फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   garbage is polluting under ground water, people may face drinking water crisis in future

ताकि पानी के लिए न तरसें लोग, कचरे से भूमिगत जल हो रहा प्रदूषित

Mon, 09 Jul 2018 10:26 AM IST
आशुतोष दुबे, अमर उजाला, नोएडा
आशुतोष दुबे, अमर उजाला, नोएडा Updated Mon, 09 Jul 2018 10:26 AM IST
विज्ञापन
garbage is polluting under ground water, people may face drinking water crisis in future
कचरा - फोटो : लाल सिंह

दिल्ली की तर्ज पर नोएडा और ग्रेटर-नोएडा में प्रशासन व प्राधिकरण वायु प्रदूषण पर लगाम लगाने की कवायद करते रहते हैं, लेकिन वे यहां के भूजल प्रदूषण को लेकर अधिक चिंतित नहीं हैं। जबकि यहां का भूमिगत जल काफी प्रदूषित है।

विज्ञापन


एनजीटी समय-समय पर बिल्डिंग निर्माण में भूमिगत जल का उपयोग नहीं करने का निर्देश देता है, लेकिन अब भी एक अनुमान के मुताबिक जिले में भवन निर्माण में करीब 40 फीसदी भूमिगत जल उपयोग हो रहा है। वहीं, प्रदूषण नियंत्रण के मापदंड की अवहेलना करते हुए यहां की 200 औद्योगिक इकाइयों के वेस्ट मैटेरियल भूमिगत जल को प्रदूषित कर रहे हैं।
विज्ञापन


एनजीटी के पूर्व चेयरमैन जस्टिस स्वतंत्र कुमार ने बताया कि 2013 में सेंट्रल ग्राउंड वाटर अथॉरिटी ने एक सर्वे किया था। जिसमें तहत यह बात सामने आई थी कि सेक्टर-62ए में 2012 में भूमिगत जल का स्तर 21.15 मीटर था जो 2013 में यह स्तर खिसक कर 23.62 मीटर हो गया।
विज्ञापन
विज्ञापन


वहीं 2012 में सेक्टर-72 में भूमिगत जल का स्तर 19.31 मीटर था जो 2013 में 21.42 मीटर पर था। वहीं, 2017 में नोएडा में भूमिगत जल का स्तर 24.15 मीटर, ग्रेटर-नोएडा में यह स्तर 11.11, दनकौर में 7.46 मीटर व जेवर में 5.6 मीटर रिकॉर्ड किया गया। वहीं पर्यावरणविद विक्रांत तोंगड़ ने बताया कि जितना भूमिगत जल का स्तर कम होता जाएगा। प्रदूषण का स्तर उतना ही बढ़ता जाएगा। 

कचरे से प्रदूषित हो रहा भूमिगत जल

garbage is polluting under ground water, people may face drinking water crisis in future
cold water

शहर में भूमिगत जल प्रदूषित होने की एक वजह यहां कचरा है। शहर से रोजाना निकलने वाला 540 टन कूड़ा भूमिगत पानी के संपर्क में आते ही नाइट्रेट का स्तर बढ़ा रहा है। यह पानी में मिलकर उसे जहरीला कर देता है।

वहीं, ई-वेस्ट से पानी मिलकर आर्सेनिक बनाता है। जिससे कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी हो सकती है। हाल ही में ग्रेटर नोएडा के पांच गांवों में कैंसर से पिछले कुछ सालों में 57 लोगों की मौत हुई। इसके पीछे प्रदूषित जल को जिम्मेदार माना गया है।

प्रशासन नागरिकों की घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए गंगा जल का उपयोग बड़े हो रहा है, लेकिन आने वाले दिनों में गंगाजल मिलाने में हो रहे खर्च में और बढ़ोतरी हो जाएगी। ऐसी तमाम स्थितियों को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन को रेन हार्वेस्टिंग कल्चर पर ध्यान देना चाहिए।

रेन वाटर हार्वेस्टिंग से सुधर सकता है जल का स्तर
नोएडा प्राधिकरण के प्लानिंग विभाग के मुताबिक 2432 हेक्टेयर के ग्रीन बेल्ट में वाटर हार्वेस्टिंग के जरिये 740 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी जमा किया जा सकता है। रेन वाटर हार्वेस्टिंग से भूमिगत जल की गुणवत्ता को बेहतर किया जा सकता है। वर्तमान में प्रतिदिन नोएडा में 222 मिलियन लीटर भूमिगत जल का उपयोग किया जाता है। वाटर एंड पावर कंसल्टेंसी के अनुसार, उसे शुद्ध करने के लिए 48 मिलियन लीटर गंगा जल की जरूरत होती है। मास्टर प्लान 2021 के अनुसार, 2021 तक शहर में 553 मिलियन लीटर भूमिगत जल की प्रतिदिन जरूरत होगी। इसके लिए 302 मिलियन लीटर गंगा जल की हर दिन जरूरत होगी।

नोएडा में जल प्रदूषण का स्तर
पेयजल की गुणवत्ता और उपलब्धता- 16.67 फीसदी
जल प्रदूषण- 89.71 फीसदी

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed