झोलाछाप की दवा से जान पर बन आई: मासूम को जिम्स में मिला नया जीवन, पूरे शरीर पर थे डरा देने वाले छाले
डॉक्टरों ने बताया कि बच्चें की त्वचा, मुंह, आंखों और जननांगों की श्लेष्मा झिल्ली निकल रही थी। जांच के बाद पता चला कि वह स्कोर्टेन स्केल लेवल तीन पर है। जिसमें मरीज के बचने की उम्मीद केवल 42 प्रतिशत रहती है।
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राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) के डॉक्टरों ने पांच साल के बच्चे का जीवन बचाकर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। बच्चे को बुखार आने पर माता-पिता ने झोलाछाप से दवा लेकर खिला दी थी, जिसके बाद उसके पूरे शरीर में छाले निकल आए और आंखें लाल हो गईं।
डॉक्टरों ने बताया कि बच्चें की त्वचा, मुंह, आंखों और जननांगों की श्लेष्मा झिल्ली निकल रही थी। जांच के बाद पता चला कि वह स्कोर्टेन स्केल लेवल तीन पर है। जिसमें मरीज के बचने की उम्मीद केवल 42 प्रतिशत रहती है। बाल रोग विभाग के डॉ. सुजाया मुखोपाध्याय व त्वचा रोग विभाग के डॉ. पीहू सेठी की देखरेख में बच्चे का इलाज किया गया।
डॉ. पीहू सेठी के बताया कि यह प्रतिरक्षा जनित (इम्यून-मीडिएटेड) साइटोटॉक्सिक प्रतिक्रिया है, जिसमें त्वचा की कोशिकाएं (केराटिनोसाइट्स) प्रभावित होती हैं। इसके कारण एंटीबॉडी शरीर के खिलाफ ही काम करने लग जाती है। उन्होंने बताया कि सर्जरी विभाग, ईएनटी, नेत्र रोग विभाग के डॉ. सिद्धार्थ, डॉ. गौरांगी, डॉ. सत्येंद्र और डॉ. समक्ष की टीम ने 10 दिन में बच्चे का सफल इलाज कराने में कामयाबी हुई। 15 दिनों बाद उसे छुट्टी दे दी गई है।