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Ghaziabad News: जुबां के चटखारे पेट पर भारी
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गाजियाबाद। चटपटे और मसालेदार खाने का शौक युवाओं और किशोरों की सेहत पर भारी पड़ रहा है। स्वाद के चक्कर में फास्टफूड, तली-भुनी चीजों और बाहर के खाने को प्राथमिकता देने से पेट संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं। पेट दर्द, गैस, एसिडिटी और अपच जैसी शिकायतों के साथ बड़ी संख्या में मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं। जिला एमएमजी अस्पताल में पेट संबंधी समस्याओं से पीड़ित रोजाना 150 से 200 मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। एमएमजी अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. संतराम वर्मा का कहना है कि अनियमित खानपान और जरूरत से ज्यादा तला-भुना व मसालेदार भोजन करने से पेट संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। युवा और किशोर अक्सर भूख लगने पर पौष्टिक भोजन के बजाय पिज्जा, बर्गर, चाउमीन, मोमोज और चिप्स जैसे खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता देते हैं। लंबे समय तक ऐसी खानपान संबंधी आदतें बने रहने से पाचन संबंधी परेशानियां हो सकती हैं।
उन्होंने बताया कि पेट को स्वस्थ रखने के लिए समय पर भोजन करना, पर्याप्त पानी पीना और संतुलित आहार लेना जरूरी है। लगातार पेट दर्द, उल्टी या अन्य परेशानी हो रही है तो चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।
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संतुलित और पौष्टिक आहार की जरूरत
संयुक्त अस्पताल की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अर्चना सिंह का कहना है कि किशोरावस्था में शरीर का तेजी से विकास होता है। इस दौरान बच्चों को संतुलित और पौष्टिक आहार की जरूरत होती है। फास्टफूड और पैकेटबंद खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन करने से शरीर में जरूरी पोषक तत्वों और फाइबर की कमी हो सकती है। उन्होंने कहा कि अभिभावकों को बच्चों की खानपान संबंधी आदतों पर ध्यान देना चाहिए। उन्हें घर का ताजा भोजन, फल, सब्जियां और दालें खाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) और राष्ट्रीय पोषण संस्थान (एनआईएन) की ओर से वर्ष 2024 में जारी भारतीयों के लिए आहार संबंधी दिशा-निर्देशों में भी अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों तथा अधिक वसा, चीनी और नमक वाले भोजन का सेवन कम करने की सलाह दी गई है।
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उन्होंने बताया कि पेट को स्वस्थ रखने के लिए समय पर भोजन करना, पर्याप्त पानी पीना और संतुलित आहार लेना जरूरी है। लगातार पेट दर्द, उल्टी या अन्य परेशानी हो रही है तो चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।
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संतुलित और पौष्टिक आहार की जरूरत
संयुक्त अस्पताल की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अर्चना सिंह का कहना है कि किशोरावस्था में शरीर का तेजी से विकास होता है। इस दौरान बच्चों को संतुलित और पौष्टिक आहार की जरूरत होती है। फास्टफूड और पैकेटबंद खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन करने से शरीर में जरूरी पोषक तत्वों और फाइबर की कमी हो सकती है। उन्होंने कहा कि अभिभावकों को बच्चों की खानपान संबंधी आदतों पर ध्यान देना चाहिए। उन्हें घर का ताजा भोजन, फल, सब्जियां और दालें खाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) और राष्ट्रीय पोषण संस्थान (एनआईएन) की ओर से वर्ष 2024 में जारी भारतीयों के लिए आहार संबंधी दिशा-निर्देशों में भी अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों तथा अधिक वसा, चीनी और नमक वाले भोजन का सेवन कम करने की सलाह दी गई है।
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