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सेना भर्ती घोटाले में पूर्व थल सेनाध्यक्ष ने दी गवाही
Updated Fri, 19 Jan 2018 01:33 AM IST
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सेना भर्ती घोटाले केस में पूर्व थल सेनाध्यक्ष ने दी गवाही
गाजियाबाद। सेना भर्ती घोटाले से जुड़े एक मामले में पूर्र्व थल सेनाध्यक्ष जनरल वेद प्रकाश मलिक की बृहस्पतिवार को यहां की सीबीआई कोर्ट में गवाही हुई। कोर्ट में उन्होंने स्वीकार किया कि वर्ष 1993 में आगरा से जुड़े सेना भर्ती केस में तत्कालीन दो हवलदारों के खिलाफ केस चलने की इजाजत दी गई थी। यह इजाजत उन्होंने 2000 में सेनाध्यक्ष के पद पर रहते दी थी। मामले की अगली सुनवाई के लिए 22 जनवरी को होगी।
सीबीआई के वरिष्ठ लोक अभियोजक कुलदीप पुष्कर ने बताया कि आगरा के ब्रांच रिक्रूटमेंट ऑफिस (बीआरओ) में तत्कालीन कर्नल जगजीत सिंह की देखरेख में 26 मई 1991 को सेना भर्ती की परीक्षा हुई थी। उत्तर पुस्तिकाएं जांच के लिए लखनऊ भेजी गईं। सभी उत्तर पुस्तिकाओं में एक जैसी हैंड राइटिंग पाई गई। शक होने पर सेना ने इसकी जांच इलाहाबाद में तैनात कर्नल अहलावत से कराने का निर्देश दिया, जिन्होंने पाया कि सभी ने अधिकतम अंक हासिल किए। उनकी संस्तुति पर सेना भर्ती की दोबारा परीक्षा हुई, जिसमें अधिकतम अंक पाने वाले परीक्षार्थी फेल हो गए। इसके बाद सीबीआई की देहरादून शाखा ने जांच कर पांच नवंबर 1993 को ब्रिगेडियर जगजीत सिंह, सूबेदार हरी चंद, हवलदार क्लर्क अशोक शर्मा के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। सीबीआई ने पांच जुलाई 2000 को कोर्ट में चार्जशीट पेश की, जिसमें जगजीत सिंह की पत्नी उषा बेदी, बेटी भारती बेदी, हवलदार (क्लर्क) वीरभान समेत 22 अभ्यर्थियों को आरोपी बनाया गया। इसी मामले में पंचकूला हरियाणा निवासी पूर्र्व थल सेनाध्यक्ष जनरल वेद प्रकाश मलिक गवाही देने आए थे।
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गाजियाबाद। सेना भर्ती घोटाले से जुड़े एक मामले में पूर्र्व थल सेनाध्यक्ष जनरल वेद प्रकाश मलिक की बृहस्पतिवार को यहां की सीबीआई कोर्ट में गवाही हुई। कोर्ट में उन्होंने स्वीकार किया कि वर्ष 1993 में आगरा से जुड़े सेना भर्ती केस में तत्कालीन दो हवलदारों के खिलाफ केस चलने की इजाजत दी गई थी। यह इजाजत उन्होंने 2000 में सेनाध्यक्ष के पद पर रहते दी थी। मामले की अगली सुनवाई के लिए 22 जनवरी को होगी।
सीबीआई के वरिष्ठ लोक अभियोजक कुलदीप पुष्कर ने बताया कि आगरा के ब्रांच रिक्रूटमेंट ऑफिस (बीआरओ) में तत्कालीन कर्नल जगजीत सिंह की देखरेख में 26 मई 1991 को सेना भर्ती की परीक्षा हुई थी। उत्तर पुस्तिकाएं जांच के लिए लखनऊ भेजी गईं। सभी उत्तर पुस्तिकाओं में एक जैसी हैंड राइटिंग पाई गई। शक होने पर सेना ने इसकी जांच इलाहाबाद में तैनात कर्नल अहलावत से कराने का निर्देश दिया, जिन्होंने पाया कि सभी ने अधिकतम अंक हासिल किए। उनकी संस्तुति पर सेना भर्ती की दोबारा परीक्षा हुई, जिसमें अधिकतम अंक पाने वाले परीक्षार्थी फेल हो गए। इसके बाद सीबीआई की देहरादून शाखा ने जांच कर पांच नवंबर 1993 को ब्रिगेडियर जगजीत सिंह, सूबेदार हरी चंद, हवलदार क्लर्क अशोक शर्मा के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। सीबीआई ने पांच जुलाई 2000 को कोर्ट में चार्जशीट पेश की, जिसमें जगजीत सिंह की पत्नी उषा बेदी, बेटी भारती बेदी, हवलदार (क्लर्क) वीरभान समेत 22 अभ्यर्थियों को आरोपी बनाया गया। इसी मामले में पंचकूला हरियाणा निवासी पूर्र्व थल सेनाध्यक्ष जनरल वेद प्रकाश मलिक गवाही देने आए थे।
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