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धौलाकुआं गैंगरेप: पढ़िए, इस केस की 4 अहम कड़ियां

Tue, 21 Oct 2014 04:44 PM IST
Updated Tue, 21 Oct 2014 04:44 PM IST
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four points of dhaula kuan gang rape case

धौला कुआं गैंग रेप मामले में दोषियों को आजीवन कारावास की सजा पर अभियोजन व जांच अधिकारी ने खुशी जाहिर की है। अभियोजन पक्ष की ओर से कहा गया कि दोषियों को कठोर सजा मिलने से अपराधी प्रवृत्ति के अन्य लोगों को भी सबक मिलेगा।

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लोक अभियोजक सतविंदर कौर ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि सामूहिक दुष्कर्म के लिए कानून में तय अधिकतम सजा अदालत ने दोषियों को दी है। इससे दूसरे लोगों को भी सबक मिलेगा और महिलाओं के प्रति अपराध कम होंगे।
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मामले में पीड़िता हादसे के बाद गहरे सदमे में आ गई थी और आज भी सदमे में है। उस समय उसे सहारा देने के लिए कोई नहीं था। इस हादसे के बाद वह पूरी तरह टूट गई थी और नौकरी छोड़कर अपने घर लौट गई थी। इसके बावजूद उसने आरोपियों की पहचान की और उनके खिलाफ अदालत में बयान दिया।
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दुष्कर्म के आरोपों को साबित करने के लिए 57 गवाहों के बयान दर्ज किए और उनसे जिरह की। गवाहों की गवाही कई दिनों तक चली। पढ़िए इस केस की अहम कड़ियां:

पहले किया था प्रपोज

four points of dhaula kuan gang rape case

दरअसल, इस केस के एक आरोपी ने पहले युवती के सामने प्रेम प्रस्ताव रखा था लेकिन उसने मना कर दिया। वह आते जाते उसका पीछा करता था और बार-बार उसे प्रपोज भी करता था।

कई बार कहने के बाद भी जब युवती नहीं मानी तो उसने अपने भाई को ये बात बताई और उसने भाई के दो और साथियों के साथ मिलकर युवती को सबक‌ सिखाने की योजना बनाई।

उन्होंने पहले युवती के आने-जाने के समय को परखा और पूरी प्लानिंग के साथ उसका अपहरण कर हरियाणा के धौलाकुंआ गांव ले जाकर घटना को अंजाम दिया।

बता दें कि युवती मंगोलपुरी इलाके में रहती थी और गुड़गांव के एक कॉल सेंटर में काम करती थी।

ऐसे हुई पूरी घटना

four points of dhaula kuan gang rape case

24 नवंबर 2010 की देर रात पांच अपराधी फितरत के लोग दिल्ली की सड़कों पर घूम रहे थे। इन पांचों ने शराब पी रखी थी। सभी हरियाणा के मेवात गांव से थे और इनका मकसद दिल्ली से पालतु जानवरों को चुराना था।

चोरी की फिराक में लगे ये अपराधी एक पिक-अप वैन में सवार थे। कुछ देर चलने के बाद इन्हें अपनी गाड़ी के आगे एक इनोवा कार ‌दिखाई दी। इसमें कुछ लड़कियां बैठी थीं।

लड़कियों को देखते ही शराब में धुत इन बदमाशों ने उस गाड़ी का पीछा करना शुरू कर दिया। मोतीबाग पहुंचते ही कार रूकी और उसमें से दो लड़कियां उतरीं।

इस वक्त रात के 1:30 बज रहे थे। दोनों लड़कियां अपने घर की ओर जा रही थीं। तभी अचानक उनके आगे पिक-अप वैन रूकी। इसमें से पांच लोग बाहर आए और दोनों लड़कियों को पिक-वैन में खिंचने की कोशिश की।

दोनों ने जब शोर मचाना शुरू किया तो हमलावरों में से एक ने तमंचा निकाला और दोनों को जान से मारने की धमकी देने लगा। इतने में एक लड़की नशे में धुत अपराधियों के चंगुल से बच कर भागने में सफल रही।

आईआईटी के छात्रों ने देखा था वो मंजर

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मवेशी उठाने की स्टाइल से धौला कुआं गैंगरेप के दोषियों के बारे में पहला व सटीक सुराग मिला था। दोषियों ने बहुत ही फुर्ती (जल्दबाजी) से बीपीओ कर्मी युवती को सड़क से उठाकर महिंद्रा पिकअप में डाला था।

