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एम्स में कोरोना का इलाज कर रहे विदेशी चिकित्सकों को नहीं मिल रहा वेतन, एंबुलेंस कर्मचारी भी हड़ताल पर 

Tue, 07 Apr 2020 08:53 PM IST
Mohit Mudgal पीटीआई / अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
पीटीआई / अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: Mohit Mudgal Updated Tue, 07 Apr 2020 08:53 PM IST
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Foreign doctors treating corona in AIIMS not getting salary, ambulance workers on strike
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : PTI

दिल्ली के एम्स अस्पताल में 70 विदेशी चिकित्सकों का एक दल भारतीय चिकित्सकों के साथ मिल कर दिन रात मरीजों का उपचार कर रहा है। मगर आपको जानकर हैरानी होगी कि इस दल के किसी भी सदस्य को वेतन नहीं मिल रहा है, जिसके चलते इन्हें कई दिक्कतों का सामना कर पड़ रहा है। स्थिति इतनी खराब है कि इन चिकित्सकों को अपने सहयोगियों से उधार लेकर काम चलाना पड़ रहा है। 

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इस पर एम्स के अधिकारियों का कहना है कि नेपाल, श्रीलंका, भूटान और बांग्लादेश के इन चिकित्सकों को इनके देश प्रायोजित करते हैं। वहीं जूनियर और सीनियर विदेशी चिकित्सकों का कहना है कि उनके देशों में भी बंद के कारण बैंक काम नहीं कर रहे हैं।
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एम्स प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि संस्थान चिकित्सकों को वेतन देने के लिए बाध्य नहीं है।

एम्स रेजिडेंट डॉक्टर्स असोसिएशन (आरडीए) ने पांच अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा है, जिसमें कहा गया है कि नियमों  में सुधार कर विदेशी चिकित्सकों को वेतन दिया जाना चाहिए। विदेशी चिकित्सक विषम परिस्थितियों में भी काम में जुटे हैं।

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विदेशी चिकित्सकों की मांग कम से कम स्टाइपेंड तो मिले

आरडीए के अध्यक्ष आदर्श सिंह ने पीटीआई को बताया कि विदेशी चिकित्सकों के भुगतान के मसले को जल्द सुलझाने की जरूरत है। संकट की इस घड़ी में वे हमारे देश की सेवा कर रहे है। संबद्ध प्राधिकारों को उनके बकाए का भुगतान करना चाहिए।

विदेशी चिकित्सकों का कहना है कि वे अपने सहयोगियों से लिए गए उधार पर आश्रित हैं क्योंकि उनके देशों में कोरोना वायरस की वजह से बंद के कारण बैंक काम नहीं कर रहे हैं।

एम्स के सामुदायिक चिकित्सा विभाग में नेपाल के चिकित्सक सागर पोउदेल ने पीटीआई से कहा कि संकट की इस घड़ी में हम अपने भारतीय सहयोगियों की ही तरह बिना थके काम कर रहे हैं लेकिन तब भी हमारा भुगतान नहीं किया जा रहा है। बंद की वजह से हम अपने घरों से पैसे नहीं मंगा सकते और इसलिए हमें अपने भारतीय सहयोगियों से उधार लेना पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि अधिकारियों को कम से कम उनका स्टाइपेंड (वजीफा) ही देना चाहिए क्योंकि आर्थिक संकट के बावजूद वे भारतीय मरीजों का इलाज कर रहे हैं।

हर वर्ष सार्क देशों के चिकित्सक तीन संस्थानों -दिल्ली एम्स, पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (पीजीआईएमईआर), चंडीगढ़ और पुडुचेरी के जवाहरलाल इंस्टीट्यूट ऑफ पोस्टग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च(जेआईपीएमईआर) में मेडिकल कोर्स करने के लिए भारत आते हैं।

वेतन नहीं मिलने पर एंबुलेंस कर्मचारियों ने की हड़ताल

वेतन नहीं मिलने पर एंबुलेंस कर्मचारियों ने हड़ताल कर दी है। मंगलवार को दिल्ली कैट्स के एंबुलेंस चालक और ईएमटी कर्मचारियों ने हड़ताल शुरू करने के साथ ही एंबुलेंस संचालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें दो महीने से वेतन नहीं दिया जा रहा है। पीएफ को लेकर भी ठेका कंपनी के दिशा निर्देश स्पष्ट नहीं हैं। इसके चलते कर्मचारियों का शोषण हो रहा है। इनका कहना है कि दिल्ली सरकार से भी कई बार शिकायत की जा चुकी है लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई। इसी के चलते कर्मचारियों ने अब हड़ताल का फैसला लिया है। 

उधर दिल्ली स्वास्थ्य विभाग ने भी आधिकारिक जानकारी नहीं दी है। वहीं एंबुलेंस ऑपरेशन से जुड़ीं अधिकारी सरिता ने बताया कि दिल्ली में कोई हड़ताल नहीं है। सभी कैट्स एंबुलेंस चल रही हैं। मंगलवार को भी करीब 113 गाड़ियां चलीं। कुछ खराब है जो सेवा में नहीं हैं। 

आउटसोर्स एंबुलेंस कर्मचारी कल्याण समिति के नवनीत कुमार ने बताया कि एंबुलेंस कर्मचारियों के लिए ड्यूटी के दौरान बचाव और सुरक्षा के जरूरी उपकरण उपलब्ध नहीं हैं। जान को जोखिम में डालकर कर्मचारी काम करने को मजबूर हैं।

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