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दिल्ली में 12 घंटे में चार और बच्चों की मौत, आंकड़ा छिपाने में जुटे डॉक्टर

Sat, 22 Sep 2018 06:19 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 22 Sep 2018 06:19 AM IST
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four more children died in last 12 hours due to diphtheria at Maharishi Valmiki Diseases Hospital
फाइल फोटो
दिल्ली के महर्षि वाल्मीकि अस्पताल में 12 घंटे के भीतर चार और बच्चों की गलघोंटू बीमारी से मौत हो गई। इनके भी परिजनों का आरोप समय पर इलाज नहीं मिलना है, जबकि एक बच्चे के परिजनों का कहना है कि गरीब होने के कारण उनके पास सीरम बाहर से खरीदने के रुपये नहीं थे।
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जानकारी के अनुसार, चारों बच्चे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के थे। नगर निगम और अस्पताल प्रबंधन ने इसके पीछे उत्तर प्रदेश सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। कहा है कि उत्तर प्रदेश में टीकाकरण सही तरीके से नहीं हो रहा, जिसका खामियाजा आज बच्चों की मौत के रूप में देखने को मिल रहा है। मृतक चारों बच्चों की आयु 2 से 8 वर्ष के बीच बताई जा रही है।
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इससे पहले 6 से 19 सितंबर के बीच महर्षि वाल्मीकि अस्पताल में 11 बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि एक बच्चे की मौत लोकनायक अस्पताल में हुई।

सूत्रों के अनुसार, बृहस्पतिवार रात को दो बच्चों की मौत हो गई, जबकि शुक्रवार को दो और बच्चे चपेट में आए। इन आंकड़ों को मिलाकर देखें तो दिल्ली में अब तक गलघोंटू बीमारी से 16 बच्चों की मौत हो चुकी है। इनमें से एक बच्चा दिल्ली का था, जबकि 15 पश्चिमी यूपी के थे।
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मौत का आंकड़ा छिपाने में जुटे

जहां दिल्ली नगर निगम ने उच्चस्तरीय जांच कमेटी का गठन कर दिया है, वहीं अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुशील गुप्ता ने चार और बच्चों की मौत की पुष्टि करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कोई जवाब ही नहीं दिया


इन जिलों के बच्चों ने तोड़ा दम
बृहस्पतिवार को जिन 12 बच्चों की मौत हुई थी, उनमें से यूपी के बुलंदशहर निवासी आशीष व मोहम्मद कैफ, गौतमबुद्धनगर जिला निवासी आहिर व शाजिया, मुरादाबाद निवासी काफिद व सुमित, मथुरा एवं सहारनपुर निवासी सानिया व कामिल खान, गाजियाबाद निवासी दीपांशु, हर्ष, शिफा और दिल्ली निवासी साक्षी शामिल हैं, जबकि अन्य चार बच्चों में से तीन गौतमबुद्धनगर के दादरी व ग्रेटर नोएडा एवं एक बिजनौर जिला निवासी बताया जा रहा है। निगम की ओर से इन मृतक बच्चों की पहचान और पुष्टि नहीं की गई।
 

इलाज कराना चाहते हो तो रुक जाओ


बच्चों की मौत को लेकर महर्षि वाल्मीकि अस्पताल में ये स्थिति है कि ड्यूटी पर बैठे डॉक्टरों का कहना है कि यहां 10 में से तीन बच्चों की मौत हो रही है। अस्पताल में एंटी डिप्थीरिया सीरम नहीं है। बाहर से ले भी आओगे, तो भी कोई गारंटी नहीं है कि बच्चा बच जाए। फिर भी यहां इलाज कराना चाहते हो तो रुक जाओ। तुम्हारी मर्जी है, क्या करना है?       
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