जिस जगह से बीपीओ कर्मी को उठाया गया था वहां से कुछ ही दूरी पर आईआईटी में पढ़ने वाले दो छात्र रहते थे और इन्होंने अपने घर के बाहर सीसीटीवी कैमरा लगा रखा था। एक छात्र ने देखा कि कुछ युवक महिंद्रा पिकअप में युवती को अगवा करके ले जा रहे हैं और वह चिल्ला रही है।

दोनों छात्र युवती को बचाने बाहर आए थे, मगर तब तक आरोपी भाग चुके थे। फुटेज की छानबीन के दौरान हौजखास थाने के थानाध्यक्ष अतुल कुमार वर्मा ने देखा कि आरोपी बीपीओ कर्मी युवती को महिंद्रा पिकअप में उसी फुर्ती से डाल रहे है जिस फुर्ती से मेवाती गिरोह के सदस्य मवेशी को उठाकर गाड़ी में डालते हैं।

पुलिसकर्मियों ने जब मेवाती गिरोह के बारे में जानकारी हासिल करनी शुरू की तो पता लगा कि मेवात निवासी व कई मामलों में नामजद आरोपियों ने अनायास ही फरीदाबाद के मुजेसर थाने में सरेंडर किया था। इससे पुलिस का मेवाती गिरोह पर पूरा शक पक्का हो गया था।

इसके अलावा पीड़ित के कब्जे से दस-दस के गड्डी में नोट मिल गए थे। तत्कालीन हौजखास थानाध्यक्ष अध्यक्ष अतुल कुमार वर्मा वह शख्स थे जिन्हें धौला कुआं सामूहिक दुष्कर्म को खोलने का श्रेय दिया जाता है। इसके बाद तत्कालीन दक्षिण जिला डीसीपी एचजीएच धालीवाल की देखरेख में करीब 300 पुलिसकर्मियों की टीम ने मेवात में आरोपियों को पकड़ने के लिए दबिश दी थी।

आरोपी जब भी वह मवेशी उठाने के लिए दिल्ली आते थे रास्ते में बाकायदा टोल टैक्स कटाकर आते थे। इन्होंने पीड़ित युवती को जो दस-दस के नोट दिए हैं वह इसी टोल टैक्स के लिए अपने पास रखते थे।

दस रुपए के नोट ने पकड़ाया

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दूसरी लड़की को उन्होंने गाड़ी में खींचा और दिल्ली से बाहर की ओर चल दिए। सुनसान इलाका देख उन्होंने गाड़ी रोकी और एक-एक कर पांचों ने तीस वर्षीय इस लड़की से बलात्कार किया। इस जघन्यतम अपराध के बाद उन्होंने लड़की के मुंह पर दस-दस के ग्यारह नोट फेंके और बोला ये पकड़ पैसे और ऑटो लेकर घर चली जा।

असल में यह लड़की बीपीओ में काम कर देर रात घर जा रही थी। इस हादसे ने पूरी दिल्ली को हिला दिया। कोर्ट ने सख्त रूख अपनाते हुए राजधानी क्षेत्र में काम करने वाले सभी बीपीओ को महिला कर्मियों को सुरक्षित घर पहुंचाने के‌ लिए कैब में सुरक्षा व्यवस्‍था करने का आदेश दिया।

इस घटना के बाद लड़की ने किसी तरह खुद को संभाला और अपने फोन से पुलिस को घटना के बारे में बताया। देर रात हुई इस घटना में सुराग तलाशना पुलिस के लिए एक बड़ा सिरदर्द था।

तभी लड़की ने बताया कि अपराधियों ने उसके मुंह पर कुछ नोट फेंके हैं। इस बात का अंदाजा तो उन पांचों वहशियों को भी नहीं रहा होगा कि उनके फेंके नोट ही उनकी सबसे बड़ी गलती साबित होंगे।

नोट जिस ढंग से मोड़े गए थे उससे पुलिस को यह अंदाजा हुआ कि ऐसा या तो बस के कंडक्टर करते हैं या टोल काउंटर पर इस तरह से नोट रखे जाते हैं।

टोल के सीसीटीवी में उस गाड़ी का पता चल गया और पुलिस ने जल्द ही उस गाड़ी को तलाश्‍ा लिया। इसी एक सबूत ने एक-एक कर सभी अपराधियों को पुलिस की गिरफ्त में ला दिया।

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