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बड़े प्लाट बचने को लेकर जीडीए का मास्टर प्लान
Updated Thu, 20 Jul 2017 06:34 PM IST
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बड़े भूखंडों को छोटे-छोटे टुकड़ों में बेचेगा जीडीए
तमाम जतन के बाद भी जीडीए की संपत्तियां नीलाम नहीं हो पा रही हैं। खासकर बड़े भूखंडाें के खरीदने वाले नहीं मिल रहे। ऐसे में जीडीए ने अब बड़े भूखंडों को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटकर बेचने की योजना बनाई है।
जीडीए वीसी कंचन वर्मा के निर्देश पर योजना पर काम शुरू हो गया है। अब अगर जीडीए की योजना परवान चढ़ गई तो उससे अथॉरिटी को कई सौ करोड़ की आमदनी होगी।
ग्रुप हाउंसिंग, मॉल-मल्टीप्लेक्स, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, होटल, अस्पताल व अन्य प्रतिष्ठानों के लिए आवासीय क्षेत्रों में भूखंड छोड़े गए थे, लेकिन तमाम कोशिशों के बाद भी नीलामी में इनको कोई खरीददार नहीं मिले।
प्रॉपर्टी बाजार में मंदी भी है और भूखंड बड़ा होने से मोटा पैसा खर्च करने को कोई तैयार नहीं। कुछ लोगों ने खरीद ने लिए बोली भी लगाई तो बाद में अपना पैसा रिफंड भी करा लिया। मंगलवार को 35 प्लाट नीलामी के लिए रखे गए थे लेकिन कोई खरीदने वाला नहीं मिला।
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जीडीए जिन प्लाटों को बेचना चाहता है वो सभी 15 हजार वर्ग मीटर से अधिक की भूमि वाले हैं। अब खरीददार न मिलने पर जीडीए ने फैसला लिया है कि सभी प्लाटों को छोटे-छोटे भूखंडों में बदल दिया जाए। उसके बाद उन्हें बेच रखा जाए। जीडीए को उम्मीद है कि को बेचना आसान रहेगा। क्योंकि उसकी कीमतें कम रहेंगी।
अवैध अतिक्रमण गिराने के लिए बुधवार को आरडीसी जीडीए ने अभियान चलाया। जीडीए सचिव रवींद्र गोडबोले के निर्देश पर प्रवर्तन विभाग की टीम ने अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई की।
सहायक अभियंता मुकेश राघव ने बताया है कि आरडीसी में ग्रीन बेल्ट की जमीन पर अस्थाई रूप से कब्जा कर लिया था जिसे हटाने के लिए नोटिस भी दिया गया था लेकिन संबंधी लोगों ने अतिक्रमण नहीं हटाया। ऐसे में बुधवार को जीडीए सचिव के निर्देश पर ग्रीन बेल्ट से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई। पुलिस फोर्स के साथ प्रवर्तन दस्ते ने अस्थाई रूप से लगाए गए ठेलों को भी हटवाया।
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तमाम जतन के बाद भी जीडीए की संपत्तियां नीलाम नहीं हो पा रही हैं। खासकर बड़े भूखंडाें के खरीदने वाले नहीं मिल रहे। ऐसे में जीडीए ने अब बड़े भूखंडों को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटकर बेचने की योजना बनाई है।
जीडीए वीसी कंचन वर्मा के निर्देश पर योजना पर काम शुरू हो गया है। अब अगर जीडीए की योजना परवान चढ़ गई तो उससे अथॉरिटी को कई सौ करोड़ की आमदनी होगी।
ग्रुप हाउंसिंग, मॉल-मल्टीप्लेक्स, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, होटल, अस्पताल व अन्य प्रतिष्ठानों के लिए आवासीय क्षेत्रों में भूखंड छोड़े गए थे, लेकिन तमाम कोशिशों के बाद भी नीलामी में इनको कोई खरीददार नहीं मिले।
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प्रॉपर्टी बाजार में मंदी भी है और भूखंड बड़ा होने से मोटा पैसा खर्च करने को कोई तैयार नहीं। कुछ लोगों ने खरीद ने लिए बोली भी लगाई तो बाद में अपना पैसा रिफंड भी करा लिया। मंगलवार को 35 प्लाट नीलामी के लिए रखे गए थे लेकिन कोई खरीदने वाला नहीं मिला।
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जीडीए जिन प्लाटों को बेचना चाहता है वो सभी 15 हजार वर्ग मीटर से अधिक की भूमि वाले हैं। अब खरीददार न मिलने पर जीडीए ने फैसला लिया है कि सभी प्लाटों को छोटे-छोटे भूखंडों में बदल दिया जाए। उसके बाद उन्हें बेच रखा जाए। जीडीए को उम्मीद है कि को बेचना आसान रहेगा। क्योंकि उसकी कीमतें कम रहेंगी।
अवैध अतिक्रमण गिराने के लिए बुधवार को आरडीसी जीडीए ने अभियान चलाया। जीडीए सचिव रवींद्र गोडबोले के निर्देश पर प्रवर्तन विभाग की टीम ने अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई की।
सहायक अभियंता मुकेश राघव ने बताया है कि आरडीसी में ग्रीन बेल्ट की जमीन पर अस्थाई रूप से कब्जा कर लिया था जिसे हटाने के लिए नोटिस भी दिया गया था लेकिन संबंधी लोगों ने अतिक्रमण नहीं हटाया। ऐसे में बुधवार को जीडीए सचिव के निर्देश पर ग्रीन बेल्ट से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई। पुलिस फोर्स के साथ प्रवर्तन दस्ते ने अस्थाई रूप से लगाए गए ठेलों को भी हटवाया।