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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   From Palla to the control room, every movement of Yamuna will be closely monitored.

Delhi NCR News: पल्ला से कंट्रोल रूम तक इस बार यमुना की हर हलचल पर रहेगी पैनी नजर

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 09 May 2026 06:26 PM IST
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-हाई-टेक वायरलेस सेट और जल प्रहरियों के जरिये दिल्ली सरकार ने बुना सुरक्षा का जाल
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धनंजय मिश्रा

नई दिल्ली।
बीते सालों में यमुना की विनाशकारी बाढ़ का दंश झेल चुकी दिल्ली इस बार मानसून की चुनौती से निपटने के लिए अत्याधुनिक डिजिटल सुरक्षा चक्र से लैस हो रही है। सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग ने यमुना के प्रवेश द्वार पल्ला से लेकर ओखला तक निगरानी का एक ऐसा त्रिस्तरीय तंत्र तैयार किया है, जहां मानवीय नजरों के साथ-साथ हाईटेक तकनीक का पहरा होगा। करीब 1.14 करोड़ के इस विशेष प्रोजेक्ट के तहत यमुना की हर लहर की खबर सेकंडों में सेंट्रल कंट्रोल रूम तक पहुंचेगी।



निगरानी के साथ-साथ इस बार प्रशासन का सबसे ज्यादा जोर सूचना पहुंचाने की गति पर है। विभाग ने दिल्ली भर में वायरलेस स्टेशनों का एक मजबूत जाल बिछाने की योजना बनाई है। फील्ड में तैनात कर्मचारियों के पास अत्याधुनिक रेडियो सेट होंगे, जो सामान्य मोबाइल नेटवर्क या पुराने वॉकी-टॉकी से कहीं ज्यादा उन्नत होंगे। ये सेट इंटरनेट ऑफ थिंग्स तकनीक पर आधारित होंगे, जिससे डेटा और वॉयस कनेक्टिविटी हर समय बनी रहेगी। इन सेटों की सबसे बड़ी खासियत इनका मिलिट्री ग्रेड और वॉटरप्रूफ होना है, यानी मूसलाधार बारिश और बाढ़ की विषम परिस्थितियों में भी ये खराब नहीं होंगे। यमुना के किनारों से लेकर दिल्ली के सेंट्रल फ्लड कंट्रोल रूम तक सूचनाएं बिजली की गति से पहुंचेगी। इसका सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि यदि ऊपरी राज्यों से पानी छोड़े जाने के कारण जलस्तर खतरे के निशान के पास पहुंचता है, तो प्रशासन के पास निचले इलाकों को खाली कराने और जान-माल की रक्षा करने के लिए पर्याप्त समय होगा।
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शास्त्री नगर स्थित कंट्रोल रूम बनेगा नर्व सेंटर :
शास्त्री नगर स्थित सेंट्रल फ्लड कंट्रोल रूम को इस पूरी व्यवस्था का दिमाग बनाया गया है। यहां दर्जनों ऑपरेटर और कर्मचारी राउंड-द-क्लॉक शिफ्टों में काम करेंगे ताकि राजधानी के किसी भी कोने से आने वाली बाढ़ संबंधी सूचना पर तत्काल कार्रवाई की जा सके। सरकार ने वेंडर के साथ एडवांस रिप्लेसमेंट का समझौता भी किया है, जिसके तहत यदि कोई वायरलेस सेट खराब होता है, तो उसे अधिकतम 24 घंटे के भीतर बदला जाएगा। इससे निगरानी के सिलसिले में एक पल की भी रुकावट नहीं आएगी। सुरक्षा कवच की तरह काम करेगी मॉनिटरिंग आमतौर पर यमुना में जब ऊपरी राज्यों से भारी मात्रा में पानी छोड़ा जाता है, तो दिल्ली के पास तैयारी के लिए बहुत कम समय होता है। ऐसे में पल्ला से लेकर ओखला तक की यह लेयर मॉनिटरिंग आम नागरिकों के लिए सुरक्षा कवच का काम करेगी। सरकार का लक्ष्य है कि अत्याधुनिक तकनीक और अनुभवी जल प्रहरियों के संगम से इस बार बाढ़ के खतरे को न्यूनतम किया जा सके और 2023 जैसी विभीषिका दोबारा न दोहराई जाए।
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यह होगी व्यवस्था

-इंटरनेट ऑफ थिंग्स तकनीक पर आधारित 128 हैंडहेल्ड रेडियो सेट और 64 बेस रेडियो सेट।

-ये सेट न केवल आवाज बल्कि डेटा कनेक्टिविटी के जरिए भी सूचनाएं साझा करेंगे।

-पूरी दिल्ली में वायरलेस स्टेशनों के संचालन के लिए कुल 6656 शिफ्टों में ऑपरेटरों की हाेगी तैनाती।
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