबाबाद (गाजियाबाद)। दशहरा पर मंगलवार को रावण के पुतले दहन के दौरान प्रदूषण का स्तर बढ़ गया। एक्यूआई रात करीब 11 बजे 300 माइक्रो प्रति घन मीटर के ऊपर पहुंच गया। कई घंटे बाद प्रदूषण स्तर में कमी आई। जब से मौसम में ठंडक बढ़नी शुरू हुई है, तब से प्रदूषण के स्तर में बढ़ोतरी हो रही है।
गाजियाबाद में प्रदूषण मापने के लिए चार जगह वसुंधरा, इंदिरापुरम, संजय नगर और लोनी में मशीनें लगी हैं। इन मशीनों से मंगलवार को मिले आंकड़ों के अनुसार मंगलवार को रावण दहन से कुछ घंटे पहले जहां प्रदूषण का स्तर कम था वह रात 11 बजे करीब अचानक से बढ़ गया। संजय नगर को छोड़कर सभी जगहों पर पीएम दस का स्तर कई गुना ज्यादा हो गया। इंदिरापुरम में पीएम दस का स्तर रात करीब 11 बजे 243 दर्ज किया गया। वसुंधरा में पीएम दस करीब 311 प्रति घन मीटर रहा, जबकि शाम सात बजे के करीब यह सामान्य स्थिति के पास रहा। इंदिरापुरम में 112 था, जबकि वसुंधरा में पीएम दस 104 था। वहीं संजय नगर में पीएम दस में ज्यादा बढ़ोतरी देखने को नहीं मिली। रात करीब नौ बजे पीएम दस का अधिकतम स्तर 172 दर्ज किया गया।
लोनी में भी 135 से 293 पहुंचा पीएम 10 का स्तर
लोनी में भी मंगलवार को दशहरा के दिन रात में प्रदूषण के स्तर में इजाफा हुआ। पीएम 10 का स्तर शाम करीब छह बजे 135 था जो कि बढ़कर रात करीब 294 तक जा पहुंचा। यहां पर बुधवार को भी प्रदूषण स्तर में कमी देखने को नहीं मिली। सुबह नौ बजे करीब पीएम दस 353 तक जा पहुंचा। 12 बजे के बाद प्रदूण स्तर में कमी देखने को मिली। वहीं दिल्ली एनसीआर में लोनी सबसे प्रदूषित रहा। यहां पर एक्यूआई 196 रहा। जबकि गाजियाबाद में एक्यूआई- 168 दर्ज किया गया। जबकि नोएडा में एक्यूआई 170 और दिल्ली में 166 दर्ज किया गया।
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पिछले वर्ष के मुकाबले कम रहा शहर का एक्यूआई
वर्ष 2018 में दशहरा के दिन शहर का एक्यूआई रेड जोन में था। इस दिन शहर का एक्यूआई- 314 दर्ज किया गया था, जो कि मानकों से करीब तीन गुना अधिक था। इस बार दशहरा पर प्रदूषण स्तर में पिछले वर्ष के मुकाबले कमी आई। शहर का एक्यूआई 175 के करीब दर्ज किया गया, जो कि मानकों से करीब डेढ़ गुना ही अधिक है। इस बार एक्यूआई येलो जोन में है।
बढ़ता प्रदूषण कर सकता है बीमार
प्रदूषण का स्तर बढ़ने से लोगों को बीमारियां घेर सकती है। हवा में जहरीली गैसें और नैनो पार्टिकल्स सांस के जरिये हमारे ब्लड तक पहुंच जाते हैं। इससे दिल की बीमारी, स्ट्रोक और अस्थमा अटैक आ सकता है। साथ ही सांस लेने में तकलीफ होना, आंखें लाल होना और खुजली के साथ जलन होना जैसी समस्याएं हो सकती हैं। बार बार जुकाम होना, खांसी, साइनस, माइग्रेन, के साथ ही फेफड़ों में दिक्कत शुरू हो जाती है।
