वैश्विक सांस्कृतिक कार्यक्रम को लेकर NGT दे सकता है सख्त फैसला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन के तहत होने वाले वैश्विक सांस्कृतिक कार्यक्रम को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) सख्त फैसला दे सकता है। जांच कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक होने से यह खुलासा हुआ है कि दिल्ली विकास प्राधिकरण के जरिए कार्यक्रम को यमुना के संवेदनशील क्षेत्र में दी गई मंजूरी ट्रिब्यूनल के आदेश का उल्लंघन है।
रिपोर्ट में कहा गया कि कार्यक्रम स्थल का ज्यादातर हिस्सा यमुना डूब क्षेत्र में है। तैयारियों के दौरान वेटलैंड व पौधों को नुकसान पहुंचाया गया है। कमेटी ने एनजीटी से यमुना के पश्चिमी किनारे पर प्राकृतिक संपदाओं के नुकसान को लेकर फाउंडेशन पर 120 करोड़ रुपये तक जुर्माना लगाने की सिफारिश की है।
साथ ही कहा है कि जुर्माने की राशि का इस्तेमाल पर्यावरण को फिर से जीवित करने के लिए किया जाएगा। जांच रिपोर्ट के मुताबिक यमुना के पूर्वी व अन्य किनारों पर भी कार्यक्रम की तैयारियों से नुकसान हुआ है। इस लिहाज से यदि एनजीटी जुर्माना लगाता है तो राशि और बड़ी हो सकती है। मामले की अगली सुनवाई मंगलवार को होनी है।
नई जांच कमेटी में ये थे शामिल
पुरानी रिपोर्ट में तथ्यों में अंतर के बाद नई रिपोर्ट मैली से निर्मल यमुना पुनरुद्धार योजना -2017 की प्रधान समिति के चेयरमैन व जल संसाधन मंत्रालय के सचिव शशि शेखर व दिल्ली आईआईटी प्रोफेसर एके गोसाईं, दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर सीआर बाबू और जयपुर के बृज गोपाल, दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के वरिष्ठ अधिकारी, सिंचाई विभाग के अधिकारी ने निरीक्षण के बाद ट्रिब्यूनल में पेश की।
कमेटी के अनुसार इस तरह के कार्यक्रमों को यमुना डूब क्षेत्र जैसे पर्यावरणीय संवेदनशील जगहों पर मंजूरी नहीं मिलनी चाहिए। आर्ट ऑफ लिविंग की ओर से कार्यक्रम की मंजूरी 35 लाख लोगों के लिए ली गई थी।
हालांकि अब आयोजक का कहना है कि कार्यक्रम में कुल 2 से 3 लाख लोग ही आएंगे। ऐसे में कमेटी ने सिफारिश की है कि फाउंडेशन को अपना बदला गया प्लान हलफनामे के साथ कोर्ट में दाखिल करना चाहिए। साथ ही जल्द से जल्द निर्माण मलबे को डूब क्षेत्र से हटाया जाना चाहिए।
नहीं रखा डूब क्षेत्र का ख्याल
कमेटी ने रिपोर्ट में कहा है कि 19 फरवरी को एनजीटी के आदेश के बाद 20 फरवरी को कार्यक्रम स्थल का दौरा किया गया था। आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन की ओर से कार्यक्रम के संयोजक गौतम विज से भी बातचीत की गई।
कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि डीएनडी फ्लाईओवर और यमुना के बीच जो भी डूब क्षेत्र था उसे पाटकर बराबर कर दिया गया है। इस बीच में मौजूद छोटे जलाशयों को भी पाट दिया गया और सब्जियों के पौधों को भी हटाया गया है।
निर्माण मलबा कुछ सड़कों पर और कुछ नदी किनारे फेंका गया है। 650 शौचालयों का भी निर्माण किया गया है। स्थल पर स्टील पाइप, लकड़ी और कई तरह के सामान निर्माण के लिए मौजूद हैं।
डीडीए ने दिए थे भ्रामक तथ्य
मालूम हो कि एनजीटी इस मामले पर जांच के लिए दो बार कमेटी नियुक्त कर चुका है। पहली कमेटी में डीडीए और प्रोफेसर एके गोसाईं की रिपोर्ट में अंतर पाया गया था।
डीडीए का कहना था कि कार्यक्रम स्थल पर तैयारियों में किसी भी तरह यमुना संबंधी आदेशों का उल्लंघन नहीं किया गया है।
वहीं गोसाईं ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि कार्यक्रम स्थल के कारण यमुना डूब क्षेत्र के साथ वेटलैंड को भी नुकसान पहुंचाया गया है। तथ्यों में अंतर के चलते एनजीटी ने दोबारा कमेटी गठित की थी।