आज स्थापना दिवसः और जवां हुआ गाजियाबाद, बना प्रदेश का गौरव
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मैं गाजियाबाद हूं। यूं तो मैं महाभारत काल में भी था, लेकिन 14 नवंबर 1976 को मुझे मेरठ से जुदा होकर अलग जिले के रूप में पहचान मिली। तत्कालीन मुख्यमंत्री एनडी तिवारी ने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के जन्मदिन पर यह अलग पहचान दी थी। अब धीरे-धीरे मैं 43 साल का हो गया हूं। इस सफर में मैंने विकास की राह पर हमेशा ही आगे कदम बढ़ाए हैं।
मुझे तरक्की की राह दिखाने में गाजियाबादियों के साथ यहां तैनात रहे कई अधिकारियों का भी योगदान रहा है। अपराध की राजधानी की पहचान की कालिख को पोंछकर मैने प्रदेश सरकार को सबसे ज्यादा राजस्व देने का रिकॉर्ड भी बनाया है। मेट्रो, देश में इकलौती सिंगल पिलर्स पर बनी एलिवेटेड रोड, मॉल्स-मल्टीप्लेक्स, एयरपोर्ट जैसी सुविधाएं देने के बाद अब देश में रैपिड रेल कॉरिडोर के रूप में जल्द ही मैं लोगों को नई सौगात दूंगा। यहां के उद्यमियों के सहयोग से मैंने तरक्की की ऐसी राह पकड़ी कि फिर मुड़कर नहीं देखा।
ढाई दशक में बदल गई पूरी तस्वीर
करीब दो दशक पूर्व गाजियाबाद में बहुमंजिला इमारतों का चलन नहीं था। जीडीए भी यहां एकल स्टोरी भवन या प्लाट वाली कॉलोनियां बसाता था। 1995 के बाद दिल्ली और आसपास में नौकरी पेशा लोगों की तादाद बढ़ी तो गाजियाबाद की आबादी भी तेजी से बढ़ी। इसके बाद यहां बहुमंजिला इमारतों का चलन बढ़ा। पहले जहां खेत-खलियान नजर आते थे, 2012 तक वहां आसमान में झांकती बहुमंजिला इमारतें नजर आने लगीं। राजनगर एक्सटेंशन, क्रॉसिंग्स रिपब्लिक, इंदिरापुरम, सिद्धार्थ विहार और अब एनएच-9 किनारे 200 से ज्यादा हाउसिंग सोसायटियां बस गई हैं।
गाजियाबाद से दिल्ली की दूरी हुई कम
एक दौर था जब गाजियाबाद में आबादी तो तेजी से बढ़ी, लेकिन संसाधनों में बढ़ोतरी नहीं हुई। वर्ष 2000 से 2012 तक यहां सड़कों पर भीषण जाम की स्थिति रहती थी। इसके बाद हिंडन नदी पर नए फ्लाईओवर के निर्माण, एलिवेटेड रोड और न्यू लिंक रोड के निर्माण और चौराहों व सड़कों के चौड़ीकरण ने गाजियाबाद की सूरत ही बदल दी। भविष्य की चिंता करने वाले अधिकारियों ने यहां कई बदलाव और नए प्रोजेक्टों की नींव रखी। देश की पहली सिंगल पिलर छह लेन एलिवेटेड रोड का निर्माण किया गया। इसने गाजियाबाद और दिल्ली की दूरी को कम कर दिया है। राजनगर एक्सटेंशन से यूपी गेट तक बनी एलिवेटेड रोड 228 पिलरों पर बनी है। इस पर करीब 1147 करोड़ रुपये खर्च हुए है। 10.30 किलोमीटर लंबी यह रोड अब गाजियाबाद की लाइफ लाइन बन चुकी है। अब गाजियाबाद से दिल्ली के बीच का सफर एक घंटे से घटकर महज 10 मिनट रह गया है।
एयरपोर्ट की मिली सौगात
मार्च 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गाजियाबाद में हिंडन एयर टर्मिनल की शुरुआत कर वेस्ट यूपी के लोगों को सौगात दी है। हालांकि एयरपोर्ट से पहली घरेलू उड़ान अक्तूबर में शुरू हुई। हैरिटेज कंपनी ने यहां से पिथौरागढ़ के लिए पहली उड़ान भरी। इसके बाद 6 नवंबर से कर्नाटक के हुबली के लिए हवाई सेवा शुरू की गई। यहां से हवाई सेवा शुरू होने से गाजियाबाद समेत आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों को हवाई यात्रा के लिए दिल्ली की दौड़ नहीं लगानी होगी। आने वाले दिनों में यहां से लखनऊ, देहरादून, शिमला के लिए भी हवाई सेवा शुरू की जाएगी। गाजियाबाद का नाम एयरपोर्ट वाले शहरों में शुमार हो गया है।