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साहिबाबाद (गाजियाबाद)। दशहरा पर मंगलवार को रावण के पुतले दहन के दौरान प्रदूषण का स्तर बढ़ गया। एक्यूआई रात करीब 11 बजे 300 माइक्रो प्रति घन मीटर के ऊपर पहुंच गया। कई घंटे बाद प्रदूषण स्तर में कमी आई। जब से मौसम में ठंडक बढ़नी शुरू हुई है, तब से प्रदूषण के स्तर में बढ़ोतरी हो रही है।
गाजियाबाद में प्रदूषण मापने के लिए चार जगह वसुंधरा, इंदिरापुरम, संजय नगर और लोनी में मशीनें लगी हैं। इन मशीनों से मंगलवार को मिले आंकड़ों के अनुसार मंगलवार को रावण दहन से कुछ घंटे पहले जहां प्रदूषण का स्तर कम था वह रात 11 बजे करीब अचानक से बढ़ गया। संजय नगर को छोड़कर सभी जगहों पर पीएम दस का स्तर कई गुना ज्यादा हो गया। इंदिरापुरम में पीएम दस का स्तर रात करीब 11 बजे 243 दर्ज किया गया। वसुंधरा में पीएम दस करीब 311 प्रति घन मीटर रहा, जबकि शाम सात बजे के करीब यह सामान्य स्थिति के पास रहा। इंदिरापुरम में 112 था, जबकि वसुंधरा में पीएम दस 104 था। वहीं संजय नगर में पीएम दस में ज्यादा बढ़ोतरी देखने को नहीं मिली। रात करीब नौ बजे पीएम दस का अधिकतम स्तर 172 दर्ज किया गया।
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लोनी में भी 135 से 293 पहुंचा पीएम 10 का स्तर
लोनी में भी मंगलवार को दशहरा के दिन रात में प्रदूषण के स्तर में इजाफा हुआ। पीएम 10 का स्तर शाम करीब छह बजे 135 था जो कि बढ़कर रात करीब 294 तक जा पहुंचा। यहां पर बुधवार को भी प्रदूषण स्तर में कमी देखने को नहीं मिली। सुबह नौ बजे करीब पीएम दस 353 तक जा पहुंचा। 12 बजे के बाद प्रदूण स्तर में कमी देखने को मिली। वहीं दिल्ली एनसीआर में लोनी सबसे प्रदूषित रहा। यहां पर एक्यूआई 196 रहा। जबकि गाजियाबाद में एक्यूआई- 168 दर्ज किया गया। जबकि नोएडा में एक्यूआई 170 और दिल्ली में 166 दर्ज किया गया।
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पिछले वर्ष के मुकाबले कम रहा शहर का एक्यूआई
वर्ष 2018 में दशहरा के दिन शहर का एक्यूआई रेड जोन में था। इस दिन शहर का एक्यूआई- 314 दर्ज किया गया था, जो कि मानकों से करीब तीन गुना अधिक था। इस बार दशहरा पर प्रदूषण स्तर में पिछले वर्ष के मुकाबले कमी आई। शहर का एक्यूआई 175 के करीब दर्ज किया गया, जो कि मानकों से करीब डेढ़ गुना ही अधिक है। इस बार एक्यूआई येलो जोन में है।
बढ़ता प्रदूषण कर सकता है बीमार
प्रदूषण का स्तर बढ़ने से लोगों को बीमारियां घेर सकती है। हवा में जहरीली गैसें और नैनो पार्टिकल्स सांस के जरिये हमारे ब्लड तक पहुंच जाते हैं। इससे दिल की बीमारी, स्ट्रोक और अस्थमा अटैक आ सकता है। साथ ही सांस लेने में तकलीफ होना, आंखें लाल होना और खुजली के साथ जलन होना जैसी समस्याएं हो सकती हैं। बार बार जुकाम होना, खांसी, साइनस, माइग्रेन, के साथ ही फेफड़ों में दिक्कत शुरू हो जाती है।