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हाईकमान के खिलाफ मोर्चा खोलना पड़ा भारी, अलग-थलग पड़े अकाली दल बादल के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष जीके

Thu, 30 May 2019 10:27 AM IST
शाहरुख खान विजय सिंघल, अमर उजाला, नई दिल्ली
विजय सिंघल, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शाहरुख खान Updated Thu, 30 May 2019 10:27 AM IST
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Former President Manjit Singh GK of Akali Dal Badal Have gone alone
फाइल फोटो
शिरोमणि अकाली दल बादल के प्रधान सुखवीर सिंह बादल के खिलाफ मोर्चा खोलना पूर्व प्रदेशाध्यक्ष और डीएसजीपीसी के पूर्व अध्यक्ष मनजीत सिंह जीके को भारी पड़ता नजर आ रहा है। पहले विपक्ष के भ्रष्टाचार के आरोपों पर कमेटी उनके बचाव में दिखती थी, लेकिन अब पूरी कमेटी ही उनके खिलाफ खुलकर आ गई है। 
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इससे जीके के राजनीतिक भविष्य पर भी सवाल उठने लगे हैं। जीके लगातार छह वर्ष डीएसजीपीसी अध्यक्ष रहे। पहली बार में वे चार वर्ष अध्यक्ष रहे। दूसरी बार भी उनके नेतृत्व में कमेटी में बादल गुट ने जबरदस्त जीत हासिल की। इसका श्रेय उनकी ईमानदार छवि को दिया गया था। 
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इसी कारण हाईकमान भी उनकी शर्तो के आगे झुका और इच्छानुसार कार्यकारिणी बनाने की इजाजत दी। जीके की मात्र महासचिव पद पर नहीं चली। इस पद पर मनजिद्र सिंह सिरसा आ गए और दोनों के मनमुटाव खुलकर सामने आए। सिरसा ने भ्रष्टाचार और महिला से छेड़छाड़ के मामले में कमेटी के प्रबंधक को हटाया तो जीके ने उनके फैसले को बदल दिया। 
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सिरसा बादल के खासमखास माने जाते हैं। यही कारण है कि जीके के पार्टी हाईकमान से संबंध खराब होते गए और ईमानदार छवि के बावजूद उन्हें भ्रष्टाचार के आरोपों में पद छोड़ना पड़ा। इसके बावजूद कमेटी सदस्य कहीं-न-कहीं उन्हें बचाने में ही लगे रहे। 

जीके ने पंजाब में हार के बाद बादल के नेतृत्व पर ही सवाल उठाया तो हालात बिगड़ गए। उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया और शुभचिंतकों ने भी उनसे दूरी बना ली। वैसे जीके के भाजपा में जाने और पुन: अपनी पार्टी खड़ी करने के कयास लगते रहे हैं, लेकिन आज के हालात में भाजपा में जाने के रास्ते भी बंद नजर आ रहे है। 

बादल परिवार से झगड़े के बाद पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू को पार्टी छोड़नी पड़ी थी। ऐसे में बादल के विरोध के चलते भाजपा में उनका जाना संदिग्ध है। वे अपनी पार्टी भी पुन: खड़ी करते हैं तो भी करोड़ों रुपये के घोटाले के आरोप उनका पीछा नहीं छोड़ सकते। उनकी साफ छवि पर दाग लग गया है और उन्हें संगतों को जवाब तो देना ही पड़ेगा।
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