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जलप्रलय : प्रकृति दे रही चेतावनी, अगला नंबर आपका है

Thu, 11 Sep 2014 11:24 PM IST
अमर उजाला, गाजियाबाद
अमर उजाला, गाजियाबाद Updated Thu, 11 Sep 2014 11:24 PM IST
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Flood: Nature giving warning, the next number is yours

समय से बारिश न आने, सर्दी-गर्मी-बरसात के आगे-पीछे होने को आप भले ही सामान्य मान रहे हों, लेकिन विशेषज्ञ इससे चिंतित हैं। वह इसको प्रकृति की चेतावनी मान रहे हैं।

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यह किसी बड़ी त्रासदी का संकेत है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह प्रकृति के दोहन प्रतिशोध का शुरूआती लक्षण है। यदि तत्काल नहीं संभला गया तो उत्तराखंड-कश्मीर जैसी आफत यहां कभी भी आ सकती है।
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उत्तराखंड-कश्मीर की समस्या एकाएक नहीं आई है। विशेषज्ञों की मानें तो दशकों से प्रकृति के साथ की जा रही छेड़छाड़ के चलते प्रकृति का यह विभत्स रूप सामने आया है।
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यही हाल मैदानी क्षेत्रों में भी हो सकता है। सबसे ज्यादा खतरा गंगा-जमुना के दोआब क्षेत्र को है। दिल्ली से सटे एनसीआर के इस क्षेत्र में प्रकृति के साथ सबसे ज्यादा खिलवाड़ हुआ है।

शासन ने 2010 में एनसीआर के हालात जानने के लिए कमेटी का गठन किया था। इसमें वन विभाग के अफसर, पर्यावरण व मौसम वैज्ञानिक तथा भूगर्भ विशेषज्ञ शामिल थे। विशेषज्ञों की टीम केअनुसार यहां के हालात बेहद नाजुक हैं।

एनसीआर में ऊंची अट्टालिकाओं के साथ ही अंधाधुंध पशुओं व पेड़ों का कटान होने, तालाबों पर कब्जे, अवैध खनन और भूजल संचय में कमी व अत्यधिक दोहन से समष्टि चक्र गड़बड़ा गया है।

भूजल स्तर गिरने, पाल्यूशन
तापमान बढ़ने और वर्षा, गर्मी-सर्दी में हो रहे परिवर्तन घातक हैं। टीम में शामिल भूगर्भ वैज्ञानिक नवीन कुमार दास, सरदार बल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मेरठ के मौसम वैज्ञानिक डा. एके अहलूवालिया और केवीके के पर्यावरण वैज्ञानिक डा. विवेक राज सिंह का मानना है कि एनसीआर के हालात यूपी में सबसे ज्यादा खराब हैं।


यहां की खुशहाल जिंदगी खतरे की जद में है। सूखा पड़ने, अत्यधिक वर्षा होने और तीव्र भूकंप के लिए तैयार रहना होगा। प्रकृति अब ज्यादा हस्तक्षेप सहन करने की स्थिति में नहीं है।

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