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अर्थला झील के मामले में फंस सकते हैं निगम के पूर्व अधिकारी
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अर्थला झील के मामले में फंस सकते हैं निगम के पूर्व अधिकारी
गाजियाबाद। अर्थला झील की जमीन पर हुए अवैध निर्माण की गाज अब नगर निगम में तैनात रहे पूर्व अफसरों पर भी गिर सकती है। नगर आयुक्त के निर्देश पर अब प्रापर्टी विभाग रिपोर्ट तैयार कर रहा है कि झील की जमीन पर कब्जा कब-कब हुआ और उस समय निगम में कौन अफसर तैनात थे। इसकी रिपोर्ट शासन को भी भेजी जाएगी।
झील की जमीन पर अवैध निर्माण को लेकर एनजीटी का रुख सख्त है। एनजीटी ने सभी निर्माण ध्वस्त कर झील की जमीन खाली कराने के आदेश डीएम और नगर निगम को दिए हैं। एनजीटी ने डीएम को अब तक की गई कार्रवाई की रिपोर्ट के साथ तलब किया है। ऐसे में अधिकारियों में हड़कंप मचा है। शासन तक इस मामले की गूंज पहुंच चुकी है। इसके चलते अब नगर आयुक्त दिनेश चंद्र ने संपत्ति अधिकारी व अपर नगरायुक्त आरएन पांडेय को उन अधिकारियों की सूची तैयार कराने को कहा है जिनके कार्यकाल में झील की जमीन पर कब्जे हुए हैं। असल में वही अधिकारी अवैध निर्माण के जिम्मेदार हैं।
हाईकोर्ट के आदेश पर आंकी गई थी भवनों की आयु
पूर्व में इलाहाबाद हाईकोर्ट में गाजियाबाद के एक व्यक्ति ने याचिका दाखिल कर अर्थला झील पर अवैध कब्जों का मुद्दा उठाया था। करीब चार साल पूर्व हाईकोर्ट ने भी सभी अवैध निर्माण हटाने के निर्देश दिए थे। हाईकोर्ट ने नगर निगम से उन अधिकारियों के नाम भी मांगे थे, जिनके कार्यकाल में झील की जमीन पर कब्जे हुए। अधिकारियों के नाम तय करने के लिए नगर निगम और जिला प्रशासन ने पीडब्ल्यूडी के इंजीनियरों से झील की जमीन पर बने मकानों की जांच कराई थी। उन्होंने जांच के आधार पर मकान की आयु का निर्धारण कराया। इसके आधार पर जिम्मेदार अधिकारियों के नाम तय किए गए थे। बावजूद इसके कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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अर्थला में जमीन बेचने वालों को भूमाफिया घोषित कराएगा निगम
अर्थला में झील की जमीन बेेचने वालों की मुश्किलें बढ़ सकती है। नगर निगम ने अभी तक जमीन बेचने वाले 35 लोगों को चिह्नित कर लिया है। निगम अधिकारी डीएम को रिपोर्ट भेजकर इन लोगों को भूमाफिया घोषित कराने की तैयारी कर रहा है। इन लोगों को भूमाफियाओं की सूची में डालने की कार्रवाई जल्द ही हो सकती है।
25 अन्य लोगों के खिलाफ दर्ज हो सकती है एफआईआर
नगर निगम का संपत्ति विभाग साहिबाबाद थाने में 73 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा चुका है। इनमें से 35 लोग वह हैं, जिन्होंने झील की जमीन की रजिस्ट्री लोगों के नाम की है। 38 अन्य वह लोग हैं जिन्होंने झील की जमीन पर अवैध निर्माण किया है। नगर निगम का संपत्ति विभाग अन्य ऐसे लोगों को चिह्नित करने का काम कर रहा है, जिन्होंने झील की जमीन की रजिस्ट्री दूसरे लोगों को की है। इसके लिए नगर निगम ने जमीन पर काबिज लोगों से रजिस्ट्री के दस्तावेज लिए हैं।
अधिकारी बोले
इंटरनल जांच कराई जा रही है कि किन अधिकारियों के कार्यकाल में झील की जमीन पर कब्जे हुए। इन कब्जों को रोकने के लिए तत्कालीन संपत्ति अधिकारियों ने क्या कार्रवाई की। यह रिपोर्ट नगरायुक्त को सौंपी जाएगी। - आरएन पांडेय, अपर नगरायुक्त
