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बोफोर्स घोटाले का खुलासा करने वाले कर्नाटक के पूर्व राज्यपाल टीएन चतुर्वेदी का निधन
Sun, 05 Jan 2020 10:41 PM IST
Vikas Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नोएडा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नोएडा
Published by: Vikas Kumar
Updated Sun, 05 Jan 2020 10:41 PM IST
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कर्नाटक के पूर्व गवर्नर टीएन चतुर्वेदी
- फोटो : Social Media
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नियंत्रक व महालेखा परीक्षक (कैग) के तौर पर बोफोर्स तोप खरीद घोटाले को उजागर करने वाले पूर्व राज्यपाल त्रिलोकी नाथ चतुर्वेदी का रविवार देर शाम यहां निधन हो गया। टीएन चतुर्वेदी 94 वर्ष के थे। करीब 1 महीने से बीमार चलने के कारण उनका इलाज चल रहा था। रविवार देर रात उन्होंने सांस लेने में अधिक तकलीफ होने पर करीब 9 बजे कैलाश अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनका अंतिम संस्कार ब्रिटेन से उनके बेटे लौटने के बाद मंगलवार को किया जाएगा। तब तक उनका पार्थिव शरीर कैलाश अस्पताल में ही रखा गया है।
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परिवार के लोगों ने बताया कि दिवंगत त्रिलोकी नाथ चतुर्वेदी पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे और उनका इलाज दिल्ली के अस्पताल से चल रहा था। चार दिन पहले ही वे अस्पताल से नोएडा के सेक्टर-17ए स्थित अपनी बेटी के आवास पर आए थे। रविवार देर शाम उन्हें फिर से परेशानी महसूस हुई थी तो परिजन उन्हें कैलाश अस्पताल लेकर पहुंचे। इमरजेंसी में जांच पड़ताल के बाद उन्हें वेंटीलेंटर पर ले जाने की प्रक्रिया शुरू की गई। लेकिन इसी दौरान उनका निधन हो गया। उनके निधन की जानकारी मिलने पर सभी में शोक का माहौल बन गया। पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. महेश शर्मा समेत कई नेताओं ने अस्पताल पहुंचकर शोक व्यक्त किया।
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1990 तक रहे कैग पद पर नियुक्त
परिजनों ने बताया कि 10 जनवरी, 1928 को जन्मे चतुर्वेदी 1984 से 1990 तक कैग के तौर पर नियुक्त रहे। इस दौरान उन्होंने बोफोर्स तोप खरीद की जांच की और इसमें की गई घोटालेबाजी को अपनी रिपोर्ट में शामिल किया। इसी रिपोर्ट को हाथ में लेकर वीपी सिंह ने तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी पर घोटाले का आरोप लगाया था। इसके चलते राजीव गांधी को चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था और वीपी सिंह के नेतृत्व में गैर कांग्रेसी दलों ने सरकार गठित की थी। भारत सरकार ने 1990 में उन्हें पदम विभूषण से अलंकृत किया था। प्रशासनिक सेवा में उन्होंने खूब ख्याति प्राप्त हुई थी।
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राज्यपाल के तौर पर रहे लोकप्रिय
सेवानिवृत्ति के बाद चतुर्वेदी ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली थी। उन्हें 21 अगस्त, 2002 को कर्नाटक का राज्यपाल नियुक्त किया गया था। 23 जून, 2004 को उन्हें केरल के राज्यपाल का अतिरिक्त दायित्व भी दिया गया। कर्नाटक के राज्यपाल के रूप में चतुर्वेदी सत्ता और विपक्ष, दोनों के ही बीच बेहद लोकप्रिय रहे। वह 21 अगस्त, 2007 को राज्यपाल के पद से सेवामुक्त हुए।
प्रमाणिक व्यक्ति थे चतुर्वेदी : रविशंकर प्रसाद
टीएन चतुर्वेदी बहुत ही प्रामाणिक व्यक्ति थे। एक आईएएस ऑफिसर के तौर पर उन्होंने बहुत नाम कमाया था। बतौर सीएजी गड़बड़ियों को पकड़ने में उनकी बड़ी भूमिका रही। उन्होंने साबित किया कि सीएजी का काम सिर्फ हिसाब किताब देखना ही नहीं है। बतौर राज्यसभा सांसद मैंने उनको बहुत करीब से देखा। वे बहुत गंभीरता से अपनी बात कहते थे। समाज के हर वर्ग में उनका बहुत सम्मान था। उनके निधन पर मैं अपनी हार्दिक संवेदना व्यक्त करता हूं।
- रविशंकर प्रसाद, केंद्रीय कानून मंत्री