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दुनिया में पहली बार बिना ऑपरेशन किए छाती से निकली सिस्ट, दिल्ली के डॉक्टरों ने बचाई श्रीनगर की महिला की जान

Wed, 16 Sep 2020 10:55 PM IST
प्राची प्रियम अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: प्राची प्रियम Updated Wed, 16 Sep 2020 10:55 PM IST
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First case ever cyst taken out from a lady patients chest without operation by Delhi doctors
दिल्ली के डॉक्टरों ने बचाई महिला मरीज की जान - फोटो : अमर उजाला

बिना ऑपरेशन किए छाती से हाइडैडिट सिस्ट निकालकर दिल्ली के डॉक्टरों ने श्रीनगर की महिला मरीज की जान बचाई है। डॉक्टरों का दावा है कि दुनिया में इससे पहले कभी भी इस तकनीक को अपनाया नहीं गया है। पहली बार क्रायोप्रोब का उपयोग करते हुए टूटे हाइडैटिड सिस्ट को हटाने में कामयाबी हासिल की है।

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डॉक्टरों के अनुसार हाइडैटिड सिस्ट लंबे टैपवार्म के लार्वा के कारण होता है। टूटे हुए सिस्ट को क्रायोप्रोब के माध्यम से पहले फ्रिज किया और लोकल एनेस्थिसिया देकर मरीज के मुंह के रास्ते इसे निकाला गया। 
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इस प्रक्रिया के बाद मरीज को सांस की तकलीफ जैसे लक्षणों से तुरंत राहत मिली और मरीज ने दो महीने में पहली बार लगातार 14 घंटे तक नींद ली। डॉक्टरों के अनुसार 45 वर्षीय श्रीनगर निवासी मरीज रूही अन निसा के दाहिने फेफड़े से सिस्ट को हटाया गया है। इसके लिए आमतौर पर छाती का ऑपरेशन करना पड़ता है। 
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वरिष्ठ डॉ. संदीप नायर ने बताया कि मरीज के दाएं फेफड़े के निचले हिस्से में 43.35 मिमी का सिस्ट (टेनिस बॉल के आकार के बराबर) पाया गया था। श्रीनगर में ब्रोन्कोस्कोपी प्रक्रिया के साथ सीटी स्कैन कराया। हालांकि मरीज की हालत बिगड़ती गई और उन्हें लगातार सांस की तकलीफ रहने लगी। 

इसकी वजह से मरीज नींद भी नहीं ले पा रही थीं। अस्पताल पहुंचने के बाद जांच में हाइडैटिड सिस्ट के बारे में पता चला। डॉ नायर ने बताया कि हाइडैटिड सिस्ट से ग्रस्त कुछ रोगियों में एलर्जिक प्रतिक्रिया होती है जिसके कारण मरीज के जीवन के लिए खतरा हो सकता है। 

डॉ. नायर के मुताबिक, भारत में हाइडैटिड सिस्ट असामान्य नहीं है, लेकिन इसे नियमित रूप से शल्य चिकित्सा द्वारा निकाला जाता है। जबकि इस केस में ऑपरेशन किए बगैर सिस्ट को निकाला गया है। 


इस तरह के मामले अक्सर देश में आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और जम्मू और कश्मीर में पाए जाते हैं। ये कुत्तों, भेड़, बकरी और सूअर जैसे जानवरों में पाए जाने वाले लार्वा के कारण होते हैं।

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