मेट्रो ने आसान किया लोगों का सफर
मार्च 2019 में शहीद नगर नया बस अड्डा से दिलशाद गार्डन तक शुरू हुई मेट्रो सेवा ने गाजियाबाद में रहने वाले लोगों की दिल्ली की राह आसान की है। पहले गाजियाबाद से दिलशाद गार्डन या दिल्ली पहुंचने में लोगों को एक से डेढ़ घंटा लगता था, अब मेट्रो के जरिए लोग 20 मिनट में वहां पहुंच जाते हैं। इसके साथ ही वैशाली से द्वारका रूट पर दौड़ रही मेट्रो भी टीएचए के लोगों की लाइफ लाइन बन चुकी है। रोजाना लाखों की संख्या में लोग वैशाली और कौशांबी से दिल्ली के लिए मेट्रो में सफर करते हैं। मेट्रो का संचालन शुरू होने से नौकरी पेशा और स्टूडेंट्स को सबसे ज्यादा फायदा हुआ है।
जाम का झाम, अब नहीं
एनएच-9 पर आए दिन लगने वाले जाम से लोगों को निजात मिली है। एनएचएआई की ओर से यूपी गेट से मेरठ तक दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे का निर्माण किया जा रहा है। एनएचआई ने मार्च में डासना से मेरठ तक का निर्माण पूरा करने का लक्ष्य तय किया है। चार लेन का हाइवे अब 14 लेन चौड़ा हो गया है। हालांकि कुछ जगह अभी निर्माण कार्य चल रहा है, लेकिन यहां भी जल्द ही काम पूरा हो जाएगा। हाइवे के चौड़ीकरण के बाद गाजियाबाद से दिल्ली, नोएडा, हापुड़, पिलखुवा जाने वाले वाहन चालकों को जाम की समस्या से काफी हद तक निजात मिली है।
सिटी फॉरेस्ट ने दी गाजियाबाद को अलग पहचान
करहेड़ा में राजनगर एक्सटेंशन के पास बना सिटी फॉरेस्ट ने गाजियाबाद को अलग पहचान दी है। जीडीए ने 150 एकड़ में सिटी फॉरेस्ट को विकसित किया हैं। जिसमें 11 पॉकेट बने हैं। जिसमें आम, जामुन, आंवला, औषद्यीय पौधों सहित अन्य प्रजातियों के पेड़ लगे हैं। हर पाकेट में झूले, बैठने के लिए बेंच, आकर्षक डिजाइन के पत्थर, साइकिलिंग ट्रैक, छोटी छोटी झील और तालाब, एडवेंचर जोन, किड्स जोन आदि हैं। यह शहर का प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है। यहां गाजियाबाद सहित आसपास क्षेत्र के लोग घूमने आते हैं।
और बेहतर होगा भविष्य, गाजियाबाद को मिलेंगे कई तोहफे
दिल्ली से मेरठ तक बन रहे दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे का निर्माण तेजी से चल रहा है। मार्च 2020 में यह बनकर तैयार हो जाएगा। इसके बाद दिल्ली से मेरठ का सफर और आसान हो जाएगा। यही नहीं दिल्ली से सहारनपुर, हरिद्वार, देहरादून जाने वाले लोगों को जाम के झाम से निजात मिल जाएगी।
लखनऊ समेत कई शहरों के लिए मिलेगी फ्लाइट
फिलहाल गाजियाबाद से हुबली और पिथौरागढ़ के लिए फ्लाइट शुरू हो गई। जल्द ही यहां से लखनऊ, देहरादून, शिमला समेत आठ शहरों के लिए उड़ान सेवा शुरू होगी। लोगों को फ्लाइट से सफर करने के लिए दिल्ली नहीं जाना पड़ेगा।
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400 करोड़ से पीपीपी मॉडल पर होगा सबसे खूबसूरत बस अड्डे का निर्माण
