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... तब जाकर उसे मिली वेश्यावृत्ति से पूरी आजादी
धीरज बेनीवाल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 02 May 2014 06:34 PM IST
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दिल्ली के निर्मल छाया में रह रही बंग्लादेशी महिला फातिमा को अदालत ने उसके देश भेजने का निर्देश दिया है। सही सलामत उसे उसके घर तक पहुंचाने के लिए अदालत ने एक सब इंस्पेक्टर साथ भेजने का भी निर्देश दिया है और दस दिनों के भीतर रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है।
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जीबी रोड के एक कोठे से मुक्त कराई गई दुष्कर्म और वेश्यावृत्ति की पीड़िता फातिमा (परिवर्तित नाम) पिछले एक साल से निर्मल छाया में है।
तीस हजारी स्थित विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट ने मध्य जिला पुलिस उपायुक्त को दिए निर्देश में कहा कि फातिमा बालिग है और उसे निर्मल छाया में रखने का कोई मतलब नहीं है।
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उसे वापस बांग्लादेश भेजने का इंतजाम किया जाए। फातिमा को उसके परिजनों तक सही सलामत पहुचाने के लिए स्थानीय पुलिस की मदद लेने को कहा है और इसके लिए एसआई स्तर के अधिकारी की तैनाती करने के निर्देश दिए हैं।
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फातिमा के पते की जानकारी रखना और उसे गवाही के लिए बुलाने की जिम्मेदारी भी अदालत ने पुलिस पर डाली है। निर्मल छाया की वेलफेयर ऑफिसर पूनम सिंह ने पीड़िता की ओर से एक पत्र विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट में पेश किया था।
पत्र में बताया गया था कि बेटे से जुदाई के कारण उसकी हालत बिगड़ रही है। वह तोड़फोड़ व साथी महिलाओं के साथ मारपीट कर रही है। फांसी लगाने की धमकी दे रही है।
पत्र मिलने के बाद अदालत ने पीड़िता को पेश करने व उसके बांग्लादेश के पते की जांच करने का निर्देश दिया था। इस मामले में अमर उजाला ने भी 29 अप्रैल को समाचार छापा था।
अदालत में पीड़िता को पेश कर अधिकारी ने बताया कि फातिमा के पते की जांच के लिए एक फरवरी 2014 को बांग्लादेश दूतावास को आवेदन भेजा गया था, लेकिन वहां से कोई जवाब नहीं आया।