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Delhi NCR News: गीता-गोविंदा ने राधा-कृष्ण प्रेम से दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध
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- कमानी सभागार में भक्ति, प्रेम और आध्यात्मिकता का अनूठा संगम
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। कमानी सभागार में आयोजित दो दिवसीय नृत्य-नाट्य ‘गीता गोविंदा–जहां राधा हैं, वहां हरि हैं’ ने दर्शकों को भक्ति, प्रेम और आध्यात्मिकता के अद्भुत संगम से अभिभूत कर दिया। 12वीं शताब्दी के महान काव्य गीत गोविंद पर आधारित इस प्रस्तुति का निर्देशन शिवम साहनी ने किया, जिसे समकालीन शैली में प्रभावी ढंग से मंचित किया गया।
करीब 90 मिनट की इस प्रस्तुति में राधा, कृष्ण और सखी के माध्यम से प्रेम, विरह और मिलन की भावनाओं को सजीव किया गया। राधा की भूमिका में शिमरान जमान, कृष्ण के रूप में शिवम साहनी और सखी के रूप में केनिशा तांडवालिया ने अपने सशक्त अभिनय और अभिव्यक्ति से दर्शकों को भावविभोर कर दिया। इस नृत्य-नाट्य की खासियत यह रही कि मूल 24 में से 17 अष्टपदियों को समाहित करते हुए कथा को क्रमबद्ध रूप में प्रस्तुत किया गया, जो मंचन की दृष्टि से एक विरल प्रयोग माना जाता है। संगीत शुभा मुद्गल द्वारा रचित था, जिसने प्रस्तुति को गहरी भावात्मकता दी, जबकि साउंड डिजाइन साई श्रवणम ने संभाला। वहीं नृत्य-रचना निलावा सेन की रही, वहीं परिकल्पना, पटकथा और निर्देशन शिवम साहनी का था। परिधानों को संध्या रमन ने डिजाइन किया और आभूषण आर्ट कराट ने तैयार किए, जिससे प्रस्तुति का दृश्य सौंदर्य और भी आकर्षक बना।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। कमानी सभागार में आयोजित दो दिवसीय नृत्य-नाट्य ‘गीता गोविंदा–जहां राधा हैं, वहां हरि हैं’ ने दर्शकों को भक्ति, प्रेम और आध्यात्मिकता के अद्भुत संगम से अभिभूत कर दिया। 12वीं शताब्दी के महान काव्य गीत गोविंद पर आधारित इस प्रस्तुति का निर्देशन शिवम साहनी ने किया, जिसे समकालीन शैली में प्रभावी ढंग से मंचित किया गया।
करीब 90 मिनट की इस प्रस्तुति में राधा, कृष्ण और सखी के माध्यम से प्रेम, विरह और मिलन की भावनाओं को सजीव किया गया। राधा की भूमिका में शिमरान जमान, कृष्ण के रूप में शिवम साहनी और सखी के रूप में केनिशा तांडवालिया ने अपने सशक्त अभिनय और अभिव्यक्ति से दर्शकों को भावविभोर कर दिया। इस नृत्य-नाट्य की खासियत यह रही कि मूल 24 में से 17 अष्टपदियों को समाहित करते हुए कथा को क्रमबद्ध रूप में प्रस्तुत किया गया, जो मंचन की दृष्टि से एक विरल प्रयोग माना जाता है। संगीत शुभा मुद्गल द्वारा रचित था, जिसने प्रस्तुति को गहरी भावात्मकता दी, जबकि साउंड डिजाइन साई श्रवणम ने संभाला। वहीं नृत्य-रचना निलावा सेन की रही, वहीं परिकल्पना, पटकथा और निर्देशन शिवम साहनी का था। परिधानों को संध्या रमन ने डिजाइन किया और आभूषण आर्ट कराट ने तैयार किए, जिससे प्रस्तुति का दृश्य सौंदर्य और भी आकर्षक बना।
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