गाजियाबाद को एक साल में इंटर स्टेट बस अड्डे की सौगात मिलेगी। परिवहन निगम की तरफ से कौशांबी डिपो पर पीपीपी मॉडल के तहत अत्याधुनिक बस अड्डे का निर्माण कराया जाएगा। करीब 400 करोड़ रुपये की लागत से कौशांबी और साहिबाबाद डिपो पर बस अड्डे का निर्माण किया जाएगा। लखनऊ के अलाम बाग बस अड्डे पर बने अत्याधुनिक बस अड्डे की तर्ज पर यहां पर भी बस अड्डे बनेगा। जहां से कई राज्यों के लिए बस का संचालन किया जाएगा।
1900 करोड़ से नोएडा-मोहननगर मेट्रो कॉरिडोर बनेगा
नोएडा सेक्टर-62 से मोहन नगर तक मेट्रो कॉरिडोर का विस्तार होगा। मेट्रो के इस फेज-3 प्रोजेक्ट पर करीब 1900 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसके शुरू होने से इंदिरापुरम, वसुंधरा समेत गाजियाबाद के लोगों को फायदा मिलेगा। गाजियाबाद और नोएडा के बीच सफर आसान हो जाएगा।
मेडिकल टूरिज्म की ओर बढ़ रहा गाजियाबाद
अब बड़े अस्पतालों से जिला मेडिकल टूरिज्म के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ा है। देश के दूसरे शहरों से ही नहीं बल्कि विदेशों से लोग इलाज के लिए यहां आते हैं। यशोदा सुपर स्पेशिलिटी अस्पताल के एमडी डॉ. दिनेश अरोड़ा ने बताया कि जिले में सरकारी अस्पताल, शहर के अंदर कुछ मैटेरनिटी होम या नरेंद्र मोहन अस्पताल में ही लोग इलाज के लिए जाते थे। वर्तमान में जिले के अस्पताल अत्याधुनिक सुविधाओं के साथ मरीजों को वो इलाज दे रहे हैं, जिनके लिए मरीजों को दिल्ली या मुंबई का रुख करना पड़ता था। कैंसर का संपूर्ण इलाज अब यहां संभव है। इसके अलावा घुटना, कूल्हे का प्रत्यारोपण जैसी सर्जरी अस्पतालों में संभव हैं।
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औद्योगिक क्षेत्र में उतार-चढ़ाव के बीच बनाए रखी पहचान
गाजियाबाद के सामने औद्योगिक नगरी के तौर पर मिली पहचान को बरकरार रखने की चुनौती रही। जिले में 14 हजार से अधिक छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाईयां पंजीकृत हैं। करीब छह हजार अपंजीकृत इकाईयां संचालित हैं। वरिष्ठ उद्यमी हरविलास गुप्ता बताते हैं कि वर्ष 1961 से ही गाजियाबाद उद्योगों के तौर पर विकसित हो चुका था। जिले में पोएशा, स्वदेशी, श्रीराम, डीसीएम, जैन ट्यूब, अमृत स्टील, पंजाब ऑयल जैसे बड़े ग्रुप चल रहे थे। इनमें एक से डेढ़ हजार कर्मचारी भी काम करते थे। उन्होंने बताया कि जिले में एनसीआर के किसी भी शहर से उद्योग कम नहीं है। लोहा-स्टील उत्पादों में गाजियाबाद देश भर में अग्रणी भूमिका अदा कर रहा है।
देश-विदेश में चमके गाजियाबाद के सितारे
गाजियाबाद जिले से विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाने वाले कई सितारे देश-विदेश में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुके हैं। कला से लेकर खेल तक के क्षेत्र में गाजियाबाद ने देश को नायाब सितारे दिए हैं। क्रिकेटर सुरेश रैना, सुदीप त्यागी, इंडियन महिला क्रिकेट टीम की सदस्य रहीं सोनी यादव, जैवलिन थ्रोअर विपिन कसाना, पर्वतारोही सागर कसाना ने देश-विदेश में जिले का नाम रोशन किया है। इसके अलावा फिल्म एक्ट्रेस लारा दत्ता, लेखक शक्तिमान तलवार सहित अन्य रुपहले पर्दे पर जिले की आमद करा चुके हैं।