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मधुबन बापूधाम आरओबी कंस्ट्रक्शन डिजाइन को नहीं मिली अनुमति
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मधुबन बापूधाम आरओबी कंस्ट्रक्शन डिजाइन को नहीं मिली अनुमति
गाजियाबाद। मधुबन बापूधाम में प्रस्तावित रेलवे ओवर ब्रिज (आरओबी) के निर्माण की आखिरी रुकावट अभी दूर नहीं हुई है। आरओबी के प्रोजेक्ट को इसी हफ्ते एनओसी मिल जाएगी, लेकिन प्रोजेक्ट के कंस्ट्रक्शन डिजाइन को रेलवे की अनुमति नहीं मिल सकी है। ऐसे में आरओबी में रेलवे का हिस्सा कौन बनाएगा, इस पर अभी फैसला नहीं हो पाया है। जीडीए ने डिजाइन को मंजूरी देने के बाबत रेलवे को पत्र भेजा है।
पहले आरओबी का निर्माण जीडीए की ओर से सेतु निगम से कराए जाने और रेलवे का हिस्सा भी सेतु निगम से कराए जाने की बात शामिल थी। रेलवे की ओर से केवल निर्माण की मॉनीटरिंग करने की बात थी। बता दें कि जीडीए की ओर से मधुबन बापूधाम योजना की दिल्ली-मेरठ हाईवे से सीधी कनेक्टिविटी देने के लिए आरओबी का निर्माण किया जा रहा है। आरओबी के निर्माण के लिए अवस्थापना निधि से 20 करोड़ का बजट पास हो चुका है। इस आरओबी के निर्माण से नॉदर्न पेरिफेरल-वे के जरिए एनएच-9 व दिल्ली-मेरठ हाईवे आपस में जुड़ जाएंगे। साथ ही इससे गोविंदपुरम, स्वर्णजयंतीपुरम, शास्त्रीनगर, हरसांव और हापुड़ से आने वाले लोगों को भी लाभ होगा।
आरओबी की 45 मीटर चौड़ाई और 500 मीटर लंबाई है। रेलवे ने पहले आरओबी के ठीक नीचे अंडरपास निर्माण की शर्त लगाई थी, जिसे प्राधिकरण के तकनीकी पहलुओं व अधिक लागत की बात करने से हटा दिया गया। आरओबी के नीचे हल्के वाहनों की आवाजाही के लिए केवल गेट होगा। आरओबी का कंस्ट्रक्शन डिजाइन को मंजूरी के बाद साफ हो जाएगा, कि रेलवे अपने वाले हिस्से का निर्माण करेगा या फिर इसका जिम्मा जीडीए को सौंपेगा। जीडीए मुख्य अभियंता विवेकानंद सिंह ने बताया कि मधुबन बापूधाम आरओबी के कंस्ट्रक्शन डिजाइन पर समहति देने के लिए रेलवे को फिर से पत्र लिखा गया है।
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गाजियाबाद। मधुबन बापूधाम में प्रस्तावित रेलवे ओवर ब्रिज (आरओबी) के निर्माण की आखिरी रुकावट अभी दूर नहीं हुई है। आरओबी के प्रोजेक्ट को इसी हफ्ते एनओसी मिल जाएगी, लेकिन प्रोजेक्ट के कंस्ट्रक्शन डिजाइन को रेलवे की अनुमति नहीं मिल सकी है। ऐसे में आरओबी में रेलवे का हिस्सा कौन बनाएगा, इस पर अभी फैसला नहीं हो पाया है। जीडीए ने डिजाइन को मंजूरी देने के बाबत रेलवे को पत्र भेजा है।
पहले आरओबी का निर्माण जीडीए की ओर से सेतु निगम से कराए जाने और रेलवे का हिस्सा भी सेतु निगम से कराए जाने की बात शामिल थी। रेलवे की ओर से केवल निर्माण की मॉनीटरिंग करने की बात थी। बता दें कि जीडीए की ओर से मधुबन बापूधाम योजना की दिल्ली-मेरठ हाईवे से सीधी कनेक्टिविटी देने के लिए आरओबी का निर्माण किया जा रहा है। आरओबी के निर्माण के लिए अवस्थापना निधि से 20 करोड़ का बजट पास हो चुका है। इस आरओबी के निर्माण से नॉदर्न पेरिफेरल-वे के जरिए एनएच-9 व दिल्ली-मेरठ हाईवे आपस में जुड़ जाएंगे। साथ ही इससे गोविंदपुरम, स्वर्णजयंतीपुरम, शास्त्रीनगर, हरसांव और हापुड़ से आने वाले लोगों को भी लाभ होगा।
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आरओबी की 45 मीटर चौड़ाई और 500 मीटर लंबाई है। रेलवे ने पहले आरओबी के ठीक नीचे अंडरपास निर्माण की शर्त लगाई थी, जिसे प्राधिकरण के तकनीकी पहलुओं व अधिक लागत की बात करने से हटा दिया गया। आरओबी के नीचे हल्के वाहनों की आवाजाही के लिए केवल गेट होगा। आरओबी का कंस्ट्रक्शन डिजाइन को मंजूरी के बाद साफ हो जाएगा, कि रेलवे अपने वाले हिस्से का निर्माण करेगा या फिर इसका जिम्मा जीडीए को सौंपेगा। जीडीए मुख्य अभियंता विवेकानंद सिंह ने बताया कि मधुबन बापूधाम आरओबी के कंस्ट्रक्शन डिजाइन पर समहति देने के लिए रेलवे को फिर से पत्र लिखा गया है।
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