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Ram Nath Kovind: पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद बोले- भाषा हमें गढ़ती है और मिट्टी जोड़ने का काम करती है
Tue, 19 Dec 2023 04:16 AM IST
विजय पुंडीर
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: विजय पुंडीर
Updated Tue, 19 Dec 2023 04:16 AM IST
सार
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र और हिन्दुस्तानी भाषा अकादमी की तरफ से आयोजित समारोह में दिल्ली के 268 स्कूलों के नौ भारतीय भाषाओं के 8,166 छात्र-छात्राओं और 768 शिक्षकों की मौजूदगी रही। पूर्व राष्ट्रपति ने खचाखच भरे तालकटोरा इंडोर स्टेडियम में अपने संबोधन से सभी को प्रोत्साहित किया।
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पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद का मानना है कि व्यक्तित्व निर्माण में भाषा की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। भाषा हमें गढ़ती है और मिट्टी जोड़ने का काम करती है। भारत केवल प्राचीन सभ्यता के लिए नहीं, बल्कि अपनी भाषाई संस्कृति के लिए भी जाना जाता है। पूर्व राष्ट्रपति भारतीय भाषा दिवस के मौके पर तालकटोरा इंडोर स्टेडियम में आयोजित भारतीय भाषा उत्सव में वह मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। पूर्व राष्ट्रपति ने खचाखच भरे स्टेडियम में अपने संबोधन से सभी को प्रोत्साहित किया।
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इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र और हिन्दुस्तानी भाषा अकादमी की तरफ से आयोजित समारोह में दिल्ली के 268 स्कूलों के नौ भारतीय भाषाओं के 8,166 छात्र-छात्राओं और 768 शिक्षकों की मौजूदगी रही। पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि ऐसा लग रहा है, जैसे विराट, विशाल वैभवशाली भारत ठीक उनके सामने हो। जैसे माली और फूल एक साथ बैठे हों। उन्होंने शिक्षकों को माली और शिष्यों को फूल की संज्ञा से अलंकृत किया। उन्होंने इस आयोजन के लिए इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र और हिन्दुस्तानी भाषा अकादमी की प्रशंसा की। दिलचस्प यह कि स्टेडियम में मौजूद श्रोताओं ने राम नाथ कोविंद के संबोधन को अपने भविष्य के लिए बेहद अहम बताया।
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दूसरी तरफ केंद्रीय संस्कृति मंत्री मीनाक्षी लेखी ने कहा कि जब कोई बच्चा जन्म लेता है तो वह कोई भाषा नहीं जानता। वह सबसे पहली भाषा अपनी मां से सीखता है। इसीलिए उसे मातृभाषा की संज्ञा दी गई है। वहीं, डॉ सच्चिदानंद जोशी ने कहा, इसमें केवल वे छात्र शामिल रहे, जिन्होंने भारतीय भाषाओं में 90 फीसदी से अधिक अंक प्राप्त किए। जबकि सुधाकर पाठक ने कहा कि केंद्र सरकार ने राष्ट्रवादी तमिल कवि सुब्रमण्यम भारती की जयंती को भारतीय भाषा दिवस के रूप में मनाने की घोषणा से राष्ट्रीय एकता मजबूत होगी।
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