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फायर सिस्टम फेल होने से गई जान
अमर उजाला, गाजियाबाद
Updated Sat, 02 May 2015 01:53 AM IST
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आरडीसी के क्लार्क्स इन एप्पल ट्री होटल में हुआ हादसा होटल प्रबंधन की लापरवाही का नतीजा माना जा रहा है।
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एफएसओ ने अपनी शुरुआती जांच में माना है कि अगर होटल का फायर सिस्टम सही होता सुशांत खरे की जान बचाई जा सकती थी। जिस एंबुलेंस में उन्हें ले जाया गया, उसमें ऑक्सीजन मास्क भी नहीं था।
एफएसओ अरुण कुमार ने बताया कि होटल प्रबंधन की बड़ी लापरवाही ये रही कि कर्मचारियों ने बिना लोगों को निकाले ही उस कमरे का गेट तोड़ दिया, जिसमें आग लगी थी। इससे पूरी बिल्डिंग में धुआं फैल गया।
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वेंटिलेशन न होने के कारण धुआं कमरों में घुस गया और कार्बन मोनोऑक्साइड एफएसओ ने बताया कि स्मोक अलार्म बजने को लेकर भी संदेह है। या तो स्मोक अलार्म बजा नहीं, अगर बजा तो कर्मचारियों ने पहले खुद ही आग बुझाने की कोशिश की।
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जब वे काबू नहीं कर सके, तब फायर ब्रिगेड को 25-30 मिनट बाद सूचना दी गई। परिजन शनिवार को फ्लाइट से शव नागपुर लेकर जाएंगे। होटल में ठहरे वैभव और आनंद ने प्रबंधन की लापरवाही बताई।
सुशांत की पत्नी और बेटे ने प्रबंधन के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने की बात कही। हालांकि देर रात तक रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई थी।
ये लोग फंसे थे होटल में
छठे फ्लोर पर: सचिन सिंघल और संजू, हिमांशु मित्तल (गाजियाबाद अशोकनगर), वैभव अग्रवाल (कोलकाता), शुभम त्यागी, गीता त्यागी (आगरा), डॉ. विश्वकर्मा राकेश, सुनील सिंह, राजेंद्र तोमर, इनरनथा (कोलकाता), पनरसेल्वम पी, जेम्स पिंटो, ऋषिकेश देशपांडे और तीन अन्य। सातवें फ्लोर पर मोहम्मद सादिक, फरीद, रविंद्र रावत, पीसी दास (भुवनेश्वर), यीना जैन, गौरव जैन, प्रियंका जैन (देहरादून) और आठवें फ्लोर पर आनंद अखोरे (लखनऊ) फंसे थे।
डंबल-रॉड ने बचाई 24 जिंदगियां
क्लार्क्स इन एप्पल ट्री होटल में बने एक मिनी जिम में रखे डंबल और रॉड यहां फंसे लोगों के लिए ‘जिंदगी’ बन गए। शीशा तोड़ने के दौरान जख्मी हुए वैभव अग्रवाल ने बताया कि हर तरफ धुआं और अंधेरा था। कुछ नजर नहीं रहा था।
भगदड़ और अफरा-तफरी में लोग दीवारों और एक-दूसरे से टकरा रहे थे। वेंटिलेशन के लिए शीशे तोड़ने की कोशिश की, मगर नहीं टूटे। इस दौरान पैरों में डंबल और रॉड लगे, जिनसे शीशे तोड़े गए।
इसके बाद फंसे अन्य लोगों ने भी रॉड और डंबल से तीन-चार खिड़कियों के शीशे तोड़े। ऐसा लगा कि अगर कुछ देर और शीशे नहीं टूटते तो सांसें थम जाती। कुछ देर बाद लगा खिड़कियों से कूद जाएं, तभी जान बचेगी।
इसके बाद फायर ब्रिगेड और पुलिस पहुंच गई। उन्होंने सारे फ्लोर के शीशे तोड़े और जीने से उतारा। आनंद अखोरे ने बताया कि होटल से बाहर निकलकर उन्हें ऐसा लगा जैसे नई जिंदगी मिली हो।