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चक्रव्यूह नाटक ने दिलाई वीर योद्धा की याद
ब्यूरो/ अमर उजाला गाजियाबाद
Updated Mon, 24 Oct 2016 12:35 AM IST
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नाटक का मंचन कराते कलाकार
- फोटो : अमर उजाला
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हिंदी भवन समिति द्वारा रविवार को दिनेश चंद्र गर्ग सभागार में नाटक का मंचन कराया गया। दि फिल्म एंड थियेटर सोसायटी दिल्ली द्वारा महाभारत काल के वीर अभिमन्यु द्वारा चक्रव्यूह तोड़ने के प्रसंग का मंचन किया गया।
चक्रव्यूह शीर्षक नाटक में अतुल सत्य कौशिक के निर्देशन में कलाकारों ने हिंदी भवन केमंच पर अपने अभिनय से प्रसंग को जीवंत बना दिया। कृष्ण की भूमिका में मंचन कर रहे नीतिश भारद्वाज ने संदेश दिया कि यह जीवन एक महाभारत है और प्रत्येक व्यक्ति यहां अभिमन्यु है।
महाभारत काल में अभिमन्यु को मारने वाले सात योद्धा उसके अपने परिजन ही थे। वर्तमान में मनुष्य रूपी अभिमन्यु का लोभ, क्रोध, ईर्ष्या, छल आदि दुर्गुण पतन करते हैं। कहानी के मंचन में कलाकारों ने महाभारत काल के उस अंश को दर्शाया जिसमें युद्ध के मैदान में कौरवों द्वारा चक्रव्यूह तैयार कर लिया गया था।
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इस चक्रव्यूह को तोड़ने वाले अर्जुन मैदान से बहुत दूर थे, जिसकी अनुपस्थिति में अभिमन्यु जिसे चक्रव्यूह तोड़ने का अधूरा ज्ञान था वह इस चक्रव्यूह को तोड़ने के लिए आगे बढ़ता है। चक्रव्यूह से बाहर निकलने का ज्ञान न होने के कारण और कौरवों द्वारा गलत युद्ध नीति से वीर अभिमन्यु को मारने का जीवंत मंचन कर कलाकारों ने तालियां बटोरीं।
अभिमन्यु के अभिनय ने नाटक देख रहे कई लोगों की आंखें नम कर दीं। कार्यक्रम को सफल बनाने में हिंदी भवन के अध्यक्ष सतीश चंद गोयल, योगेश गर्ग, ललित जायसवाल आदि का विशेष सहयोग रहा। कार्यक्रम का संचालन पूनम शर्मा ने किया।
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चक्रव्यूह शीर्षक नाटक में अतुल सत्य कौशिक के निर्देशन में कलाकारों ने हिंदी भवन केमंच पर अपने अभिनय से प्रसंग को जीवंत बना दिया। कृष्ण की भूमिका में मंचन कर रहे नीतिश भारद्वाज ने संदेश दिया कि यह जीवन एक महाभारत है और प्रत्येक व्यक्ति यहां अभिमन्यु है।
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महाभारत काल में अभिमन्यु को मारने वाले सात योद्धा उसके अपने परिजन ही थे। वर्तमान में मनुष्य रूपी अभिमन्यु का लोभ, क्रोध, ईर्ष्या, छल आदि दुर्गुण पतन करते हैं। कहानी के मंचन में कलाकारों ने महाभारत काल के उस अंश को दर्शाया जिसमें युद्ध के मैदान में कौरवों द्वारा चक्रव्यूह तैयार कर लिया गया था।
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इस चक्रव्यूह को तोड़ने वाले अर्जुन मैदान से बहुत दूर थे, जिसकी अनुपस्थिति में अभिमन्यु जिसे चक्रव्यूह तोड़ने का अधूरा ज्ञान था वह इस चक्रव्यूह को तोड़ने के लिए आगे बढ़ता है। चक्रव्यूह से बाहर निकलने का ज्ञान न होने के कारण और कौरवों द्वारा गलत युद्ध नीति से वीर अभिमन्यु को मारने का जीवंत मंचन कर कलाकारों ने तालियां बटोरीं।
अभिमन्यु के अभिनय ने नाटक देख रहे कई लोगों की आंखें नम कर दीं। कार्यक्रम को सफल बनाने में हिंदी भवन के अध्यक्ष सतीश चंद गोयल, योगेश गर्ग, ललित जायसवाल आदि का विशेष सहयोग रहा। कार्यक्रम का संचालन पूनम शर्मा ने किया।