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गाजियाबाद। अर्थला झील की जमीन पर हुए अवैध निर्माण की गाज अब नगर निगम में तैनात रहे पूर्व अफसरों पर भी गिर सकती है। नगर आयुक्त के निर्देश पर अब प्रापर्टी विभाग रिपोर्ट तैयार कर रहा है कि झील की जमीन पर कब्जा कब-कब हुआ और उस समय निगम में कौन अफसर तैनात थे। इसकी रिपोर्ट शासन को भी भेजी जाएगी।
झील की जमीन पर अवैध निर्माण को लेकर एनजीटी का रुख सख्त है। एनजीटी ने सभी निर्माण ध्वस्त कर झील की जमीन खाली कराने के आदेश डीएम और नगर निगम को दिए हैं। एनजीटी ने डीएम को अब तक की गई कार्रवाई की रिपोर्ट के साथ तलब किया है। ऐसे में अधिकारियों में हड़कंप मचा है। शासन तक इस मामले की गूंज पहुंच चुकी है। इसके चलते अब नगर आयुक्त दिनेश चंद्र ने संपत्ति अधिकारी व अपर नगरायुक्त आरएन पांडेय को उन अधिकारियों की सूची तैयार कराने को कहा है जिनके कार्यकाल में झील की जमीन पर कब्जे हुए हैं। असल में वही अधिकारी अवैध निर्माण के जिम्मेदार हैं।
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हाईकोर्ट के आदेश पर आंकी गई थी भवनों की आयु
पूर्व में इलाहाबाद हाईकोर्ट में गाजियाबाद के एक व्यक्ति ने याचिका दाखिल कर अर्थला झील पर अवैध कब्जों का मुद्दा उठाया था। करीब चार साल पूर्व हाईकोर्ट ने भी सभी अवैध निर्माण हटाने के निर्देश दिए थे। हाईकोर्ट ने नगर निगम से उन अधिकारियों के नाम भी मांगे थे, जिनके कार्यकाल में झील की जमीन पर कब्जे हुए। अधिकारियों के नाम तय करने के लिए नगर निगम और जिला प्रशासन ने पीडब्ल्यूडी के इंजीनियरों से झील की जमीन पर बने मकानों की जांच कराई थी। उन्होंने जांच के आधार पर मकान की आयु का निर्धारण कराया। इसके आधार पर जिम्मेदार अधिकारियों के नाम तय किए गए थे। बावजूद इसके कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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अर्थला में जमीन बेचने वालों को भूमाफिया घोषित कराएगा निगम
अर्थला में झील की जमीन बेेचने वालों की मुश्किलें बढ़ सकती है। नगर निगम ने अभी तक जमीन बेचने वाले 35 लोगों को चिह्नित कर लिया है। निगम अधिकारी डीएम को रिपोर्ट भेजकर इन लोगों को भूमाफिया घोषित कराने की तैयारी कर रहा है। इन लोगों को भूमाफियाओं की सूची में डालने की कार्रवाई जल्द ही हो सकती है।
25 अन्य लोगों के खिलाफ दर्ज हो सकती है एफआईआर
नगर निगम का संपत्ति विभाग साहिबाबाद थाने में 73 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा चुका है। इनमें से 35 लोग वह हैं, जिन्होंने झील की जमीन की रजिस्ट्री लोगों के नाम की है। 38 अन्य वह लोग हैं जिन्होंने झील की जमीन पर अवैध निर्माण किया है। नगर निगम का संपत्ति विभाग अन्य ऐसे लोगों को चिह्नित करने का काम कर रहा है, जिन्होंने झील की जमीन की रजिस्ट्री दूसरे लोगों को की है। इसके लिए नगर निगम ने जमीन पर काबिज लोगों से रजिस्ट्री के दस्तावेज लिए हैं।
अधिकारी बोले
इंटरनल जांच कराई जा रही है कि किन अधिकारियों के कार्यकाल में झील की जमीन पर कब्जे हुए। इन कब्जों को रोकने के लिए तत्कालीन संपत्ति अधिकारियों ने क्या कार्रवाई की। यह रिपोर्ट नगरायुक्त को सौंपी जाएगी। - आरएन पांडेय, अपर नगरायुक्त