एंबुलेंस से चरस-गांजे की तस्करी करता था ये गिरोह, क्राइम ब्रांच ने 3 सदस्यों को किया गिरफ्तार
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एंबुलेंस में सवार होकर चोरी की 100 से अधिक वारदात करने वाले तीन सदस्य गैंग का पुलिस ने खुलासा किया है। गैंग के दो सदस्यों को पुलिस ने धर दबोचा, मगर उनका सरगना भाग जाने में कामयाब रहा। ये गैंग एंबुलेंस में गांजे और अन्य नशीली चीजों की तस्करी भी करता था।
गिरफ्तार आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने उनके पास से करीब 25 लाख कीमत की ज्वेलरी, नकदी, मोबाइल और एंबुलेंस भी बरामद कर ली है। आरोपियों ने फरवरी में नेहरू नगर थर्ड में रहने वाले विजय गुप्ता के घर करीब 40 लाख रुपये की ज्वेलरी-नकदी चुराई थी।
पकड़े गए आरोपियों में मनोज मथुरा के सुरीर थाना क्षेत्र और आदेश औरैया के फफूंद इलाके का रहने वाला है। इस गैंग का मास्टर माइंड अतुल तिवारी कन्नौज के अतरौली इलाके का मूल निवासी है। गिरफ्तार दोनों आरोपी आठवीं पास हैं। पुलिस की मानें तो आरोपी 100 से ज्यादा चोरी की वारदातों को अंजाम दे चुके हैं। हालांकि इन पर करीब एक दर्जन ही चोरी और लूट की वारदातें दर्ज हैं।
एसएसपी हरि नारायण सिंह ने बताया कि पुलिस ने दोनों चोरों की मोबाइल लोकेशन ट्रेस कर शनिवार रात को घूकना मोड़ से गिरफ्तार किया है। उन्होंने बताया कि इस गैंग ने 25 फरवरी को नेहरू नगर-3 में रहने वाले कुकर कारोबारी विजय गुप्ता के घर में 40 लाख की चोरी को अंजाम दिया था।
विजय गुप्ता की पत्नी 17 फरवरी को द्वारका गईं थी, जबकि वह कारोबार के सिलसिले में मुंबई गए हुए थे। उनकी दो बेटियां अपनी बड़ी बहन के पास दिल्ली गई हुई थीं। तभी चोरों ने उनके घर से 15 लाख रुपये की नकदी समेत 40 लाख रुपये से अधिक की ज्वेलरी चुरा ली थी। बदमाशों की एंबुलेंस सीसीटीवी में कैद हो गई थी।
इसके बाद से ही पुलिस ने इस गैंग की तलाश शुरू कर दी थी। करीब तीन घंटे तक एंबुलेंस एक ही जगह खड़ी रही थी। इसके बाद पुलिस ने सर्विलांस के माध्यम से निश्चित अवधि में एक साथ चल रहे मोबाइल नंबरों को ट्रैस किया और चोरों तक पहुंच गई।
एसएसपी ने बताया कि पुलिस ने पकड़े गए दोनों आरोपियों की निशानदेही पर आधा किलो सोना, एक किलो चांदी, चार सिम वाला फोन, 3200 कैश और चोरी की वारदात में प्रयोग की गई एंबुलेंस बरामद की है। एसएसपी ने बताया कि इस गिरोह का सरगना अतुल तिवारी है। उसकी तलाश में कन्नौज समेत कई जगह टीमें भेजी गई हैं।
पुलिस चेकिंग को देख मरीज बन जाता था बदमाश
एसएसपी ने बताया कि चोरी और लूट के बाद बदमाशों पर पुलिस को शक न हो इसलिए वह वारदात के दौरान एंबुलेंस का इस्तेमाल करते थे। यह गिरोह एनसीआर के घरों और कोठियों की दिन में रेकी कर रात में एंबुलेंस से पहुंचते थे और चोरी की वारदात को अंजाम देते थे।
बाद में चोरी के माल को एंबुलेंस में रखकर ही वहां से भाग जाते थे, अगर कभी चेकिंग के दौरान पुलिस ने उन्हें रोका भी जाता था तो कोई एक बदमाश मरीज बनकर एंबुलेंस में लेट जाता था। इससे पुलिस को उन पर शक नहीं होता था।
एसएसपी ने बताया कि पुलिस जांच के दौरान सीसीटीवी कैमरे में दिखा कि दो दिन तक आरोपी विजय गुप्ता के घर पर रेकी कर अखबार उठाकर देखते हुए दिखे थे। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वह धूल जमे मकान, कई दिन से दरवाजों पर पड़े अखबारों को देखकर ही अनुमान लगा लेते थे कि इस मकान के लोग यहां नहीं हैं।
ग्वालियर से खरीदी थी एंबुलेंस
एसएसपी का कहना है कि आदेश एंबुलेंस चालक है। वह मध्यप्रदेश के ग्वालियर के एक व्यक्ति की एंबुलेंस चलाता था। 2013 के दौरान उसने कई लोगों के संपर्क में आकर चोरी करने का नायाब तरीका ढूंढ निकाला।
फिर उसने ग्वालियर वाले मालिक को एंबुलेंस के एवज में कुछ रुपये देकर उनसे एंबुलेंस ले ली और तब से ही चोरी की वारदातों को अंजाम दे रहे थे। चार साल में इस गिरोह का नेटवर्क पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में फैल गया।
एसएसपी ने बताया कि आरोपी एंबुलेंस में चोरी और लूट के सामान के अलावा शराब और गांजे की तस्करी भी करते थे। आरोपी पिछले चार साल से पुलिस को चकमा देकर नेपाल बॉर्डर से लेकर पंजाब तक गांजा और शराब की तस्करी करते थे, जिसके लिए वह तय गई कीमत लेते थे।