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वर्कलोड बढ़ा तो महिला डॉक्टर ने दिया इस्तीफा
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव
Updated Fri, 20 Jun 2014 08:31 AM IST
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गुड़गांव में सिविल अस्पताल में मेडिकल ऑफिसर के रूप में तैनात महिला रोग विशेषज्ञ डॉक्टर मधु ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने प्रधान चिकित्सा अधिकारी (पीएमओ) डॉ. असरुद्दीन को इस्तीफा भेज दिया है।
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अब इसे आगे सरकार को भेजा जाएगा। इस्तीफे की पुष्टि पीएमओ ने की है। उधर, उनके इस्तीफे के बाद से स्त्री रोग विभाग में वर्कलोड बढ़ गया है। सिविल अस्पताल के ओपीडी में हर दिन अमूमन 1600 से 2000 मरीज आते हैं। सिर्फ स्त्री रोग से संबंधित इलाज के लिए 300 से 400 सौ महिलाएं पहुंचती हैं।
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सामान्य रोग की ओपीडी में भी अमूमन 150 मरीजों को एक डॉक्टर देखते हैं। सिविल अस्पताल में 55 पदों में 16 पद खाली है। वहीं, स्त्री रोग विशेषज्ञ के 9 पद हैं। डॉक्टर मधु के इस्तीफे के बाद अब एक पद खाली हो गया है। इसका असर मरीजों पर पड़ना लाजमी है।
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स्त्री रोग विशेषज्ञ की ड्यूटी तीन शिफ्टों में होती है। एक शिफ्ट में दो डॉक्टर होते हैं। कई बार डॉक्टर कोर्ट केस या छुट्टी पर चले जाते हैं। ऐसी हालत में डॉक्टरों की कमी मरीजों की जान पर भारी पड़ सकता है।
कई और छोड़ सकते हैं!
अधिकारिक सूत्रों के मुताबिक सिविल अस्पताल के डॉक्टरों के पास वर्कलोड बहुत अधिक है। मुख्यमंत्री मुफ्त योजना और अन्य सरकारी स्कीम की वजह से सिविल अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। साथ ही कोर्ट केस और अन्य कागजी कार्रवाई भी होती है। इससे अन्य डॉक्टर भी परेशान हैं।
ऐसे में कई और भी इस्तीफा दे सकते हैं। बता दें कि पहले भी दो डॉक्टर नेत्र विशेषज्ञ डॉ. विवेक और दवा विशेषज्ञ डॉ. अश्विनी इस्तीफा दे चुके हैं।
क्या है वजह?
डॉक्टरों की मानें तो साइबर सिटी में बढ़ती मेडिकल हब में करियर के बेहतरीन विकल्प हैं। सरकारी अस्पताल में नौकरी पाने वाले डॉक्टरों को 45 से 80 हजार रुपये मिलते हैं, जबकि निजी अस्पताल में इसकी शुरुआत एक लाख से ढाई लाख रुपये तक होती है। काम का कम दबाव, कॉरपोरेट सुविधा और अधिक सैलरी की वजह से डॉक्टरों का रुझान इधर बढ़ा है।
प्रसुति विभाग में मरीजों की संख्या
जनवरी.......1218
फरवरी.......1148
मार्च.......1034
अप्रैल.......998
मई.......97