'अच्छे दिन' की उम्मीद में भारत आए विदेशी व्यापारी, नोटबंदी ने कर दिया बेहाल
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उनके स्टाल पर तरह तरह की चाय तो है पर ग्राहक या व्यापारिक पूछताछ करने के लिए कोई नहीं। श्रीलंका से आए निस्तार एम सैली कुरसी पर बैठे हैं और माथे पर चिंता की लकीरें हैं। कहते हैं इस बार बिजनेस नहीं है, कैश सेल तो है नहीं साथ ही पूछताछ के लिए भी किसी पार्टी ने ज्यादा दिलचस्पी नहीं ली।
मेले का शुक्रवार को आखिरी बिजनेस डे था कल से दर्शक भी बढ़ेंगे पर सैली को लगता है इस बार ज्यादा कुछ हाथ नहीं आने वाला। हाल नंबर 18 में सबसे ज्यादा विदेशी कंपनियों को स्टाल हैं।
यहां अफगानिस्तान के सूखे मेवे, ईरान का जाफरान और यूरोप के मिंक ब्लैंकेट के साथ तुर्की के प्रसिद्ध लैंप खरीदे जा सकते हैं। लेकिन स्वैप मशीनों की कमी ने दिक्कत बढ़ा दी है।
...पुराने नोट लेने में नुकसान पर चारा क्या
तेहरान की नियावरन कंपनी पूरी दुनिया में जाफरान और सूखे मेवों का निर्यात करती है। काउंटर पर मौजूद करीमीनेजाद बताते हैं पिछले कई साल से आ रहे हैं पर इस तरह के हालात से पहली बार रू-ब-रू हुए हैं। वे कहते हैं लोग आते हैं खजूर, ड्राई फ्रूट आदि के रेट पूछते हैं, फिर कहते हैं पुराने नोट लेंगे क्या।
हंसते हुए कहते हैं अगर हम ले भी लें तो उन्हें बदलने में हमें कमीशन देना पड़ेगा इससे तो हमारा ही नुकसान ज्यादा होगा। थोड़ा परेशान होकर कहते हैं इस बार ईरान में भी केसर का बाजार अच्छा नहीं है, थोड़ी यहां से उम्मीद थी वह भी टूट गई। एक और दुकान पर मौजूद अफगान व्यापारी कहते हैं, लेकिन क्या करें कुछ बिजनेस तो करना ही पड़ेगा।
आप ही देख लो क्या हाल है
पहली मंजिल पर मौजूद थाईलैंड के स्टाल पर तरह तरह के प्रोडक्ट हैं, ज्वैलरी, क्राकरी, हैंगिंग। लेकिन वैसी भीड़ नहीं जिसकी आदत काउंटर संभालने वाले रोको को कई साल से रही है। क्या कार्ड से पेमेंट होगा?
एक छात्रा ने उनसे पूछा तो जवाब था। नहीं, कैश चाहिए नए नोट। नए नोट तो नहीं हैं। वे मुस्कराते हैं, बस यही कहानी है, दस में से एक या दो ही कुछ खरीदता है। आप खुद ही देख लो कैसे सामान बेचें। स्वैप मशीन के लिए बात की थी पर उपलब्ध नहीं है।
स्टाल रोशनी से जगमग...पर चेहरे उदास
यहां कुछ जगह पुराने नोट लेने को स्टाल वाले तैयार दिखे पर उनका साथ ही कहना था कि जितने का नोट दोगे उतने का ही सामान लेना होगा हम खुले पैसे नहीं दे पाएंगे। ऐसे में कुछ ही लोगों को यह सौदा जम पा रहा था।
तुर्की के लैंप के स्टाल हमेशा से प्रगति मैदान की शान रहे हैं, वे रोशनी से जगमग हैं पर स्टाल पर खड़े लोगों में उत्साह नहीं। ग्राहक आते ही पूछते हैं कार्ड चलेगा। फिर आगे बढ़ जाते हैं।
ब्रांड टीजे में रुचि...खरीद में नहीं
ग्राउंड फ्लोर पर तिहाड़ जेल में बने उत्पादों का स्टाल है। वहां मौजूद कर्मचारी कहते हैं, लोग दिलचस्पी तो खूब दिखाते हैं पर खरीदारी नहीं करते। लोग बस यह देखते हैं, अच्छा तिहाड़ में कैदियों का बनाया सामान बिकता भी है। लेकिन जब जेब में कैश नहीं है तो भला खरीदेंगे कहां से।
एयर फ्यूरिफायर की धूम
सबसे ज्यादा भीड़ अगर किसी स्टाल पर है तो वह है एयर फ्यूरिफायर। स्टाल पर मौजूद सेल्सगर्ल का कहना है कि हम कंपनी से ही हैं और दिवाली के बाद छाए स्माग ने लोगों को प्रदूषण के खतरे के प्रति सचेत किया है। 300 स्क्वायर फीट के कमरे के लिए 13 हजार में एयर फ्यूरिफायर मौजूद है। आप यहां इसे बुक करा सकते हैं या आनलाइन भी खरीद सकते हैं।
बस यादें रही जाएंगी नया बनेगा प्रगति मैदान
अधिकारियों का कहना है कि मेला खत्म होने के बाद प्रगाति मैदान के पुनर्निर्माण का काम शुरू हो जाएगा। अलग अलग राज्यों के पेवेलियन भी गिरा दिए जाएंगे। सरकार की योजना यहां अंतरराष्ट्रीय स्तर का कनवेंशन सेंटर बनाने की है। 7 से 12 नंबर हाल बने रहेंगे। लेकिन यहां काफी कुछ बदल जाएगा। इस पर 2000 करोड़ का खर्च आएगा। मौजूदा स्वरूप में प्रगति मैदान की बस यादें रह जाएंगी।