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121 करोड़ की ठगी का आरोपी गौतम बरुआ गिरफ्तार
Fri, 28 Feb 2020 10:42 PM IST
Mohit Mudgal
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Mohit Mudgal
Updated Fri, 28 Feb 2020 10:42 PM IST
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पुलिस टीम ने गौतम बरुआ को गिरफ्तार किया
- फोटो : अमर उजाला
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नारकोटिक्स सेल, क्राइम ब्रांच और दिल्ली पुलिस ने असम से 121 करोड़ की ठगी के केस में भगोड़ा घोषित अपराधी गौतम बरुआ को पकड़ने से सफलता प्राप्त की है। पुलिस टीम को सूचना मिली थी कि असम से वांछित अभियुक्त गौतम बरुआ, जिसकी गिरफ्तारी पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित था, वह दिल्ली में छुप कर रह रहा है।
एसीपी आरके ओझा के निर्देशन में इंस्पेक्टर राम मनोहर, सिपाही अशोक नागर, संजय और कॉन्स्टेबल अनुज के साथ कार्रवाई को अंजाम दिया।
गौतम बरुआ तीन साल से फरार था और जगह बदल-बदलकर छुपकर रह रहा था। उसे पुलिस टीम ने सफदरजंग एन्क्लेव से पकड़ा। यहां वह पिछले 4-5 महीने से एक गेस्ट हाउस में छिपकर रह रहा था। गौतम बरुआ भागने की फिराक में ट्रेन पकड़ने नई दिल्ली रेलवे स्टेशन जाने की तैयारी में था।
असम पुलिस 2017 से गौतम बरुआ की तलाश कर रही थी और उसे कोर्ट द्वारा भगोड़ा भी घोषित किया गया था। पकड़े जाने पर पूछताछ और असम पुलिस से मिली जानकारी से क्राइम ब्रांच की टीम को पता चला कि असम सरकार ने असम बिल्डिंग एवं कंस्ट्रक्शन वर्कर्स वेलफेयर बोर्ड का गठन किया था जिसका चेयरमैन गौतम बरुआ को बनाया गया था।
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बोर्ड को जिम्मेदारी दी गई थी कि पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर के बिल्डर्स से एक तयशुदा चार्ज लिया जाएगा जो उन मजदूरों के कल्याण में खर्च किया जाएगा जिनका पंजीकरण बोर्ड में होगा। बोर्ड ने मजदूरों में जागरूकता फैलाने के लिए अलग अलग तरीके से इश्तेहार, पम्पलेट छपवाने, बोर्ड बनवाने के लिए टेंडर निकाले जिसमे बड़े पैमाने पर घपला किया गया।
घपले का पता चलने पर मुख्यमंत्री के स्पेशल सतर्कता विभाग ने केस दर्ज किया तो पता चला कि 121 करोड़ की ठगी की गई है। गौतम बरुआ को असम पुलिस के हवाले कर दिया गया है।
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एसीपी आरके ओझा के निर्देशन में इंस्पेक्टर राम मनोहर, सिपाही अशोक नागर, संजय और कॉन्स्टेबल अनुज के साथ कार्रवाई को अंजाम दिया।
गौतम बरुआ तीन साल से फरार था और जगह बदल-बदलकर छुपकर रह रहा था। उसे पुलिस टीम ने सफदरजंग एन्क्लेव से पकड़ा। यहां वह पिछले 4-5 महीने से एक गेस्ट हाउस में छिपकर रह रहा था। गौतम बरुआ भागने की फिराक में ट्रेन पकड़ने नई दिल्ली रेलवे स्टेशन जाने की तैयारी में था।
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असम पुलिस 2017 से गौतम बरुआ की तलाश कर रही थी और उसे कोर्ट द्वारा भगोड़ा भी घोषित किया गया था। पकड़े जाने पर पूछताछ और असम पुलिस से मिली जानकारी से क्राइम ब्रांच की टीम को पता चला कि असम सरकार ने असम बिल्डिंग एवं कंस्ट्रक्शन वर्कर्स वेलफेयर बोर्ड का गठन किया था जिसका चेयरमैन गौतम बरुआ को बनाया गया था।
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बोर्ड को जिम्मेदारी दी गई थी कि पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर के बिल्डर्स से एक तयशुदा चार्ज लिया जाएगा जो उन मजदूरों के कल्याण में खर्च किया जाएगा जिनका पंजीकरण बोर्ड में होगा। बोर्ड ने मजदूरों में जागरूकता फैलाने के लिए अलग अलग तरीके से इश्तेहार, पम्पलेट छपवाने, बोर्ड बनवाने के लिए टेंडर निकाले जिसमे बड़े पैमाने पर घपला किया गया।
घपले का पता चलने पर मुख्यमंत्री के स्पेशल सतर्कता विभाग ने केस दर्ज किया तो पता चला कि 121 करोड़ की ठगी की गई है। गौतम बरुआ को असम पुलिस के हवाले कर दिया गया है।