फिरोजशाह कोटला में ही होगा चौथा टेस्ट, एक करोड़ टैक्स
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दिल्ली जिला क्रिकेट एसोसिएशन (डीडीसीए) और दिल्ली सरकार के बीच मनोरंजन टैक्स अदायगी का विवाद अस्थायी रूप से सुलझ गया है। हाईकोर्ट ने डीडीसीए को बकाये टैक्स में से एक करोड़ रुपये सरकार के पास जमा करवाने का निर्देश दिया है।
साथ ही अदालत ने सरकार को निर्देश दिया कि वह मैच करवाने की इजाजत(अनापत्ति प्रमाण पत्र) प्रदान करे और अगले आदेश तक इस मुद्दे को लेकर डीडीसीए के खिलाफ कोई भी ठोस कदम नहीं उठाए।
इसी के साथ फिरोजशाह कोटला मैदान में दक्षिण अफ्रीका-भारत के बीच होने वाला चौथा टेस्ट करवाने का रास्ता साफ हो गया। न्यायमूर्ति बीडी अहमद और न्यायमूर्ति संजीव सचदेव की खंडपीठ ने डीडीसीए के आवेदन पर सुनवाई करते हुए उसे निर्देश दिया कि वह 50-50 लाख रुपये की दो किस्तों में सरकार को एक करोड़ रुपये अदा करे।
पहली किस्त की अदायगी दो सप्ताह में करनी है
पहली किस्त की अदायगी दो सप्ताह में करनी है। अदालत ने कहा कि बकाया 24 करोड़ टैक्स के मुद्दे पर वह 27 नवंबर को सुनवाई करेंगे।
इससे पूर्व आबकारी, मनोरंजन और विलासिता कर विभाग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता दयान कृष्णन ने बताया कि डीडीसीए पर 24 करोड़ रुपये बकाया है और उसे अदा नहीं किया जा रहा।
डीडीसीए की ओर से पेश अधिवक्ता सुनील मित्तल ने आपत्ति जताते हुए कहा कि सरकार ने गलत तरीके से ब्याज सहित इतना टैक्स लगाया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार ने जिस एक्ट के तहत नोटिस जारी किया है वह असंवैधानिक है।
इसके अलावा यदि टैक्स को देखा जाए तो मात्र तीन करोड़ रुपये ही है। ऐसे में दिल्ली सरकार के नोटिस पर रोक लगाई जाए।
31 मार्च 2016 तक पूरा कामकाज करवाना होगा
खंडपीठ ने एमसीडी मामले में बुधवार को साउथ एमसीडी को निर्देश दिया था कि वह मैच करवाने के लिए दिल्ली एंड जिला क्रिकेट एसोसिएशन (डीडीसीए) को सशर्त प्रोविजनल सर्टिफिकेट प्रदान करे।
अदालत ने स्पष्ट किया कि इसके बाद कभी भी डीडीसीए को प्रोविजनल सर्टिफिकेट प्रदान नहीं किया जाएगा और उसे स्टेडियम में हर हाल में 31 मार्च 2016 तक पूरा कामकाज करवाना होगा।
इतना ही नहीं अदालत ने डीडीसीए में व्याप्त अनियमितताओं के आरोप के ध्यानार्थ टेस्ट मैच, पूरे कार्यक्रम व राजस्व पर निगरानी के लिए हाईकोर्ट के रिटायर जज मुकुल मुदगल की नियुक्ति कर दी थी।