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जीएसटी से ‘सेरेमिक कैपिटल’ में छाया सन्नाटा
Updated Mon, 31 Jul 2017 10:19 PM IST
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जीएसटी से ‘सेरेमिक कैपिटल’ में छाया सन्नाटा
- उद्यमियों को नहीं मिल रहे आर्डर, स्टोर में लगा जमा माल का ढेर
- पॉटरी नगरी से तीन महाद्वीप समेत 25 देशों को निर्यात होते हैं उत्पाद
अमर उजाला ब्यूरो
खुर्जा।
दुनिया की सेरेमिक कैपिटल नाम से मशहूर खुर्जा से तीन महाद्वीप समेत 25 देशों को सेरेमिक उत्पाद निर्यात किए जाते हैं। पूर्व में नोटबंदी से जहां पॉटरी उद्योग में मंदी छा गई थी, वहीं जीएसटी लागू होने से उद्योग को तगड़ा झटका लगा है। पॉटरी उद्यमियों की मानें तो जीएसटी के बाद पूरे बाजार में सन्नाटा सा छा गया है। गोदामों में तकरीबन दो से तीन माह का माल तैयार,है। लेकिन आर्डर नहीं मिलने से उद्यमी परेशान हैं।
खुर्जा की पॉटरी नगरी से रूस, आस्ट्रेलिया, यूरोप महाद्वीप समेत कनाडा, बांग्लादेश, ब्राजील, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, मालदीव, पाकिस्तान, ब्रिटेन, इटली, इजराइल, सऊदी अरब, फिलिपींस, रूस, दक्षिण अफ्रीका, नामीबिया, नाइजीरिया, हंगरी, वियतनाम, पोलैंड को सेरेमिक उत्पाद निर्यात होते हैं। पॉटरी उद्यमी दर्शन छतवाल ने बताया कि जीएसटी लागू होने के बाद पॉटरी उद्योग के निर्यात में कमी आई है। दो से तीन माह का माल गोदामों में तैयार पड़ा है, लेकिन अब तक आर्डर नहीं आ रहे हैं। इसके चलते पॉटरी उद्योग नुकसान हो रहा है। पॉटरी उद्यमी संजीव बंसल ने बताया कि जीएसटी के फायदे तीन से पांच माह के बाद नजर आने लगेंगे। पॉटरी उद्यमी राजीव बंसल ने बताया कि जीएसटी से सबसे ज्यादा नुकसान टैक्स चोरी करने वाले उद्यमियाें को होगा, ईमानदारी से टैक्स देने वाले पॉटरी उद्यमी को कोई खासा फर्क नहीं पडे़गा। नया माल न बनने के कारण लेबर के सामने भी भूखों मरने की नौबत आ गई है। पॉटरी उद्यमी सत्यप्रकाश दादू ने बताया कि फिरोजाबाद के मशहूर कांच उद्योग पर टैक्स घटाया गया, जबकि विश्व प्रसिद्ध खुर्जा के पॉटरी उद्योग पर केंद्र ने टैक्स बढ़ाते हुए पार्ट्स के साथ सौतेला रवैया अपनाया है। हाल ही में पॉटरी उद्यमियाें का एक दल केंद्र सरकार के कुछ अफसरों से टैक्स कम करने के सिलसिले में मिला है।
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- उद्यमियों को नहीं मिल रहे आर्डर, स्टोर में लगा जमा माल का ढेर
- पॉटरी नगरी से तीन महाद्वीप समेत 25 देशों को निर्यात होते हैं उत्पाद
अमर उजाला ब्यूरो
खुर्जा।
दुनिया की सेरेमिक कैपिटल नाम से मशहूर खुर्जा से तीन महाद्वीप समेत 25 देशों को सेरेमिक उत्पाद निर्यात किए जाते हैं। पूर्व में नोटबंदी से जहां पॉटरी उद्योग में मंदी छा गई थी, वहीं जीएसटी लागू होने से उद्योग को तगड़ा झटका लगा है। पॉटरी उद्यमियों की मानें तो जीएसटी के बाद पूरे बाजार में सन्नाटा सा छा गया है। गोदामों में तकरीबन दो से तीन माह का माल तैयार,है। लेकिन आर्डर नहीं मिलने से उद्यमी परेशान हैं।
खुर्जा की पॉटरी नगरी से रूस, आस्ट्रेलिया, यूरोप महाद्वीप समेत कनाडा, बांग्लादेश, ब्राजील, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, मालदीव, पाकिस्तान, ब्रिटेन, इटली, इजराइल, सऊदी अरब, फिलिपींस, रूस, दक्षिण अफ्रीका, नामीबिया, नाइजीरिया, हंगरी, वियतनाम, पोलैंड को सेरेमिक उत्पाद निर्यात होते हैं। पॉटरी उद्यमी दर्शन छतवाल ने बताया कि जीएसटी लागू होने के बाद पॉटरी उद्योग के निर्यात में कमी आई है। दो से तीन माह का माल गोदामों में तैयार पड़ा है, लेकिन अब तक आर्डर नहीं आ रहे हैं। इसके चलते पॉटरी उद्योग नुकसान हो रहा है। पॉटरी उद्यमी संजीव बंसल ने बताया कि जीएसटी के फायदे तीन से पांच माह के बाद नजर आने लगेंगे। पॉटरी उद्यमी राजीव बंसल ने बताया कि जीएसटी से सबसे ज्यादा नुकसान टैक्स चोरी करने वाले उद्यमियाें को होगा, ईमानदारी से टैक्स देने वाले पॉटरी उद्यमी को कोई खासा फर्क नहीं पडे़गा। नया माल न बनने के कारण लेबर के सामने भी भूखों मरने की नौबत आ गई है। पॉटरी उद्यमी सत्यप्रकाश दादू ने बताया कि फिरोजाबाद के मशहूर कांच उद्योग पर टैक्स घटाया गया, जबकि विश्व प्रसिद्ध खुर्जा के पॉटरी उद्योग पर केंद्र ने टैक्स बढ़ाते हुए पार्ट्स के साथ सौतेला रवैया अपनाया है। हाल ही में पॉटरी उद्यमियाें का एक दल केंद्र सरकार के कुछ अफसरों से टैक्स कम करने के सिलसिले में मिला है।
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